मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 19 दिसंबर को पड़े छापे के बाद से 41 तक फरार रहने के बाद आखिरकार पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा लोकायुक्त के हत्थे चढ़ गया. मंगलवार को जब सौरभ भोपाल कोर्ट में सरेंडर के लिए आ रहा था, उससे पहले ही लोकायुक्त ने उसे पकड़ लिया. सौरभ को पकड़ने की कहानी भी एकदम फ़िल्मी है.
दरअसल, सोमवार को दोपहर 12:30 बजे अचानक भोपाल कोर्ट में सौरभ शर्मा अपने वकील के साथ पेश हुआ और सरेंडर के कागज़ातों पर साइन किए. जैसे ही इसकी जानकारी लोकायुक्त को मिली तो फ़ौरन एक टीम कोर्ट के लिए रवाना हुई. लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही सौरभ वहां से निकल चुका था. इसके बाद लोकायुक्त की टीम ने सौरभ को शहर भर में तलाशना शुरू किया. लेकिन सफलता नहीं मिल रही थी. ऐसे में लोकायुक्त ने सौरभ से जुड़े लोगों के फोन सर्विलांस पर लेने का फैसला किया
लगातार बदलता रहा लोकेशन
सर्विलांस से पता चला कि सौरभ से जुड़े लोगों की एक अनजान नंबर पर लगातार बातचीत हो रही है. इस नंबर को ट्रेस किया गया तो मालूम हुआ कि इसकी लोकेशन लगातार बदल रही है. इसके बाद कई टीमें बनाकर भोपाल शहर में इन अनजान नंबर धारक की तलाश की गई.
पहले लोकेशन दूरदर्शन केंद्र के पास एक होटल की मिली. थोड़ी देर बाद संदिग्ध नंबर की लोकेशन भोपाल की 10 नंबर मार्केट के पास मिली. इसी दौरान लोकायुक्त की टीम ने आरबीआई कॉलोनी के पास बिट्टन मार्केट पर एक संदिग्ध कार को पीछा करते हुए रोका तो उसमें सौरभ बैठा हुआ था.
लोकायुक्त ने सौरभ को वहीं से हिरासत में ले लिया और लोकायुक्त कार्यालय ले गए. सौरभ ने बताया कि वो सरेंडर करने कोर्ट जा रहा था. इसके बाद शाम को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 4 फरवरी तक वह लोकायुक्त की रिमांड में भेज दिया गया है.