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दिल के भीतर थे 'मौत के थक्के', एम्स के डॉक्टरों ने किए साफ, मरीज को दी नई जिंदगी

AIIMS Bhopal Heart Surgery Success: होशंगाबाद के युवक के हार्ट में मौजूद जानलेवा थक्कों ने उसे लकवा और किडनी फेलियर की दहलीज पर खड़ा कर दिया था, उसे एक जटिल ओपन हार्ट सर्जरी के जरिए नया जीवन मिला है.

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होशंगाबाद के युवक को AIIMS में मिला नया जीवन.(Photo:representational)
होशंगाबाद के युवक को AIIMS में मिला नया जीवन.(Photo:representational)

भोपाल एम्स के डॉक्टरों ने एक जटिल हृदय सर्जरी कर गंभीर बीमारी से पीड़ित एक मरीज को नई जिंदगी दी है. होशंगाबाद निवासी 30 साल का मरीज पिछले छह महीनों से हार्ट अटैक, लकवा और किडनी की समस्याओं से जूझ रहा था, अब पूरी तरह स्वस्थ हो गया है.

दरसअल, मरीज जब एम्स भोपाल पहुंचा तो उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी. मरीज को पहले ही एक हार्ट अटैक आ चुका था. उसके हृदय का बायां हिस्सा (लेफ्ट वेंट्रिकल) बहुत कमजोर था.

जांच में हृदय के भीतर कई बड़े और गतिशील थक्के पाए गए. इन थक्कों की वजह से मरीज की किडनी की धमनी अवरुद्ध हो गई थी और वह लकवे का शिकार भी हो चुका था. थक्कों के मस्तिष्क में जाने पर तत्काल मृत्यु का खतरा बना हुआ था.

बीमारी की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) के विभागाध्यक्ष डॉ. योगेश निवारिया के नेतृत्व में डॉक्टरों ने 'लेफ्ट वेंट्रिकुलर थ्रोम्बेक्टोमी' (ओपन हार्ट सर्जरी) करने का फैसला लिया.

सर्जिकल टीम ने सावधानीपूर्वक हार्ट को खोलकर उन सभी थक्कों को बाहर निकाल दिया जो भविष्य में लकवे या मौत का कारण बन सकते थे. इस ऑपरेशन में डॉ. एम किशन, डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव सहित एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. हरीश की टीम ने अहम भूमिका निभाई.

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'अब बाहर जाने की जरूरत नहीं'

एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानंद कर ने इस सफलता पर टीम को बधाई देते हुए कहा कि अब मध्य प्रदेश के मरीजों को गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा. एम्स भोपाल में अत्याधुनिक सुविधाओं के कारण अब जटिल से जटिल सर्जरी न्यूनतम जोखिम के साथ संभव है.

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