
लखनऊ की शाम 14 फरवरी वैलेंटाइन डे को 'साहित्य आजतक' के मंच से संगीतकार शब्बीर कुमार ने अपनी शानदार परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया. "गुलाबी आंखें जो तेरी देखी" और "मुझे पीने का शौक नहीं" जैसे सदाबहार गीतों ने महफिल में रंग भर दिया.
शब्बीर कुमार ने फरवरी महीने को प्यार का महीना बताते हुए मंच से शानदार गीतों की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने अपनी मधुर आवाज से फैंस को दीवाना बना दिया.
प्रेम पत्र से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत शब्बीर कुमार ने क्लासिक गीत "प्रेम पत्र" से की.
– मेहरबान लिखूं, हसीना लिखूं या दिलरूबा लिखूं,
हैरान हूं कि इस खत में क्या लिखूं...
ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर तुम नाराज ना होना,
कि तुम मेरी जिंदगी हो, मेरी बंदगी हो.
उनकी मधुर आवाज और प्रस्तुति ने दर्शकों को पुरानी यादों में ले जाकर झूमने पर मजबूर कर दिया.

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गुलाबी आंखों से बिखेरा जादू
इसके बाद उन्होंने ऑल-टाइम हिट गाना "गुलाबी आंखें जो तेरी देखीं" गाकर महफिल को और भी रंगीन बना दिया. दर्शक इस गीत पर झूम उठे और मंच पर रोमांटिक माहौल बन गया.
शब्बीर कुमार ने लगातार हिट गानों की प्रस्तुति दी. बैक-टू-बैक हिट गाकर माहौल बना दिया. उन्होनें इसके बाद ये गीत गाया.
– मुझे पीने का शौक नहीं... पीता हूं ग़म भुलाने को, तेरी यादें मिटाने को... उनकी आवाज ने हर दिल को छू लिया.
इस सत्र में शब्बीर कुमार ने अपने और दर्शकों के बीच के रिश्ते को एक शानदार गीत के माध्यम से व्यक्त किया.
उन्होंने अपने और फैंस के रिश्ते को इस गीत के माध्यम से बताया.
– तुमसे मिलकर ना जाने क्यों, और भी कुछ याद आता है...
आज का अपना प्यार नहीं है, जन्मों का ये नाता है...
अंत में शब्बीर कुमार ने "चाहत रहेगी सदा, आ कसम खा लें" गीत गुनगुनाया और अपनी शानदार परफॉर्मेंस को विराम दिया.