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साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10 'पुराण-संस्कृति' श्रेणी में देवदत्त पट्टनायक, नमिता गोखले, आनंद नीलकंठन के अलावा और कौन

साल 2022 में 'साहित्य तकः बुक कैफे टॉप 10' पुस्तकों की कड़ी में आज 'पुराण-संस्कृति' की बात. इनमें देवदत्त पट्टनायक, नमिता गोखले, आनंद नीलकंठन, हृदयनारायण दीक्षित और आशा प्रभात के अलावा और किनकी पुस्तकें शामिल हैं. देखें, पूरी सूची- पाएं जानकारी

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साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: पुराण-संस्कृति की पुस्तकें
साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10: पुराण-संस्कृति की पुस्तकें

भारतीय मीडिया जगत में जब 'पुस्तक' चर्चाओं के लिए जगह छीजती जा रही थी, तब इंडिया टुडे समूह के साहित्य के प्रति समर्पित डिजिटल चैनल 'साहित्य तक' ने हर दिन किताबों के लिए देना शुरू किया. इसके लिए एक खास कार्यक्रम 'बुक कैफे' की शुरुआत की गई...इस कार्यक्रम में 'एक दिन एक किताब' के तहत हर दिन किसी पुस्तक की चर्चा होती है. पूरे साल इस कार्यक्रम में पढ़ी गई पुस्तकों में से 'बुक कैफे टॉप 10' की यह शृंखला वर्ष के अंत में होती है. इसी क्रम में आज 'पुराण-संस्कृति' श्रेणी की पुस्तकों की बात की जा रही है.
साल 2021 की जनवरी में शुरू हुए 'बुक कैफे' को दर्शकों का भरपूर प्यार तो मिला ही, भारतीय साहित्य जगत ने भी उसे खूब सराहा. तब हमने कहा था- एक ही जगह बाजार में आई नई किताबों की जानकारी मिल जाए, तो किताबें पढ़ने के शौकीनों के लिए इससे लाजवाब बात क्या हो सकती है? अगर आपको भी है किताबें पढ़ने का शौक, और उनके बारे में है जानने की चाहत, तो आपके लिए सबसे अच्छी जगह है साहित्य तक का 'बुक कैफे'. 
हमारा लक्ष्य इन शब्दों में साफ दिख रहा था- "आखर, जो छपकर हो जाते हैं अमर... जो पहुंचते हैं आपके पास किताबों की शक्ल में...जिन्हें पढ़ आप हमेशा कुछ न कुछ पाते हैं, गुजरते हैं नए भाव लोक, कथा लोक, चिंतन और विचारों के प्रवाह में. पढ़ते हैं, कविता, नज़्म, ग़ज़ल, निबंध, राजनीति, इतिहास, उपन्यास या फिर ज्ञान-विज्ञान... जिनसे पाते हैं जानकारी दुनिया-जहान की और करते हैं छपे आखरों के साथ ही एक यात्रा अपने अंदर की. साहित्य तक के द्वारा 'बुक कैफे' में हम आपकी इसी रुचि में सहायता करने की एक कोशिश कर रहे हैं."
हमें खुशी है कि हमारे इस अभियान में प्रकाशकों, लेखकों, पाठकों, पुस्तक प्रेमियों का बेपनाह प्यार मिला. इसी वजह से हमने शुरू में पुस्तक चर्चा के इस साप्ताहिक क्रम को 'एक दिन, एक किताब' के तहत दैनिक उत्सव में बदल दिया. साल 2021 में ही हमने 'साहित्य तक बुक कैफे टॉप 10' की शृंखला भी शुरू की. उस साल हमने केवल अनुवाद, कथेतर, कहानी, उपन्यास, कविता श्रेणी में टॉप 10 पुस्तकें चुनी थीं.
साल 2022 में हमें लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तक प्रेमियों से हज़ारों की संख्या में पुस्तकें प्राप्त हुईं. पुस्तक प्रेमियों का दबाव अधिक था और हमारे लिए सभी पुस्तकों पर चर्चा मुश्किल थी, इसलिए 2022 की मई में हम 'बुक कैफ़े' की इस कड़ी में 'किताबें मिली' नामक कार्यक्रम जोड़ने के लिए बाध्य हो गए. इस शृंखला में हम पाठकों को प्रकाशकों से प्राप्त पुस्तकों की सूचना देते हैं.
इनके अलावा आपके प्रिय लेखकों और प्रेरक शख्सियतों से उनके जीवन-कर्म पर आधारित संवाद कार्यक्रम 'बातें-मुलाकातें' और किसी चर्चित कृति पर उसके लेखक से चर्चा का कार्यक्रम 'शब्द-रथी' भी 'बुक कैफे' की पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने वाली कड़ी का ही एक हिस्सा है.
साल 2022 के कुछ ही दिन शेष बचे हैं, तब हम एक बार फिर 'साहित्य तक: बुक कैफे टॉप 10' की चर्चा के साथ उपस्थित हैं. इस साल कुल 17 श्रेणियों में टॉप 10 पुस्तकें चुनी गई हैं. साहित्य तक किसी भी रूप में इन्हें कोई रैंकिंग करार नहीं दे रहा. संभव है कुछ बेहतरीन पुस्तकें हम तक पहुंची ही न हों, या कुछ पुस्तकों की चर्चा रह गई हो. पर 'बुक कैफे' में शामिल अपनी विधा की चुनी हुई ये टॉप 10 पुस्तकें अवश्य हैं. 
पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की 'साहित्य तक' की कोशिशों के प्रति सहयोग देने के लिए आप सभी का आभार.
साहित्य तक 'बुक कैफे-टॉप 10' साल 2022 की 'पुराण-संस्कृति' श्रेणी की पुस्तकें हैं ये
* 'Garuda Purana and Other Hindu Ideas on Death, Rebirth and Immortality', Devdutt Pattanaik, यह पुस्तक जीवन और मृत्यु के बीच आत्मा के आवागमन और उसके रहस्य की बात करती है, और अमूमन ऐसे गूढ़ सवालों से जूझती है कि- मृत्यु, पुनर्जन्म, स्वर्ग, नर्क और  अमरता क्या है? है भी या नहीं? या इनके बारे में भारतीय, धार्मिक, आध्यात्मिक धारणाओं के बीच विशेषतः गरुण पुराण क्या कहता है. पट्टनायक का मत है कि "कोई भी समाज मिथक के बिना मौजूद नहीं हो सकता क्योंकि यह सही और गलत, अच्छे और बुरे, स्वर्ग और नरक, अधिकार और कर्तव्य की धारणा बनाता है.  यह पुस्तक हिंदू धर्म में कब्र निर्माण की बजाय मृतकों को जलाना क्यों पसंद किया जाता है? क्या इस्लाम में शामिल जन्नत और दोजख़ की परिकल्पना हिंदू धर्म के स्वर्ग और नर्क के समकक्ष है? क्या मृत्यु के लिए वैदिक दृष्टिकोण तांत्रिक मत से भिन्न है? भूत, पिशाच, प्रेत, पितृ और वेताल में क्या अंतर है?  ऐसे विषयों पर भी एक मत रखती है. प्रकाशक: वेस्टलैंड बुक्स
* 'घटोत्कच के मायाजाल में', नमिता गोखले, महाभारत काल के जिन पात्रों को अमरता का वरदान हासिल था, घटोत्कच उनमें प्रमुख है. शायद यही वजह है कि लोगों में महाभारत युग के इस अजेय किरदार के प्रति रुचि है.  गोखले ने चिंतामणि देव गुप्ता नामक तेरह वर्षीय एक किशोर को समय के पार महाभारत युग में ले जाकर न केवल घटोत्कच से मिलवा दिया, बल्कि उसकी मां हिडंबा, महाबली भीम, पांचों पांडव, श्री कृष्ण की नगरी द्वारका आदि से भी मिलवा दिया. घटोत्कच को केंद्र में रखकर  किशोरों और कल्पनाशील बच्चों को यह पुस्तक पौराणिक काल और उसके आख्यानों से जोड़ती है. ऐक्शन और एडवेंचर से भरे तेज भागते कथानक के बीच प्रकृति और संवेदना के साथ संबंधों की मधुरता और उनको उकेरने वाले सुंदर रेखाचित्र इस पुस्तक को खास बनाते हैं. अंग्रेज़ी में यह पुस्तक Last in Time: Ghatotkacha and the Game of Illusions' नाम से प्रकाशित हुई है, जिसका हिंदी अनुवाद अनु सिंह चौधरी ने किया है. प्रकाशक: पेंगुइन रैंडम हाउस इम्प्रिंट के तहत हिन्द पॉकेट बुक्स
* 'उर्मिला', आशा प्रभात,  श्रीलक्ष्मण की अर्द्धांगिनी उर्मिला रामकथा का लगभग उपेक्षित पात्र हैं. पति से लंबे विरह और उस दौरान अपने कर्तव्यों का उदात्त भाव से पालन करने वाली उर्मिला के चरित्र को पर्याप्त विस्तार न तो वाल्मीकि रामायण में मिला, और न ही तुलसी के रामचरितमानस में. प्रभात ने अपनी इस औपन्यासिक कृति में इस अदीखते-से पात्र के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को प्रकाशित करने का अनूठा प्रयास किया है. वे कहती हैं उर्मिला का तप बहुत कठिन है. विरह का ताप कमोबेश हर स्त्री भोगती है परन्तु उर्मिला का विरह इस मायने में विशिष्ट है कि उसमें अश्रुओं के निकलने की वर्जना भी शामिल है. उर्मिला के सम्पूर्ण अनुभव-जगत को अंकित करने के अलावा उपन्यास राम कथा के धार्मिक-आध्यात्मिक पहलुओं से इतर मानवीय पक्ष को सामने रखता है. प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन
* 'वानर: बाली, सुग्रीव और तारा की अमर कथा', आनंद नीलकंठन. यह पुस्तक 'रामायण' काल के बेहद अहम किरदार बाली, उनकी पत्नी तारा और भाई सुग्रीव की कहानी को बेहद अलग परिप्रेक्ष्य में रखती है. पुस्तक यह बताती है कि बाली अंततः किस तरह अपने भाई और पत्नी तारा के प्रेम के बीच मानसिक और आत्मिक तौर पर आहत हो रहा था. इन तीनों किरदारों के बहाने नीलकंठन भारतीय वनों में निवासरत वानर संस्कृति, उस काल की राजनीति, इतिहास, पौराणिकता और सामाजिकता को भी उजागर करते हैं, जिनसे आप अतीत की सुनहरी गलियों में जा सकते हैं. पुस्तक अपने कथानक के चलते मानवता के लिए एक बेहतर और तार्किक भविष्य का रास्ता भी सूझाती है. यह पुस्तक अंग्रेजी में Vanara: The Legend of Baali, Sugreeva and Tara नाम से प्रकाशित हुई है, जिसका हिंदी अनुवाद रमेश कपूर ने किया है. प्रकाशक: पेंगुइन रैंडम हाउस इम्प्रिंट के तहत हिन्द पॉकेट बुक्स
* 'आसक्ति से विरक्ति तक', अंकिता पाण्डेय, यह पुस्तक 'सारला महाभारत' के आधार पर रची गई एक अनूठी कृति है. सारलादास ने व्यास मुनि की प्राचीन कथा को एक नवीन संकल्पना के साथ प्रस्तुत किया. इसे व्यास महाभारत का पहला पुनःकथन भी मान सकते हैं, जिसमें सभी अठारह पर्व सम्मिलित हैं. लेखिका ने इस पुस्तक में विभिन्न पर्वों से चुनी गयी कहानियों के बहुत सुन्दर पुनः कथन के साथ हिन्दी जगत के पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है. यह सारला महाभारत का पुनरावलोकन सरीखा है, जिसमें सावधानीपूर्वक ऐसे छत्तीस प्रसंग चुने गए हैं, जो या तो व्यास महाभारत में हैं ही नहीं या उन्हें सारलादास ने अलग तरह से प्रस्तुत किया है. यह पुस्तक सारला महाभारत के सार के साथ ओड़िआ और संस्कृत महाभारत की भिन्नता से भी रू-ब-रू कराती है. प्रकाशक: वाणी प्रकाशन
* 'काशी-कथा', त्रिलोकनाथ पाण्डेय, ऐतिहासिक शोधों और जनश्रुतियों के ताने-बाने से बुनी गई यह पुस्तक काशी से जुड़े ऐतिहासिक, अप्रतिम आध्यात्मिकता वाले व्यक्तित्वों की जीवनगाथा को उन्हीं के श्रीमुख से कहलवाती है, सिवाय भगवान बुद्ध के. चूंकि वह तथागत हैं, इसलिए उनकी कथा स्वयं काशी नगरी कहती है.   काशी की इन पौराणिक एवं सांस्कृतिक कथाओं में देवाधिदेव महादेव के बनारस को अपनी नगरी के रूप में चुनने की गाथा तो है ही जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ, कबीर, तुलसी, रैदास, कीनाराम तक की आत्मकथात्मक शैली की कहानियां भी शामिल हैं, जो अपने पाठकों को आध्यात्मिकता के अलौकिक संसार में खींच ले जाने में सक्षम हैं. प्रकाशक: प्रलेक प्रकाशन
* 'नाचता अध्यात्म', हृदयनारायण दीक्षित, यह पुस्तक भारतीय वाङ्मय का सहज और समकालीन निचोड़ प्रस्तुत करती है. इसमें  वैदिक दर्शन की आधुनिक मीमांसा, राष्ट्रीय और सांस्कृतिक बोध, परम्परा की निरन्तरता और उसके प्रवाह का साहित्य शामिल है. यह पुस्तक शास्त्र, पुराण और भारतीय इतिहास-पुराणेतिहास का एक ऐसा संगम प्रस्तुत करती है, जो पाठकों के लिए भारतीय संस्कृति को समझने, जानने और आत्मसात करने में सहायक सिद्ध होती है. प्रकाशक: वाणी प्रकाशन
* 'भारतीय संस्कृति के गकार प्रतीक', डॉ. बिन्देश्वरी प्रसाद ठाकुर 'बिपिन', भारतीय संस्कृति में प्रतीकों का हमेशा ही बड़ा महत्त्व रहा है. चाहे वह मूर्तियां हों, वृक्ष हों, नदी, पर्वत, यहां तक कि जानवर भी. लेखक ने इसी क्रम में गकार यानी 'ग' से शुरू होने वाले प्रतीकों, मान्यताओं, ग्रंथों और आस्थाओं का गहन विश्लेषण कर 'गाय, गंगा, गणेश, गायत्री, गीता और गोविन्द' से जुड़े हर पहलू की बात की है और यह बताया है कि इससे जुड़े प्रतीकों, चिन्हों और उनसे जुड़ी श्रद्धा के पीछे की वजह क्या है. गुरु नानक देव जी कहते हैं कि भाव अमूल्य है. इसका धर्म भी अमूल्य है. इसका दरबार भी अमूल्य है और इसका प्रतीक भी अमूल्य है. हर प्रतीक का सम्मान अवश्य करना चाहिए, क्योंकि कौन जाने किसके लिए उससे रास्ता मिलता हो. प्रकाशक: सर्व भाषा ट्रस्ट
* 'कुबेर: लंका का पूर्व राजा', आशुतोष गर्ग, यह पुस्तक धन के राजा कुबेर की गाथा के साथ ही राक्षस राज रावण से उनके संबंधों को भी उजागर करती है. पुस्तक बताती है कि किस तरह कुबेर ने वीरान हो चुकी लंका पर अधिकार स्थापित किया और कैसे राक्षसों ने भयानक षड्यंत्र रच कर लंका को उनसे वापस पाने की ठानी. कुबेर और रावण किस तरह सौतेले भाई थे और किसने इनके बीच विवाद और द्वंद्व को उभारा. कुबेर और रावण की शत्रुता उन्हें कहां ले गई? कुबेर के साथ ऐसा क्या हुआ जिसने कालांतर में महाकवि कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'मेघदूत' की आधारशिला रखी. यह पुस्तक औपन्यासिक होते हुए भी कई सवालों के समाधान करती है. प्रकाशक:  मंजुल पब्लिशिंग हाउस 
* 'डीएनए पुरातत्व और वैदिक संस्कृति', दिव्येन्दु त्रिपाठी, भारत के अतीत का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण संदर्भ वैदिक-लौकिक संस्कृति से जुड़ा है. वैदिक काल तथा उसकी संस्कृति को लेकर अनेक प्रकार के भ्रम तथा मिथ्या धारणाएं शतकों से प्रचलित हैं. दिव्येन्दु ने जेनेटिक्स तथा पुरातत्व के आधार पर वैदिक काल तथा उसकी संस्कृति को समझने का प्रयास किया है. उन्होंने इस क्षेत्र में हुए शोध और अनुसंधानों को विस्तार से रेखांकित किया है, और दावा किया है कि पिछले कुछ दशकों से जेनेटिक्स पुरातत्व आदि के क्षेत्रों में जो उल्लेखनीय कार्य हुए हैं, उनमें से अधिकांश लोकप्रिय इतिहास-पुस्तकों में उपेक्षणीय बने हुए हैं. यह पुस्तक उस कमी को दूर करती है. प्रकाशक: सर्व भाषा ट्रस्ट
सभी लेखकों, प्रकाशकों, अनुवादकों को बधाई!

 

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