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सुरक्षा ही नहीं, बराबरी का भी एहसास देती हैं महिला टैक्सी ड्राइवर

महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महिला टैक्सी ड्राइवर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. कैब चलाने वाली ये महिलाएं सिर्फ सिक्योरिटी का भरोसा ही नहीं देतीं बल्क‍ि समाज में बराबरी का ए‍हसास भी दिलाती हैं.

आमिर खान भी फीमेल कैब ड्राइवर के साथ दिल्ली की सैर कर चुके हैं आमिर खान भी फीमेल कैब ड्राइवर के साथ दिल्ली की सैर कर चुके हैं

दिल्ली के दक्षिणपुरी की निवासी शन्नो बेगम दिखती एक एक आम महिला ही हैं, लेकिन उनमें कुछ खास भी है. शन्नो पुरुषों के वर्चस्व माने जाने वाले एक क्षेत्र में बिना किसी हिचक या डर के पूरी कुशलता से जुड़ी हैं.

हाथों में स्टीयरिंग संभाले शन्नो की गाड़ी जब रेड लाइट पर रुकती है या किसी महिला यात्री को उसकी मंजिल पर छोड़ कर आत्मविश्वास से लबरेज शन्नो जब गाड़ी रिवर्स करती हैं तो अगल-बगल में खड़े अन्य टैक्सी या ऑटो रिक्शा ड्राइवर्स उसे हैरानी से देखते हैं, लेकिन इन सब बातों से बेफिक्र शन्नो संजीदगी से अपना काम करती हैं.

कुछ ऐसे हुई इस कहानी की शुरुआत
10 साल पहले पति की मृत्यु के बाद से वह बमुश्कि‍ल अपना घर चला रही थीं. फिर उन्होंने आजाद फाउंडेशन से ड्राइविंग सीखकर कैब चलाना शुरू किया. शन्नो पिछले 4-5 साल से कैब ड्राइवर के रूप में काम कर रही हैं. वर्तमान में 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही शन्नो अब अपने परिवार को अच्छी तरह चला रही हैं और अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा भी दिला रही हैं.

काम में काेई बंटवारा नहीं होता
पुरुषों और महिलाओं के काम को अलग करने की परिपाटी वाले हमारे समाज में टैक्सी या कैब चलाना केवल पुरुषों का काम माना जाता रहा है और ऐसे में किसी महिला के हाथों में स्टीयरिंग संभाले देखने पर भंवे तनना सहज-सी बात है. लेकिन दिल्ली, मुंबई जैसे भीड़-भाड़ वाले शहरों में ओला, वीरा, सखा, प्रियदर्शनी जैसी टैक्सी कंपनियों की महिला कैब ड्राइवरों को रखने की पहल उनकी सेवा का प्रयोग करने वाली महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है. साथ ही इन महिलाओं का यह काम महिलाओं को बराबरी का एहसास भी देता है.

महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन
इस प्रकार की सेवाएं एक ओर समाज के कमजोर तबकों या कम पढ़ी लिखी महिलाओं को सशक्त बना रही हैं. इसके साथ ही अकेले यात्रा कर रही महिलाओं को भी ये कुछ हद तक चिंतामुक्त कर रही हैं. महिलाओं के प्रति अपराधों के तेजी से बढ़ते ग्राफ के बीच इस प्रकार की सेवाएं और भी ज्यादा जरूरी हो गई हैं. खासतौर पर पिछले कुछ वर्षों में पुरुष कैब ड्राइवरों द्वारा महिलाओं के साथ हिंसा और दुष्कर्म की हुई घटनाओं को देखते हुए महिला कैब ड्राइवरों का आना राहत की बात है.

राह नहीं है आसान
पेशे से इवेंट मैनेजर शैली राठी कहती हैं कि काम से लौटने में देर होने पर पुरुष कैब ड्राइवर के साथ यात्रा करने में सचमुच डर जुड़ा होता है, लेकिन अगर कैब कोई महिला ड्राइवर चला रही हो तो रास्ता निश्चिंत होकर कट जाता है. हालांकि पुरुषों के वर्चस्व वाले इस पेशे में हर बार महिला ड्राइवरों का मिलना आसान नहीं होता.
आंकड़े साबित करते हैं कि महिला ड्राइवर जानलेवा दुर्घटनाओं के लिए बेहद कम जिम्मेदार होती हैं, लेकिन फिर भी माना यही जाता है कि महिलाएं कुशलता से वाहन नहीं चला सकतीं. ऐसे में कुशलता से अपने काम को अंजाम देने वाली ये महिला कैब ड्राइवर लोगों की मानसिकता को बदलने में भी अपनी हिस्सेदारी निभा रही हैं.

दुनिया के हर कोने में है यह समस्या
दुनिया के सभी देशों की इस मामले में स्थिति लगभग ऐसी ही है. आप लंदन, बीजिंग, भारत या न्यूयॉर्क कहीं भी कैब बुक कराएं, संभावना यही है कि ड्राइवर पुरुष ही होगा. यहां तक कि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी महिला टैक्सी ड्राइवर्स का आंकड़ा केवल 2 प्रतिशत है. न्यूयॉर्क शहर में 50,000 टैक्सी ड्राइवरों में से महिला ड्राइवरों का अनुपात केवल 1 प्रतिशत है.
ऑल इंडिया वुमेन्स प्रोग्रेसिव एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन महिलाओं को इस पेशे में लाने को एक अच्छा कदम बताते हुए कहती हैं कि इससे परिवहन क्षेत्र में महिला यात्रियों के लिए सुगमता बढ़ेगी और सड़कें महिलाओं के लिए ज्यादा सुरक्षित होंगी.

जरूरी है आत्मरक्षा के गुर सीखना
सीडब्ल्यूसी की सदस्य रि‍तु मेहरा के मुताबिक, महिलाओं को इस पेशे में लाने के लिए उनकी सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाने जरूरी हैं. उन्हें केवल ड्राइविंग कौशल ही नहीं, साथ ही आत्मरक्षा के गुर भी सिखाने जरूरी हैं और साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के बारे में भी शिक्षित करना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे हर स्थिति से निपट सकें.

 

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