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Periods Story: आइने में खुद को देख घंटों रोती रही...लड़की ने बताया पहले पीरियड्स का अनुभव

हर लड़की या महिला को अपने पहले पीरियड्स याद रहते हैं. कुछ लड़कियों को उनके पैरेन्ट्स से पहले ही इस बारे में जानकारी मिल जाती है तो कुछ को नहीं मिलती. ऐसी ही एक लड़की जिसे पीरियड्स के बारे में अपने घर से जानकारी नहीं मिली थी. उसका पहले पीरियड्स का अनुभव कैसा था? उसके मन में क्या बातें चल रही थीं? उसे किन समस्याओं का सामना करना पड़ा था? इस बारे में लड़की से जानेंगे.

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प्रतीक्षा राणावत (Pratiksha ranawat)
प्रतीक्षा राणावत (Pratiksha ranawat)

Periods or Menstrual Cycle: मासिक धर्म, माहवारी, पीरियड्स या मेंस्ट्रुअल साइकिल जितना ही स्वाभाविक और प्राकृतिक है, उसे हमने उतना ही असहज करने वाला बना दिया है. आज भी आप दुकान में सैनिटरी पैड्स मांगेंगे तो उसे अखबार या काली झिल्ली में ही लपेटकर दिया जाएगा. 

अब भी कई लोग ऐसा मानते हैं कि महिलाएं पीरियड्स के दौरान किचन में नहीं जा सकतीं, बिस्तर पर नहीं सो सकतीं, घर के काम नहीं कर सकतीं, यहां तक कि उनको खाना भी अलग बर्तन में खाना चाहिए.

पीरियड्स के बारे में हर लड़की या महिला को खुलकर बात करनी चाहिए. केवल महिला ही नहीं पुरुषों को भी इस बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि वह अपनी पार्टनर या किसी भी महिला के इस नेचुरल बायोलॉजिक फंक्शन को समझ सकें. पैरेंट्स को भी अपनी बच्चियों को पीरियड्स के बारे में जरूरी जानकारी देनी चाहिए ताकि जब उन्हें पहली बार पीरियड्स आए तो वे घबराए नहीं.

Aajtak.in ने एक लड़की से बात करके उसके पहले पीरियड्स की स्‍टोरी जानी. साथ ही यह भी जाना कि उसे जब पहला पीरियड्स आया तब से लेकर अब तक उसका अनुभव कैसा रहा और उसे किस तरह की समस्याओं का सामना करना होता है. तो आइए जानते हैं...

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मुझे लगा मैं बीमार हो गई हूं

लड़की ने अपने पहले पीरियड्स की स्टोरी शेयर की है, उनका नाम प्रतीक्षा राणावत (Pratiksha ranawat) है जो मध्यप्रदेश के भोपाल की रहने वाली हैं. दिल्ली में जॉब कर रहीं प्रतीक्षा ने बताया, “अगर मैं अपने नजरिए से देखूं तो पीरियड्स को उस समय काफी छुपाकर रखा जाता था और उस बारे में कोई भी जानकारी पहले नहीं दी जाती थी. अगर मैं अपनी बात करूं तो मुझे भी मेरे पहले पीरियड्स के समय कुछ नहीं पता था. फिर जब मुझे पहली बार पीरियड्स आए तो मैं काफी डर गई थी क्योंकि मुझे लगा था कि कहीं मुझे कोई बीमारी तो नहीं हो गई.”

प्रतीक्षा ने आगे बताया, “मैं उस समय 8th क्लास में थी और मेरी उम्र 12-13 साल रही होगी. छुट्टी वाला दिन था और मैं बैठकर टीवी देख रही थी. सुबह से ही मेरे पेट में अजीब सा लग रहा था लेकिन मैंने उस बारे में घर पर किसी को नहीं बताया था. दोपहर के समय मैं जब वॉशरूम गई को मैंने देखा कि मुझे ब्लीडिंग हुई है, जिसे देखकर मैं इतनी डर गई कि मेरी घबरा गई और वॉशरूम में ही रोने लगी. उस समय मेरे जहन में कई सवाल आने लगे कि कहीं मैं बीमार तो नहीं? मेरे शरीर में कोई समस्या तो नहीं? मुझे चोट तो नहीं लगी? फिर कुछ देर बाद जब मैं बाहर आई तो मैंने दीदी को इस बारे में बताया. दीदी ने मम्मी को बताया और फिर मम्मी ने कहा कि इस तारीख को हमेशा याद रखना. हर महीने 3-4 दिन ऐसी ही ब्लीडिंग होगी. इसके बाद उन्होंने पैड-हाइजीन के बारे में बताया, बस.”

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पहले पीरियड्स के बाद भी कोई जानकारी नहीं दी

प्रतीक्षा ने बताया, “पहली बार की तरह हर बार मुझे पीरियड्स होने लगे और वह मेरे लिए नॉर्मल हो गए लेकिन आज तक मुझे घर वालों की तरफ से ऐसी कोई जानकारी नहीं दी गई थी कि पीरियड्स क्या होते हैं और क्यों होते हैं? पीरियड्स में क्या हाइजीन मेंटेन करना होता है, यही बताया गया था. लेकिन समय के साथ स्कूल में सहेलियां और इंटरनेट से सारी जानकारी लगी और आज मैं इस बारे में पूरी तरह से अवेयर हूं. मैं छोटी बहन से भी इस बारे में खुलकर बात करने को कहती हूं.”

शीशे में देखकर घंटों रोती रही

प्रतीक्षा ने बताया, “हर पीरियड्स के समय मुझे काफी पेट और कमर दर्द होता है. हालांकि पहले यह दर्द कम होता था लेकिन अब कई बार असहनीय होता है. उन दिनों मुझे लगता है कि मेरा मूड कभी भी खराब हो सकता है. मूड स्विंग्स, क्रेविंग, लोअर बैक पेन, सुस्ती, काम में मन ना लगना जैसे कई ऐसे लक्षण हैं जो मैं फील कर सकती हूं. एक बार की बात है, मैं स्कूल में थी और मेरे पीरियड्स चल रहे थे. एग्जाम के समय मुझे इतनी नींद आई कि 3 घंटे तक सोती रही और पेपर में एक भी शब्द नहीं लिखा. मूड स्विंग्स का भी अनुभव कई बार हो चुका है. हाल ही की बात करूं तो 31 अक्टूबर 2022 को मेरे जन्मदिन के दिन मेरी डेट्स चल रही थीं. मेरा मूड सही नहीं था. मैं शीशे में देखकर कंघी कर रही थी और काफी देर तक मेरी आंखों से आंसू बहते रहे. मुझे समझ नहीं आया कि वह क्या था.”

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पैरेन्ट्स को पहले से ही जानकारी देनी चाहिए

प्रतीक्षा ने कहा, "मुझे लगता है आज के समय में मोबाइल, सोशल मीडिया पर हर तरह की जानकारी मौजूद है. लेकिन फिर भी पैरेन्ट्स को अपनी बेटी को शुरुआत में ही इस बारे में जानकारी देना चाहिए और समझाना चाहिए. अगर आपकी बेटी की उम्र 11-12 साल हो गई है तो उसे इस बारे में जानकारी दें कि अगर उसे ऐसे महसूस हो तो उसे क्या करना चाहिए. अगर आप उसे शुरुआत में ही जानकारी देंगे तो बेटी आपके साथ कंफर्टेबल रहेगी और अपनी समस्या को बिना हिचकिचाकर आपके साथ शेयर करेगी. अगर वह मेरी जैसी सिचुएशन में हुई और उसे भी अचानक बिना जानकारी के पीरियड्स आए तो वह सदमें में आ सकती है और आपसे इस बात को छुपाकर भी रख सकती है. इसलिए लड़की को जानकारी दें, उसके सवालों का आसान भाषा में जवाब दें और जानकार बनाएं."
 

 

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