कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर के देशों में लॉकडाउन जारी है. वायरस से मुकाबले के बीच सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है. स्कूल-कॉलेज बंद होने के बाद बच्चों के बाहर निकलने पर पाबंदी लग चुकी है. अब उन्हें मजबूरन घरों में कैद रहना पड़ रहा है. एक्सपर्ट मानते हैं कि ऐसी परिस्थिति बनी रही तो बच्चे लंबे समय के लिए डिप्रेशन में चले जाएंगे.
यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ ने ब्रिस्टल के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक शोध किया है. शोधकर्ताओं ने इस रिपोर्ट में दावा किया है कि लॉकडाउन के बाद भी बच्चे और युवा लंबे समय तक डिप्रेशन और एंग्जाइटी के शिकार हो सकते हैं. डिप्रेशन और अकेलेपन का ये असर उनमें तकरीबन 9 सालों तक रह सकता है.
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स्टडी के मुताबिक, ज्यादा समय तक अकेले रहने वाले बच्चे और युवाओं में ये समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है. ब्रिस्टल मेडिकल स्कूल एंड क्लिनिक साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर मारिया लॉड्स ने कहा, 'हमारे विश्लेषण में किशोरों में डिप्रेशन और अकेलेपन का गहरा कनेक्शन होता है. ये बड़ी तेजी से बढ़ते हैं और लंबे वक्त तक टिके रहते हैं'
रिपोर्ट में बताया गया कि लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद या स्कूल खुलने के बाद बच्चों को लोगों से मिलने और दोस्तों के साथ खेलने की अनुमति मिलनी चाहिए. साथ ही उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़ी विशेष जानकारी भी दी जानी चाहिए. स्कूल और घर में भी बच्चों के साथ भावनात्मक तौर पर जुड़ने की कोशिश होनी चाहिए.