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Kashi Vishwanath Corridor: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से बढ़ी कमाई, आमदनी हुई दोगुनी

54 हजार वर्गमीटर में फैले काशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Kashi Vishwanath Corridor) का उद्घाटन पीएम मोदी ने किया था. इस कॉरिडोर के बनने से बाबा विश्वनाथ की कमाई दोगुनी हो गई है. इसका क्या कारण है, इस बारे में आर्टिकल में पढ़ेंगे.

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काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्धाटन पीएम मोदी ने किया था. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्धाटन पीएम मोदी ने किया था.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • काशी में बढ़ा टूरिज्म
  • पर्यटकों के बढ़ने से बड़ा टूरिज्म
  • विश्वनाथ कॉरिडोर से बढ़ी कमाई

कोरोनाकाल के बाद धीरे-धीरे ही सही लेकिन जिंदगी और बाजार दोनों पटरी पर आते दिख रहे हैं. इसी के साथ-साथ धर्म की नगरी काशी का पर्यटन उद्योग भी पहले से काफी बेहतर हो गया है. इसमें मुख्य भूमिका निभाई है ‘विश्वनाथ कॉरिडोर या विश्वनाथ धाम’ ने. ये सच है कि जबसे प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वनाथ काॅरिडोर का उद्घाटन किया है, तब से विश्वनाथ मंदिर में चढ़ावे से होने वाली आमदनी दोगुनी हो चुकी है और आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है.12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख बाबा विश्वनाथ की कमाई में इजाफा हो गया. यह कहना इसलिए गलत नहीं होगा क्योंकि जब से विश्वनाथ मंदिर काॅरिडोर का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया है, तब से न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, बल्कि दान में भी दोगुने की बढ़ोतरी हो गई है. 

काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील वर्मा ने बताया कि 13 दिसंबर से जब से काशी विश्वनाथ का उद्घाटन हुआ है, तब से न केवल श्रद्धालुओं मंदिर में की संख्या बढ़ी है बल्कि सुविधाएं भी बढ़ा दी गई हैं. इससे मिलने वाले दान और चढ़ावे में भी इजाफा हुआ है. उद्घाटन के पहले मिलने वाले दान और बाद में लगभग दोगुना का अंतर पाया गया है. इसके साथ ही मंदिर का खर्चा और जिम्मेदारी भी बढ़ गई हैं. 

पर्यटकों की संख्या बढ़ी

(Image Credit : Pixabay)

श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से न केवल दान बल्कि पूजन की गतिविधियां भी बढ़ी हैं. उन्होंने बताया कि दान के कई ऑनलाइन और ऑफलाइन प्लेटफार्म बनाकर दान लिया जा रहा है. इसके अलावा, श्रद्धालुओं को ऑनलाइन टिकट और पूजा की व्यवस्था भी की गई है. मंदिर में न केवल हुंडी दान बढ़ा है, बल्कि अन्य माध्यमों से भी दान में बढोत्तरी हुई है. अब विकेंड पर भी ज्यादा श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं.  

काॅरिडोर बन जाने के बाद आने वाले श्रद्धालुओं की खुशी का भी ठिकाना नहीं है. मंदिर परिसर का बड़ा रूप और मिलने वाली सुविधाओं के अलावा सीधे गंगधार से बाबा दरबार तक गंगाजल लेकर आना और बाबा विश्वनाथ को अर्पित कर देने से श्रद्धालु काफी खुश हैं. अब न तो पतली-पतली गलियां हैं और न ही गंदगी है. कॉरिडोर का भव्य रूप श्रद्धालुओं को खूब लुभा रहा है और अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.

पर्यटन को मिला बढ़ावा

काशी विश्वनाथ काॅरिडोर की वजह से बनारस के पर्यटन उद्योग में उछाल आया है, जिससे न केवल धार्मिक पर्यटन, बल्कि कॉर्पोरेट टूरिज्म में भी इजाफा हुआ है. टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता बताते हैं कि काॅरिडोर के उद्घाटन के बाद से ही काशी में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है. फरवरी-मार्च तो काफी अच्छा पर्यटन उद्योग रहा है. इसके साथ काॅर्पोरेट टूरिज्म भी काफी तेजी से बढ़ रहा है. 2019-2020 में काशी में वार्षिक रूप से धार्मिक पर्यटकों का आगमन 65-70 लाख था. लेकिन अभी अंतिम के कुछ महीनों को देखें तो सालाना एक से डेढ करोड़ पर्यटक बनारस आ जाएंगे. 

200-250 कमरे वाले होटल की जरूरत

पहले की अपेक्षा अभी पर्यटनों की संख्या डबल हो गई है और काशी में वीकेंड टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है. रोड और कनेक्टिविटी अच्छी हो जाने से लोग अपने वाहनों से भी काशी आ पा रहें हैं. जहां तक होटलों की बात है तो आगामी 7 अप्रैल तक सारे होटल बुक हो चुके हैं और अब 200-250 कमरों वाले बड़े होटल की भी बनारस में जरूरत है. 

तो वहीं एक होटल के जनरल मैनेजर अश्विनी सिंह ने बताया कि जब से कोरोना की रफ्तार कम हुई है. तब से होटल पूरी तरह फुल चल रहें है और अभी तक होटल पूरी तरह से सोल्ड आउट है. पूरे अप्रैल का महीना भी पूरी तरह बुक है. सिर्फ काॅरिडोर ने पूरे वाराणसी शहर को जिंदगी दे दी है. होटल और टूरिज्म दोनों उछाल आया है. पहले वाराणसी में पूरे साल में 70-75 लाख की संख्या में पर्यटक आते थें, लेकिन अभी देखकर लग रहा है कि आने वाले दिनों में डेढ करोड़ तक यह संख्या जाएगी. अभी तीर्थयात्री ज्यादा आ रहें हैं. अब इंटरनेशनल फ्लाइट चालू हो जाने के चलते इंटरनेशनल टूरिस्ट भी आने लगे हैं.

फूल और साड़ी वालों की बिक्री बढ़ी

विश्वनाथ मंदिर के बाहर फूल-माला और गिफ्ट आइटम के दुकानदारों की भी खुशी का ठिकाना नहीं हैं. एक दुकानदार राज की मानें तो उनको सांस लेने तक की फुर्सत नहीं हैं, क्योंकि श्रद्धालु इतने आ जा रहें हैं. वहीं एक साड़ी व्यापारी अश्विनी पांडेय ने बताया कि माता अन्नपूर्णा का प्रसाद समझकर तीर्थयात्री साड़ी जरूर खरीदकर काशी से अपने साथ ले जाते हैं. इसलिए साड़ी की बिक्री और साड़ी कारोबार में भी अच्छा इजाफा हुआ है.

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