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दोस्त हो या रिश्तेदार...जब कोई उधार मांगे तो अपनाएं ये तरीका, नहीं डूबेगा आपका पैसा

किसी करीबी को पैसे उधार देना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन ये कई बार रिश्तों में कड़वाहट पैदा कर सकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि बिना किसी साफ रीपेमेंट प्लान और पारदर्शिता के बहुत ज्यादा पैसे देना भविष्य में मानसिक और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है.

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उधार देने से पहले ये नियम अपनाएंगे तो नहीं होगा नुकसान (Photo: ITG)
उधार देने से पहले ये नियम अपनाएंगे तो नहीं होगा नुकसान (Photo: ITG)

हममें से लगभग सभी ने कभी न कभी अपने करीबियों की आर्थिक मदद की है. चाहें वो परिवार के किसी ऐसे सदस्य को चेक देना हो जिसने कई महीनों से घर का किराया नहीं दिया है या किसी दोस्त को कोई बड़ी रकम उधार देना. हालांकि अपनों को पैसा देना सुनने में जितना आसान लगता है. असल में यह उतना ही मुश्किल फैसला होता है.

परेशानी तब और बढ़ जाती है जब वही व्यक्ति बार-बार अपने मकान मालिक को पैसे देने के बहाने आपसे मदद मांगता रहे. या फिर आपकी मदद लेने के बावजूद वो आपका पैसा वापस करने में कोई दिलचस्पी न दिखाए. ऐसी स्थिति में रिश्ते और पैसे दोनों ही दांव पर लग जाते हैं. इस आर्टकिल में हम जानेंगे कि कैसे आप समझदारी और सही प्लानिंग के साथ अपने पैसे और रिश्तों दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.

क्या कहती है रिसर्च

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 2019 के एक सर्वे से यह बात सामने आई है कि अगर किसी के सामने अचानक कोई ऐसा बड़ा खर्च आ जाए जिसे वो तुरंत नहीं चुका सकते हैं तो मदद पाने का दूसरा सबसे लोकप्रिय जरिया किसी दोस्त या रिश्तेदार से उधार लेना ही था (पहला विकल्प क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना था). महामारी जैसे दौर में लोगों ने आर्थिक मदद के लिए और भी ज्यादा अपने भरोसेमंद करीबियों का रुख किया था. 

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इसमें कोई दोराय नहीं है कि जब किसी रिश्ते के बीच में पैसा आ जाता है तो अक्सर चीजें उलझने लगती हैं. जाहिर है कि हम पैसे उधार उन्हीं को देते हैं जो हमारे बहुत करीब होते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कई बार  रिश्ते के ढांचे को बदल देता है.

उधार लेन-देन से बिखरते हैं रिश्ते?

पैसे का यह लेन-देन एक करीबी और भरोसेमंद रिश्ते में ताकत के संतुलन को बिगाड़ देता है. यानी उधार देने वाले और लेने वाले के बीच एक अजीब सा फासला पैदा हो जाता है. इसकी वजह से दोनों तरफ के लोगों को शर्मिंदगी, हिचकिचाहट और यहां तक कि मन में गुस्सा जैसी कड़वी भावनाओं का सामना करना पड़ सकता है.

ऐसी परिस्थितियों से निपटना बेशक चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन अगर आप शुरुआत में ही खुलकर बातचीत करें और अपनी उम्मीदें साफ कर दें तो आप भविष्य में होने वाली बहुत सी मानसिक परेशानियों और आपसी मनमुटाव से बच सकते हैं. सरल शब्दों में कहें तो पैसे देने से पहले ही लेन-देन की शर्तें तय कर लेना आपके दोस्त की मदद भी करेगा और आपके रिश्ते को भी सुरक्षित रखेगा.

पैसा आज भी है सबसे निजी विषय

अमेरिका के पेन्सिलवेनिया में रहने वाली मनोवैज्ञानिक और वित्तीय थेरेपिस्ट मैगी बेकर कहती हैं, 'मुझे लगता है कि पैसा आज भी बहुत से लोगों के लिए एक बेहद निजी विषय है जिस पर वे खुलकर बात करने से कतराते हैं.' उनका मानना है कि लोग सामान्य तौर पर तो पैसों के बारे में खूब बातें करते हैं लेकिन कभी भी एक-दूसरे से अपनी असल आर्थिक स्थिति के बारे में नहीं पूछते. इस पूरे विषय पर जैसे एक पर्दा पड़ा हुआ है. चाहें बात यह हो कि आपके पास कितना पैसा है या इस बात की कि आपके पास पैसों की कितनी कमी है.

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US की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर फाइनेंशियल सिक्योरिटी के प्रोफेसर और डायरेक्टर जे माइकल कॉलिन्स कहते हैं कि पैसा पहले से ही बातचीत का एक टैबू टॉपिक है. यह टैबू रिश्तों को कॉम्प्लिकेटेड और धुंधला बना देता है.

'अगर मैं किसी बैंक में जाकर लोन लेता हूं तो वो पहले यह पता लगाएंगे कि मैं इसे चुका पाऊंगा या नहीं. फिर मैं एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करता हूं और उस कॉन्ट्रैक्ट में लिखा होता है कि अगर मैं पेमेंट नहीं कर पाया तो क्या कुछ होगा. जैसे कि वो मेरी सैलरी जब्त कर लेंगे या मेरी कार वापस ले लेंगे.'

एक रोक-टोक जो रिश्तों को बदल देती है

कॉलिन्स का कहना है कि जब हम बैंक के बजाय किसी रिश्तेदार या दोस्त को पैसा उधार देते हैं तो वहां कोई कड़ा नियम या कागजी कार्रवाई नहीं होती. यह इस समझौते का ढीला ढाला स्वरूप ही है जो बाद में लोगों के लिए मुसीबत बनता है. सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब पैसे वापस मांगने (फॉलो-अप) का कोई स्पष्ट तरीका नहीं होता और सामने वाले की जवाबदेही (अकाउंटेबिलिटी) भी तय नहीं होती. यही अनिश्चितता लोगों को मानसिक रूप से परेशान करती है.

मैगी बेकर का कहना है कि किसी को पैसा उधार देने से रिश्ते का पूरा माहौल बदल जाता है. जैसे ही आप किसी की मदद करते हैं, वह व्यक्ति आपका एहसानमंद हो जाता है. चाहें वो इस बात को स्वीकार करे या न करे और इससे रिश्ते में आपकी भूमिका धीरे-धीरे बदल जाती है.

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रिश्तेदार बन जाता है 'लोन ऑफिसर'!

US के नेब्रास्का में क्रेयटन यूनिवर्सिटी में फाइनेंशियल साइकोलॉजिस्ट और एसोसिएट प्रोफेसर ब्रैड क्लॉन्ट्ज कहते हैं, 'आप सिर्फ दोस्त या परिवार के सदस्य नहीं रह जाते. अचानक आप एक लोन ऑफिसर बन जाते हैं.'

उधार देने वाले के मन में हमेशा एक अनिश्चितता और डर बना रहता है. आप किसी के कितने भी करीब क्यों न हों. लेकिन यह जरूरी नहीं कि आपको उनकी पैसों के लेन-देन वाली आदतों के बारे में पता हो.

10 में 9 लोग नहीं लौटाते पैसा

विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि निजी तौर पर दिए गए ज्यादातर कर्ज कभी वापस नहीं आते. बेकर के अनुसार, 10 में से 9 मामलों में ऐसा होता है कि मुश्किल में फंसा दोस्त या रिश्तेदार आपका पैसा कभी नहीं लौटा पाता.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट क्लॉन्ट्ज भी इस बात से सहमत हैं. उनका कहना है कि किसी को उधार देते समय आपको मन में यह पक्का कर लेना चाहिए कि अगर वो पैसे वापस न भी मिलें तो आपको कोई फर्क नहीं पड़ेगा. आपको यह संभावना मन में रखकर कि हो सकता है पैसे वापस ना मिले, उसके हिसाब से ही पैसे देने चाहिए. 

अक्सर उधार मांगने वाला व्यक्ति आपके पैसे लौटाने के बजाय अपने बाकी बिलों और खर्चों को पहले निपटाता है. जब तक आप उनसे पैसों के लिए कुछ कहेंगे नहीं, वो यही मानकर चलेंगे कि आप आर्थिक रूप से इतने संपन्न हैं कि आपको उन पैसों की कोई खास चिंता या जरूरत नहीं है.

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क्लोंट्ज का कहना है कि जब कोई पैसा वापस नहीं कर पाता तो अक्सर वो आपसे दूरी बनाने लगता है और आपका सामना करने से बचता है. ऐसे में आपको गुस्सा आने लगता है क्योंकि आपको महसूस होता है कि आपका फायदा उठाया जा रहा है.

वो आगे कहते हैं कि यह बहुत ही नाजुक मोड़ होता है. अगर आप उन्हें पैसा उधार देते हैं तो पैसे की वजह से रिश्ता खराब होने का डर रहता है. अगर आप मना कर देते हैं तो वो इस बात से नाराज हो सकते हैं कि जरूरत के समय आपने उनका साथ नहीं दिया. दोनों ही सूरतों में रिश्ता दांव पर लगा होता है.

लेनदेन में प्लानिंग की अहमियत

बेशक डिनर या ड्रिंक्स का बिल यूं ही उठा लेना, किसी को फॉर्मल तौर पर एक तय रकम उधार देने से अलग है. लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोस्तों को पैसे उधार देना तब प्रॉब्लम बन जाता है जब यह एक पैटर्न बन जाए. ऐसे में इस सब झंझट से बचने के लिए यहां बताए कुछ टिप्स आपके लिए काफी मददगार हो सकते हैं.

दोस्तों के साथ स्पष्टता

छोटा-मोटा खर्च अलग बात है लेकिन जब दोस्त आपसे हमेशा ही डिनर और बाकी चीजों के बिल भरने की उम्मीद करने लगें तो शुरू में ही साफ कर दें कि मैं आपके साथ चलूंगा पर इस बार बिल आपको देना होगा. 

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जल्दबाजी में फैसला न लें

बेकर की सलाह है कि बड़ा लोन देने से पहले सोचने के लिए समय लें. अपने पार्टनर या परिवार से सलाह जरूर करें क्योंकि यह फैसला सिर्फ आपका नहीं. आपके पूरे घर के बजट का है.

डेडलाइन और किश्तें तय करें

भले ही लिखित कागजात न हों पर दोनों लोगों को एक कागज पर तारीख और रकम साफ करके रख लेना चाहिए. कॉलिन्स कहते हैं कि उन्हें विकल्प दें कि जैसे भला तारीख को पूरी रकम दे देना या दो किश्तों में चुका देना. स्पष्ट बात करने से कंफ्यूजन नहीं रहता है.

कॉन्ट्रैक्ट और बैंक का विकल्प

बेकर कहते हैं कि वैसे तो बहुत बड़ी रकम उधार दे रहे हैं तो सुरक्षा के लिए लिखित कॉन्ट्रैक्ट होना चाहिए और मामूली ब्याज भी. अगर आप इन सब झंझटों से बचना चाहते हैं तो उन्हें बैंक से लोन लेने की सलाह देना ही सबसे बेहतर विकल्प है. 

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