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World First Aid Day 2021: जख्म पर थूकना-जले पर बर्फ, इलाज के ये 7 तरीके हैं बिल्कुल गलत

World First Aid Day 2021: फर्स्ट एड बॉक्स की अहमियत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 14 सितंबर को फर्स्ट एड बॉक्स डे भी मनाया जाता है. हालांकि इस छोटी सी मेडिकल किट के बेसिक रूल्स पता होने के बावजूद कुछ लोग दुर्घटनाओं में ऐसी अफवाहों का सहारा लेते जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है फर्स्ट एड डे
  • हर किसी को पता होने चाहिए मेडिकल किट के ये बेसिक रूल्स

छोटी-मोटी चोट, खरोंच या जख्म से निपटने के लिए लोग घर में एक 'फर्स्ट एड बॉक्स जरूर' रखतें हैं. इसमें डेटॉल, कॉटन, सीज़र, पट्टी, बैंडेज, एंटीसेप्टिक क्रीम और कुछ जरूरी दवाइयां होती है. फर्स्ट एड बॉक्स की अहमियत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 14 सितंबर को फर्स्ट एड डे भी मनाया जाता है. हालांकि इस छोटी सी मेडिकल किट के बेसिक रूल्स पता होने के बावजूद कुछ लोग दुर्घटनाओं में ऐसी अफवाहों का सहारा लेते जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

नाक से खून बहना- अक्सर शरीर में ज्यादा गर्मी या एलेर्जी की वजह से कुछ लोगों की नाक से खून बहने लगता है. ऐसे में लोग सिर के बल सीधा लेटने की सलाह देते हैं. दरअसल इससे नाक से बहने वाला खून रुकेगा नहीं, बल्कि गले में चला जाएगा. इसे निगलने से आपको उल्टियां हो सकती हैं. बेहतर होगा कि आप आगे की तरफ थोड़ा सा झुकें और नाक के ऊपरी हिस्से पर हल्के से चुटकी लें. कई मामलों में नाक से बहने वाला खून 10 मिनट बाद खुद-ब-खुद रुक जाता है.

जले हुए पर बर्फ रखना- अक्सर आपने देखा होगा कि जलन से राहत पाने के लिए लोग इफेक्टेड एरिया पर बर्फ रगड़ना शुरू कर देते हैं. ऐसा करना बिल्कुल गलता है. इससे स्किन डैमेज हो सकती है. जले हुए पर मक्खन या टूथपेस्ट लगाने से भी बचना चाहिए. आप जले हुए पर थोड़ी देर के लिए ठंडा पानी डाल सकते हैं. इसके बाद उसे किसी साफ और सूखे कपड़े से जरूर साफ करें.

घायल पड़े व्यक्ति को चलाना- आपने देखा होगा अक्सर लोग दुर्घटना के बाद चोटिल व्यक्ति को थोड़ा चलने के लिए कहते हैं. कई बार घायल इंसान खुद चलकर देखता है कि वो सही है या नहीं. ऐसा करना भी गलता है. ऐसा करने से घातक स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हो सकती है. बेहतर होगा कि आप उस इंसान को तुरंत अस्पताल लेकर जाएं.

मोच या फ्रेक्चर पर सिकाई- मोच या फ्रेक्चर में दर्द से राहत पाने के लिए कुछ लोग गर्म कपड़े से सिकाई करना शुरू कर देते हैं. मोच या फ्रेक्चर में राहत पाने का ये तरीका बिल्कुल गलत है. इन पर सिकाई करने से सूजन की समस्या और ज्याद बढ़ेगी. बेहतर होगा कि आप डॉक्टर की सलाह पर करीब 20 मिनट तक आइस पैक लगाएं.

जख्म पर थूकना- आपने लोगों को ये कहते सुना होगा कि लार में मौजूद तत्व जख्म के किटाणुओं को मारने का काम करते हैं. जबकि इसमें कोई सच्चाई नहीं है. इंसान की लार में पहले से ही इतने बैक्टीरिया होते हैं कि वो जख्म को और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं. ऐसे में कोई भी इलाज डॉक्टर की सलाह पर ही लें.

जख्म पर बैंडेज छोड़ देना- कुछ लोग चोट पर एंटीबैक्टीरियल लेप लगाने के बाद उस पर बैंडेज लगा लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, इससे जख्म भरने में ज्यादा समय लगेगा. बेहतर होगा कि आप जख्म को अच्छे से साफ करने के बाद उस पर एंटीबैक्टीरियल लेप लगाएं और जरूरत पड़ने पर ही बैंडेज का इस्तेमाल करें. ताजा हवा में जख्म जल्दी ठीक होते हैं.

आंखों को मलना- कई बार आंखों में कचरा जाने पर लोग तुरंत उसे मलना शुरू कर देते हैं. शायद आपको अंदाजा नहीं कि ऐसा करने से आपकी आंखें हमेशा के लिए खराब हो सकती हैं. ऐसा होने पर अपनी आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह धोएं.

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