Makar Sankranti Black Clothes Tradition: हिंदू धर्म में रंगों का भी खास महत्व है और हर दिन का एक अलग खास रंग भी होता है. खासतौर पर हिंदू धर्म में काला रंग की जगहों पर अशुभ माना जाता है और शादी, ब्याह जैसे शुभ काम में काले कपड़े पहनना वर्जित होता है. काले रंग को अशुभ माना जाता है, इसलिए किसी भी धार्मिक काम में कोई इस रंग के कपड़े नहीं पहनता है.
लेकिन आपको यह बात जानकर बहुत हैरानी होगी कि साल के पहले त्योहार मकर संक्रांति के दिन खासतौर पर काले कपड़े पहनना बेहद शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर मकर संक्रांति के दिन काले रंग के वस्त्र पहनना क्यों शुभ होता है.
भले ही पूजा-पाठ में काल रंग के कपड़े नहीं पहनने जाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन काले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि काला रंग सूर्य पुत्र शनि को समर्पित है. इस दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में स्वयं प्रवेश करते हैं.
मकर शनिदेव की राशि है और काला रंग उनका प्रिय रंग माना जाता है. इसलिए मकर संक्रांति के दिन काले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन काले रंग के वस्त्र पहनने से शनिदेव खुश होते हैं और इस दिन शनि दोष से बचने के लिए काला रंग पहना जाता है.
धार्मिक कारण के अलावा इस दिन पर काले रंग के कपड़े पहनने के पीछे अन्य कारण भी हैं.
एक्ट्रेस भाग्यश्री ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया है, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'संक्रांति एकमात्र हिंदू त्योहार है जहां प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों कारणों से काला रंग पहना जाता है. संक्रांति सर्दियों में आती है और काला रंग गर्मी को सोखता है और बनाए रखता है, जिससे ठंडी सुबह में गर्मी मिलती है. काला रंग शक्ति और लचीलेपन का भी प्रतीक है, यह ऐतिहासिक लड़ाइयों में मराठा योद्धाओं के बलिदानों का सम्मान करने के लिए एक ऐतिहासिक श्रद्धांजलि भी है.'
मकर संक्रांति के दिन काले रंग के कपड़े ही नहीं बल्कि काली उड़द दाल की खिचड़ी भी खासतौर पर बनाई जाती है. मकर संक्रांति पर काले कपड़ों के साथ काली उड़द दाल की खिचड़ी का भी गहरा धार्मिक महत्व है. शनि देव के प्रतीक काली उड़द और सूर्य के प्रतीक चावल का यह मेल ग्रहों की शांति का अचूक उपाय माना जाता है. इस दिन खिचड़ी का दान और सेवन न केवल अक्षय पुण्य देता है, बल्कि जीवन के सभी दुखों को भी हर लेता है, इसीलिए इस पर्व को कई प्रदेशों में 'खिचड़ी पर्व' के नाम से भी जाना जाता है.