इंडियन आइडल सीजन 3 के विनर और मशहूर सिंगर-एक्टर प्रशांत तमांग अब इस दुनिया में नहीं रहे. 11 जनवरी को 43 साल की उम्र में उनका अचानक निधन हो गया. इस खबर ने न सिर्फ उनके फैंस बल्कि पूरी म्यूजिक इंडस्ट्री सदमे में है. प्रशांत के निधन के बाद से ही सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें होने लगीं. कोई इसे रहस्यमयी बता रहा था तो कोई अलग-अलग कयास लगा रहा था. ऐसे में प्रशांत की पत्नी मार्था एली ने साफ कहा कि सिंगर की मौत पूरी तरह नेचुरल थी. उन्होंने बताया कि प्रशांत ने नींद में ही दम तोड़ दिया. इसमें किसी तरह की साजिश या रहस्य जैसी कोई बात नहीं है.
नींद में दम तोड़ने की बात कोई नई नहीं है और ना ही प्रशांत तमांग का मामला कोई अकेला है. दुनियाभर में ऐसे कई केस सामने आते हैं, जहां लोग सोते-सोते ही इस दुनिया को अलविदा कह देते हैं. यही वजह है कि ऐसे मामलों के बाद लोगों के मन में एक ही सवाल उठता है कि आखिर कोई इंसान रात में सोते-सोते कैसे मर सकता है? इसका कारण क्या होता है?
क्यों नींद में मौत लोगों को चौंकाती है?
दुनियाभर में ऐसे ना जानें कितने लोग हैं, जो रात में आराम से सोने जाते हैं और फिर सुबह उठते ही नहीं. किसी का भी नींद में इस दुनिया से चले जाना लोगों को इसलिए ज्यादा हैरान करता है, क्योंकि नींद को सभी आराम और सुकून से जोड़कर देखते हैं. खासकर जब कोई युवा और हेल्दी दिखने वाला इंसान इस तरह दुनिया छोड़ देता है, तो सवाल उठना लाजमी है. लेकिन सच ये है कि बहुत से लोग नींद में ही इस दुनिया से चले जाते हैं.
क्या नींद में मौत होना आम बात है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो आप अपनी जिंदगी का करीब एक-तिहाई हिस्सा सोते हुए बिताते हैं, इसलिए इस दौरान मौत होना कोई बहुत अनोखी बात नहीं है. बुजुर्गों या बीमार लोगों के मामले में इस पर ज्यादा सवाल नहीं उठते, लेकिन जब कोई 40–45 साल का इंसान अचानक चला जाता है, तो लोगों को यकीन करना मुश्किल हो जाता है. कई बार मेडिकल जांच में भी मौत की कोई साफ वजह सामने नहीं आ पाती है.
सोते वक्त दिल पर क्यों बढ़ता है खतरा?
डॉक्टर्स और रिसर्च के मुताबिक, नींद के दौरान खासकर REM स्लीप (नींद की वो स्टेज जिसमें दिमाग एक्टिव रहता है और सपने आते हैं. इस दौरान आंखें तेजी से हिलती हैं, लेकिन शरीर की मसल्स रिलैक्स रहती हैं.) में दिल पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है. इस दौरान हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर में बदलाव आते हैं. कई बार दिल की धड़कन अचानक गड़बड़ा जाती है, जिससे इंसान को संभलने का मौका ही नहीं मिलता और उसकी अचानक मौत हो जाती है, जिसका पता उसे खुद भी नहीं लग पाता है.
क्यों खतरनाक माना जाता है सुबह 3 से 4 बजे का वक्त?
कुछ स्टडीज के मुताबिक, सुबह 3 से 4 बजे का समय शरीर के लिए सबसे नाजुक माना जाता है. इस वक्त शरीर के कई जरूरी हार्मोन सबसे कम लेवल पर होते हैं और दिल या सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई बार लोग इस समय नींद में ही दुनिया छोड़ देते हैं.
कई मामलों में पोस्टमॉर्टम के बाद भी मौत की पक्की वजह सामने नहीं आती. तब डेथ सर्टिफिकेट में 'नेचुरल डेथ' या 'कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेलियर' जैसे शब्द लिखे जाते हैं.
दिल से जुड़ी समस्याएं सबसे बड़ी वजह
डॉक्टर्स की मानें तो नींद में मौत की सबसे आम वजह अचानक दिल का काम करना बंद कर देना, यानी कार्डियक अरेस्ट माना जाता है. सोते-सोते इंसान का दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और तुरंत मेडिकल मदद ना मिलने पर कुछ ही मिनटों में जान जा सकती है. रात के समय ऐसा होने पर खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि सोते हुए व्यक्ति और उसके आसपास के लोगों को इसका जरा भी अंदाजा नहीं हो पाता है और कोई मदद के लिए मौजूद नहीं होता.
हार्ट अटैक, दिल की धड़कन का इर्रेगुलर होना, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी समस्याएं कार्डियक अरेस्ट को जन्म दे सकती हैं. कई बार दिल की धड़कन इतनी तेज या इतनी धीमी हो जाती है कि शरीर तक सही मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती.
हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नस में कुछ रुकावट आ जाती है. सीने में दर्द, पसीना आना, सांस फूलना, उलझन या जी मिचलाना इसके लक्षणों में शामिल होते हैं. लेकिन नींद के वक्त व्यक्ति इन संकेतों को समय पर समझ नहीं पाता, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है. कुछ मामलों में हार्ट अटैक इतना तेज होता है कि सांस लेने वाला सिस्टम ही काम करना बंद कर देता है और तुरंत मौत हो जाती है.
हार्ट के अलावा क्या होती हैं नींद में मौत की वजह?
1. दिल की धड़कन में गड़बड़ी: कई बार दिल की इलेक्ट्रिक सिस्टम गड़बड़ा जाता है, जिससे धड़कन ज्यादा-कम होती रहती है. इसे एरिदमिया कहा जाता है. कुछ खास तरह की एरिदमिया नींद में अचानक मौत की वजह बन सकती हैं. कुछ लोगों में यह समस्या जन्म से या जेनेटिक भी होती है, जिसका पता बहुत देर से चलता है.
2. हार्ट फेलियर: हार्ट फेलियर में दिल शरीर में खून सही तरह से पंप नहीं कर पाता है. समय के साथ फेफड़ों में पानी भरने लगता है, पैरों और शरीर में सूजन आ जाती है और सांस लेने में दिक्कत बढ़ती जाती है. जब हालत ज्यादा बिगड़ जाती है, तो नींद के दौरान सांस रुक सकती है और मौत हो सकती है.
3. स्ट्रोक: अगर स्ट्रोक दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित कर दे जो सांस और आपके होश में रहने को कंट्रोल करता है, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी वाले लोगों में ये खतरा ज्यादा रहता है. कई बार स्ट्रोक नींद में आता है और सुबह तक पता ही नहीं चलता.
4. सांस से जुड़ी बीमारियां: जब फेफड़े सही से काम नहीं करते, तो शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ जाती है. ये कंडीशन जानलेवा हो सकती है. अस्थमा, सीओपीडी, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां या मसल्स से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें नींद में सांस रुकने का कारण बन सकती हैं.
5. टाइप 1 डायबिटीज में ‘डेड इन बेड सिंड्रोम’: देखने को मिला है कि कुछ युवाओं की मौत टाइप 1 डायबिटीज के कारण नींद में हुई है, जिसे डेड इन बेड सिंड्रोम कहा जाता है. माना जाता है कि रात में अचानक ब्लड शुगर बहुत ज्यादा गिर जाने से दौरा पड़ सकता है या मौत हो सकती है. सोते समय शुगर लेवल पर गौर करना मुश्किल होता है, इसलिए खतरा बढ़ जाता है.
6. कार्बन मोनोऑक्साइड: घर में गैस लीक होना या खराब वेंटिलेशन के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड जमा हो जाए, तो ये बिना शरीर में चला जाता है. खास बात ये है कि इससे किसी तरह की बदबू नहीं आती है इसलिए इसका पता भी नहीं लग पाता है. सोते हुए इंसान को इसका एहसास भी नहीं होता और कुछ ही मिनटों में दम घुट सकता है.
7. दवाओं और नशे का ओवरडोज: कुछ दवाएं और नशे की चीजें दिमाग के उस हिस्से को दबा देती हैं जो सांस को कंट्रोल करता है. ज्यादा मात्रा में दवा लेना या शराब के साथ दवाएं लेना बेहद खतरनाक हो सकता है. कई बार इंसान नींद में ही सांस लेना बंद कर देता है.
8. सिर की चोट: कभी-कभी सिर पर लगी चोट भी नींद में मौत का कारण बन सकती है. दरअसल, सिर पर लगी चोट के लक्षण तुरंत नजर नहीं आते. लेकिन नींद में हालत बिगड़ सकती है और जान चली जाती है. इसी वजह से सिर की चोट के बाद डॉक्टर निगरानी की सलाह देते हैं.
9. दम घुटना: अगर कोई व्यक्ति शराब के नशे में उल्टी कर दे, दौरे पड़ें या मुंह में कुछ रखकर सो जाए, तो दम घुटने का खतरा रहता है. स्लीप एपनिया जैसी समस्याओं में ये जोखिम और बढ़ जाता है.
10. स्लीप एपनिया: स्लीप एपनिया एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें सोते समय सांस बार-बार रुकती है. ये समस्या हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल की धड़कन की गड़बड़ी को बढ़ा सकती है. सही इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है.
11. मिर्गी: मिर्गी के मरीजों में अचानक मौत का खतरा नॉर्मल लोगों से कहीं ज्यादा होता है. इसे SUDEP कहा जाता है. कई बार ये मौत रात में होती है और इसके पीछे दिल या सांस से जुड़ी गड़बड़ी मानी जाती है.