
बनियान/इनरवियर सिर्फ 'एक लेयरिंग क्लोथ' नहीं है. इसका काम कंफर्ट देना और हाइजीन को मैनेज करना है. रोजमर्रा की लाइफ में यह पसीना सोखने से लेकर स्किन को हार्ड कपड़ों से बचाने तक कई रोल निभाती है. बनियान शरीर और बाहरी शर्ट के बीच एक अब्जॉर्बिंग लेयर की तरह काम करती है जो पसीना सोखकर ऊपर के कपड़े पर दाग और पसीने के पैच कम कर सकती है. लेकिन आपने देखा होगा अक्सर पुरुषों के कलेक्शन में कुछ ऐसी बनियानें जरूर होती हैं जो सालों पुरानी होती हैं.
वो अक्सर उन्हें इसलिए नहीं फेंकते क्योंकि उन्हें लगता है कि वो फटी भी नहीं है, ना ही गंदी दिख रही है तो उसे अभी और इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बनियान फटने का इंतजार करना आपकी सेहत और हाइजीन के लिए भारी पड़ सकता है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंडरगारमेंट्स सीधे आपकी स्किन के संपर्क में रहते हैं और पसीने को सोखने का काम करते हैं. लंबे समय तक उन्हें पहनते रहने से स्किन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. तो आइए हम आपको बताते हैं कि किस समय पुरानी बनियान फेंक देनी चाहिए.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बनियान का मुख्य काम शरीर के पसीने को सोखना और पसीने को बाहरी कपड़ों तक पहुंचने से बचाना है. जब कोई लंबे समय तक एक ही बनियान पहनता है तो उसके सूती रेशे कमजोर पड़ने लगते हैं. ऐसे में बार-बार धोने और पसीने के संपर्क में आने से उस कपड़े की बैक्टीरिया सोखने की क्षमता खत्म हो जाती है.
भले ही बनियान ऊपर से सही दिख रही हो लेकिन उसे बारीक धागों में डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया घर बना लेते हैं जो साधारण धुलाई से नहीं जाते. इसलिए समय रहते बनियान बदल लेना चाहिए.
हेल्थलाइन के मुताबिक इनरवियर को लगभग हर साल बदलने पर विचार किया जा सकता है. खासकर अगर बार-बार इंफेक्शन/इरिटेशन जैसी समस्या रहती हो.
क्लीवलैंड क्लिनिक भी इस बात पर जोर देता है कि रोजाना फ्रेश इनरवियर पहनना अच्छी हाइजीन का हिस्सा है और इससे बदबू, बैक्टीरिया ग्रोथ जैसी दिक्कतें कम होती हैं.
Onmanorama के मुताबिक, रोजाना इस्तेमाल वाली बनियान/इनरवियर को 6-12 महीने में बदल लेना चाहिए. हफ्ते में 1-2 बार पहनने पर यह 12-24 महीने तक चल सकती है, लेकिन इस्तेमाल, वॉशिंग और क्वालिटी पर निर्भर करती है.
हेल्थलाइन के मुताबिक, इनरवियर को फटने या फिर उनमें छेद होने का इंतजार करना सही नहीं होता. दरअसल, पुराने इनरवियर का कपड़ा समय के साथ पतला होता जाता है और उनमें खिंचाव भी कम होने लगता है. इस कारण उनकी फिटिंग बिगड़ जाती है और शरीर में घर्षण से रैशेज की समस्या हो सकती है. वहीं इनरवियर्स पसीना, तेल और नमी सोखते हैं. नमी जितनी देर फंसी रहेगी, उतना ही बैक्टीरिया/यीस्ट को बढ़ने का मौका मिलता है.
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, 100 प्रतिशत कॉटन से बनी बनियान सबसे बेहतर मानी जाती है क्योंकि यह ब्रीदेबल होती है और नमी को सोखकर हवा पास करती है. इसलिए हमेशा नेचुरल फैब्रिक ही बेहतर होता है. हाइजीन और सेफ्टी के लिए रोजाना इनरवियर्स बदलें और नॉर्मल तापमान वाले पानी से माइल्ड डिटर्जेंट में धोएं.