
Weight loss injection GLP-1-drugs: दुनिया भर में मोटापा महामारी बन चुका है और तेजी से वजन घटाने के लिए वेट लॉस दवाओं जैसे ओजेम्पिक, वेगोवी, मौनजारो और दूसरे GLP-1 ड्रग्स की डिमांड लगातार बढ़ रही है. ये इंजेक्शन हफ्ते में एक बार लगाए जाते हैं और भूख कम करके, ब्लड शुगर कंट्रोल करके 10 से 15 प्रतिशत तक बॉडी वेट घटा देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं, इन दवाओं से आपको वजन कम करने में मदद मिल सकती है लेकिन अगर आपने सावधानी नहीं बरती तो आगे चलकर ये आपके लिए काफी परेशानी का कारण बन सकते हैं.
दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया (UVA) के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ये दवाएं वजन घटा रही हैं लेकिन उसके साथ-साथ मसल्स लॉस भी हो रहा है.
यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया के रिसर्चर्स ने पाया कि GLP-1 ड्रग्स से जितना वजन कम होता है, उसका लगभग 25–40 प्रतिशत हिस्सा फैट-फ्री मास (FFM) यानी मसल्स, हड्डी और लीन टिश्यूज का होता है. वहीं यदि इंसान की सामान्य तरह से उम्र बढ़ती है तो लगभग 10 साल में सिर्फ 8 प्रतिशत मसल्स ही कम होते हैं.
फैट-फ्री मास का बड़ा हिस्सा मसल मास होता है और रिसर्चर्स मानते हैं कि इतनी तेज मसल लॉस होना आगे चलकर मेटाबॉलिक हेल्थ, कमजोरी और उम्र पर असर डाल सकता है.
रिसर्च टीम के हेड एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. झेनकी लियू (Zhenqi Liu) ने कहा, 'कुछ मरीजों ने बताया है कि उन्हें दवा लेने के दौरान लग रहा है कि उनके मसल्स कम हो रहे हैं. ये गंभीर समस्या है क्योंकि रीढ़ और पोश्चर संभालने वाले मसल्स (Axial muscle) खड़े रहने, चलने-फिरने और शरीर को बिना सपोर्ट के खड़े रखने के लिए जरूरी हैं.'
जीएलपी-1 दवाओं के इस्तेमाल से मसल्स लॉस होने को लेकर जब Aajtak.in ने दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन एंड डायबिटोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संचयन रॉय से बात की तो उन्होंने बताया, 'ओजेम्पिक, मौनजारो जैसी GLP-1 दवाओं से वजन कम तो होता है लेकिन सिर्फ फैट ही नहीं, बल्कि कुछ मात्रा में मसल्स भी कम हो सकते हैं.'
'अगर दवा के साथ सही प्रोटीन डाइट, नियमित एक्सरसाइज और खासकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न की जाए तो मसल्स लॉस का खतरा बढ़ सकता है इसलिए वजन घटाने के लिए ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करते समय बैलेंस डाइट, पर्याप्त प्रोटीन और मसल्स मजबूत करने वाली एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें ताकि फैट कम हो और मसल्स सुरक्षित रहें.'

मुंबई में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना जुनेजा (Dr. Archana Juneja) ने Aajtak.in को बताया, 'GLP-1 के उपयोग के क्लिनिकल डेटा से पता चलता है कि ये दवाएं जो वजन कम करती हैं, उनमें मसल्स का वजन भी शामिल होता है. मसल्स का अनुपात उम्र, शुरुआती मसल्स के वजन, प्रोटीन सेवन और फिजिकल एक्टिविटी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है.'
'दरअसल, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और पर्याप्त प्रोटीन के बिना कैलोरी कम करने पर शरीर मसल्स के टिश्यूज को तोड़कर बर्न करता है. लेकिन ये टिश्यूज मेटाबॉलिक रूप से एक्टिव होते हैं और लंबे समय तक स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं इसलिए मसल्स लॉस होना सेहत पर गलत असर डालता है.'
'सिर्फ साबुत खाने से प्रोटीन की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं है. जीएलपी-1 लेने वाले कई मरीजों को जल्दी पेट भरने, मतली या खाने से नफरत जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अधिक फाइबर और अधिक प्रोटीन वाला खाना मतली कम करने में मदद करता है.'
'ऐसे मामलों में जहां प्रोटीन की जरूरत 100 ग्राम प्रतिदिन से अधिक होती है, वहां मसल्स को सुरक्षित रखने के लिए अच्छी क्वालिटी के प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने पर विचार किया जा सकता है. सप्लीमेंट्स को बैलेंस डाइट के साथ में एड करना चाहिए ना कि बैलेंस डाइट को पूरी तरह सप्लीमेंट से रिप्लेस करना चाहिए.'
डॉ. रॉय ने कहा, 'GLP-1 दवाओं के साथ मसल्स को कमजोर होने से बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट लिफ्टिंग) या बॉडी वेट एक्सरसाइज. कार्डियो एक्टिविटी जैसे वॉकिंग, साइक्लिंग या दौड़ना दिल की सेहत और फैट घटाने के लिए फायदेमंद है लेकिन इससे मसल्स सुरक्षित नहीं रहते.'
'मसल्स को बनाए रखने और मजबूत करने का काम रेजिस्टेंस ट्रेनिंग ही करती है इसलिए इन दवाओं के साथ हफ्ते में कम से कम 2–3 दिन स्ट्रेंथ या वेट ट्रेनिंग और बाकी दिनों में हल्का-फुल्का कार्डियो जरूर किया जाए, ताकि वजन कम हो लेकिन मसल्स कमजोर न पड़ें.'

डॉ. जुनेजा ने आगे बताया, 'मसल्स लॉस होने से बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कम हो जाता है. BMR वह कैलोरी बर्निंग स्पीड है जो शरीर आराम की स्थिति में भी कैलोरी बर्न करता रहता है. अगर GLP-1 दवा बंद कर दी जाए लेकिन मसल दोबारा न बनाए जाएं या डाइट-एक्सरसाइज जैसे लाइफस्टाइल फैक्टर्स न सुधारे जाएं, तो शरीर आराम के समय कम कैलोरी बर्न करेगा जिससे तेजी से वजन बढ़ने लगता है.'
'समस्या यह है कि रिबाउंड वजन अक्सर पहले से अधिक फैट के रूप में जमा होता है, न कि मसल के रूप में. इससे बॉडी कंपोजिशन बिगड़ जाता है और अगली बार वजन घटाना और भी मुश्किल हो जाता है. यही 'यो-यो इफेक्ट' कहलाता है.
रिसर्चर्स ने निष्कर्ष निकाला कि GLP-1 दवाएं वजन और चर्बी को तो कम कर देती हैं लेकिन इसके साथ मसल मास भी कम हो जाता है. दूसरी ओर इन दवाओं से कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस (CRF) में कोई सुधार नहीं दिखता. डॉ. लियू का कहना है, 'यह काफी बढ़ा एक्टिव रिसर्च एरिया है और हमें उम्मीद है कि जल्द ही बेहतर हल निकलेंगे, लेकिन अभी के लिए GLP-1 दवाएं लेने वाले मरीजों को अपने डॉक्टर से मसल्स लॉस होने से बचने के तरीकों पर बात करनी चाहिए.'
रिसर्चर्स का मानना है कि मरीजों की मेटाबॉलिक हेल्थ, अच्छी सेहत और कुल मिलाकर लंबी उम्र पर भी मसल्स लॉस का बुरा असर पड़ सकता है इसलिए इस पर और अधिक रिसर्च की जरूरत है ताकि मरीजों को अच्छे रिजल्ट मिल सकें. हालांकि, अच्छी खबर ये भी है कि ऐसी दवाओं पर भी काम चल रहा है जो मसल लॉस को रोकने में मदद कर सकती हैं.
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की सलाह है कि इन दवाओं से पहले कुपोषण और कम मसल मास के जोखिम की भी जांच की जानी चाहिए. साथ ही पूरे ट्रीटमेंट के दौरान पर्याप्त प्रोटीन वाली डाइट और रेगुलर एक्सरसाइज को बढ़ावा देना चाहिए.