फिट रहने के लिए वॉक करना सबसे आसान और असरदार तरीकों में से एक है. इससे हार्ट हेल्थ बेहतर होती है, वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है, मसल्स मजबूत होती हैं और ओवरऑल हेल्थ बेहतर रहती है. इसे आप कहीं भी और कभी भी आसानी से कर सकते हैं. इन दिनों सोशल मीडिया पर पीछे की ओर चलने यानी रेट्रो वॉकिंग को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि पीछे की ओर चलने के 100 कदम, आगे चलने के 1,000 कदम के बराबर होते हैं. इसी वजह से लोग इसे फिटनेस का शॉर्टकट समझने लगे हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है या सिर्फ एक वायरल ट्रेंड है.
मुंबई सेंट्रल स्थित वॉकहार्ट हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विशाल शिंदे ने अंग्रेजी वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इस दावे को गलत और भ्रामक बताया. उनका कहना है, 'एक कदम, एक ही होता है, चाहे आप आगे चलें या पीछे. ऐसा कोई साइंटिफिक प्रूफ नहीं है कि 100 कदम पीछे चलना, कैलोरी बर्न, हार्ट हेल्थ या फिटनेस के मामले में 1,000 कदम आगे चलने के बराबर हो.'
आखिर पीछे चलना इतना ट्रेंड में क्यों है?
डॉ. शिंदे बताते हैं कि पीछे चलने से शरीर की मांसपेशियां अलग तरीके से काम करती हैं. इससे जांघों की मांसपेशियां ज्यादा एक्टिव होती हैं, घुटनों पर दबाव कम पड़ता है और बैलेंस व कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है. चूंकि पीछे चलना थोड़ा मुश्किल लगता है, इसलिए लोगों को लगता है कि इससे कई गुना ज्यादा फायदा मिलता है. लेकिन सिर्फ मुश्किल होने का मतलब यह नहीं है कि इसके फायदे भी कई गुना ज्यादा हो.
क्या पीछे चलने से घुटने या कमर दर्द में आराम मिलता है?
डॉ. शिंदे के मुताबिक, अगर रेट्रो वॉकिंग (पीछे चलना) सही तरीके से किया जाए तो यह घुटने और कमर के लिए फायदेमंद हो सकता है. पीछे चलने से आगे चलने के मुकाबले घुटनों पर दबाव कम पड़ता है. इससे शुरुआती घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस, घुटने के आगे वाले हिस्से के दर्द और रिकवरी के दौरान मदद मिल सकती है. इसके अलावा, पीछे चलने से पोस्चर और कोर मसल्स पर ध्यान जाता है जो कमर दर्द में भी राहत दे सकता है. वैसे आगे हो या पीछे, दोनों तरह से चलना कमर के लिए फायदेमंद होता है.
क्या पीछे चलना 10,000 स्टेप्स जैसे डेली टारगेट की जगह ले सकता है?
डॉ. शिंदे साफ कहते हैं कि रोजाना स्टेप्स का मकसद शरीर को एक्टिव रखना, स्टेमिना बढ़ाना और हार्ट हेल्थ को बेहतर करना होता है. रेट्रो वॉकिंग इसमें मदद कर सकता है लेकिन यह डेली वॉक की जगह नहीं ले सकता. यानी इसे आप अपनी डेली रूटीन में थोड़ी देर के लिए शामिल कर सकते हैं लेकिन इसे स्टेप काउंट पूरा करने का शॉर्टकट नहीं बना सकते. यानी पीछे चलने के कुछ फायदे जरूर हैं लेकिन यह कोई मैजिक नहीं है. इससे न तो आपके स्टेप्स कई गुना हो जाते हैं और न ही यह सामान्य चलने की जगह ले सकता है.
पीछे चलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
हमेशा खाली और साफ जगह पर ही चलें, धीरे-धीरे चलें और शरीर सीधा रखें और पीछे चलते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें
वहीं, जिन लोगों को चक्कर आने की समस्या, गंभीर गठिया, हाल में सर्जरी हुई हो या न्यूरोलॉजिकल समस्या हो, उन्हें पीछे चलने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.