आज कल कुछ चटपटा खाने के लिए किसी रेस्टोरेंट जाने की जरूरत नहीं होती है. जैसे ही कोई अपने घर से बाहर कदम रखता है, वैसे ही चटपटे स्नैक्स, रंग-बिरंगे ड्रिंक्स और फास्ट फूड की दुकानों का झुंड दिखने लगता है. उन्हें देखकर लोगों का स्ट्रीट फूड खाने का मन कर ही जाता है. वो सोचने लगते हैं, 'चलो छोड़ो डाइट. आज चीट डे एंजॉय करते हैं.' कई बार बहुत मन ना होने पर भी लोग भूख लगने पर इन दुकानों का ही सहारा लेते हैं क्योंकि ये आपके आस-पास ही मौजूद होती हैं.
अब आप सोचेंगे कि इसमें क्या खास है. ये तो बहुत ही आम बात है और अमूमन सभी ऐसा करते हैं. कहना गलत नहीं होगा कि ये अब लोगों की आदत में शुमार हो गया है. लेकिन अब एक रिसर्च सामने आई है कि जो कहती है कि आपकी गली और मोहल्ले की स्ट्रीट फूड्स की दुकानें भी आपकी हेल्थ को बहुत हद तक प्रभावित कर रही है. खासकर मोटापा और डायबिटीज यानी diabesity बढ़ाने का कारण बन रहे हैं.
घर के चारों ओर खतरा
नई रिसर्च में पाया गया कि आपके घर के 400 मीटर के दायरे में फास्ट-फूड, कनवीनियंस स्टोर्स की संख्या और फल-सब्जियों की दुकानों से लगभग दो गुना ज्यादा होती है. ऐसे में इन दुकानों तक लोग बहुत आसानी से पहुंच जाते हैं, जिसके कारण लोग अक्सर अनहेल्दी खाना पसंद करते हैं और वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है.
मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष, डॉ. आर एम अंजना, कहती हैं, 'लोग सोचते हैं कि वो इस खाने से दूर रहने में फेल हो रहे हैं, लेकिन ये दुकानें इस तरह से बनाई जाती हैं कि अनहेल्दी फूड सबसे ज्यादा हाइलाइट रहता है, सबसे आसानी से उपलब्ध होता है. ऐसे में उन्हें ये खाना आसान और फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना सबसे मुश्किल काम लगता है.'
स्टडी में क्या पाया गया?
चेन्नई के मांडवेली और मायलापुर इलाकों में दिसंबर 2021 से फरवरी 2022 के बीच की गई ये स्टडी साउथ एशिया बायोबैंक प्रोजेक्ट का हिस्सा थी. रिसर्च टीम ने घर-घर जाकर 1,138 लोगों से जानकारी ली, उनकी लंबाई, वजन और कमर का नाप लिया और खाली पेट ब्लड सैंपल लेकर शुगर की टेस्टिंग की.
स्टडी में मोटापे को पेट की चर्बी और बीएमआई के आधार पर मापा गया. पुरुषों में 90 सेमी और महिलाओं में 80 सेमी से ज्यादा कमर को बेली फैट माना गया. वहीं अगर किसी का बीएमआई 27.5 या उससे ज्यादा है तो उसे मोटापा माना गया.
इसमें नतीजे सामने आए कि 43% लोगों को डायबिटीज थी, 69.7% मोटापे का शिकार थे और 32.5% लोगों में मोटापा और डायबिटीज दोनों पाए गए. ये आंकड़े बढ़ते मेटाबॉलिक खतरे की ओर इशारा करते हैं.
स्ट्रीट फूड्स में अनहेल्दी ऑप्शंस ज्यादा
रिसर्च में सामने आया कि ज्यादातर स्ट्रीट्स और मोहल्लों में अनहेल्दी फूड्स के ऑप्शंस ही ज्यादा मौजूद हैं. रिसर्च के मुताबिक, किसी व्यक्ति के घर के 400 मीटर के दायरे में फास्ट-फूड जैसी अनहेल्दी चीजों की दुकानें ज्यादा मिलती हैं. वहीं फल-सब्जी की दुकानें और राशन दुकानें जैसे हेल्दी ऑप्शंस कम होते हैं.
रिटेल फूड एनवायरनमेंट इंडेक्स (RFEI) से पता चला कि अधिकतर इलाकों में अनहेल्दी दुकानों का दबदबा है. औसतन हर 1 हेल्दी दुकान के मुकाबले लगभग 2 अनहेल्दी दुकानें मौजूद हैं. रिसर्च में ये भी पाया गया कि जिन लोगों को डायबीसिटी है (डायबिटीज प्लस मोटापा). वे ऐसे इलाकों में रहते हैं, जहां फास्ट-फूड और कनवीनियंस स्टोर की संख्या और भी ज्यादा है.
डॉ. अंजना के अनुसार, 'जब अनहेल्दी खाना आसानी से और हर जगह उपलब्ध हो. तो डायबीसिटी का खतरा करीब दोगुना हो जाता है.'
घरों से पार्क की दूरी और भी बढ़ा रही खतरा
रिसर्च में ये भी सामने आया कि सिर्फ खाने की आदतें ही नहीं, बल्कि एक्सरसाइज की सुविधाओं की दूरी भी सेहत पर असर डालती है. रिसर्च में पार्क, जिम, खेल के मैदान और क्लब जैसी जगहों को शामिल किया गया. जो नतीजे सामने आए उसके मुताबिक, डायबीसिटी से पीड़ित 56% लोग ऐसे इलाकों में रहते थे, जहां नजदीकी पार्क या व्यायाम की जगह 1.1 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर थी. इतनी दूरी तय करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है.
इसके अलावा, खराब रास्ते भी लोगों को रोजाना टहलने या एक्सरसाइज करने से रोकते हैं. यही वजह है कि लोग एक्टिव नहीं रह पाते और बीमारी का खतरा बढ़ता जाता है. रिसर्च साफ तौर पर बताती है कि हर मोहल्ले में सुरक्षित और पास में पार्क या खेल का मैदान होना बहुत जरूरी है, ताकि लोग आसानी से व्यायाम कर सकें और सेहतमंद रह सकें.
पैसिव लाइफस्टाइल और खराब वातावरण से बढ़ता है खतरा
रिसर्च में एक साफ पैटर्न सामने आया, जिसे रिसर्चर्स ने 'पैसिव लाइफस्टाइल और खराब माहौल' कहा. इसका मतलब है कि कुछ लोग ऐसी हालत में रह रहे हैं, जहां न तो वे ज्यादा चल-फिर पाते हैं और न ही उन्हें सेहतमंद ऑप्शन आसानी से मिलते हैं.
इस पैटर्न में शामिल लोग फिजिकल एक्टिविटी कम करते थे, फल और सब्जियां कम खाते थे, पार्क या जिम से दूर रहते थे और उनके आसपास फास्ट-फूड और दूसरे अनहेल्दी फूड्स की दुकानें ज्यादा थीं.
रिसर्च में पाया गया कि ऐसे लोगों का वजन, कमर का साइज, ब्लड शुगर और HbA1c लेवल आम लोगों के मुकाबले ज्यादा था. आसान शब्दों में कहें तो पैसिव लाइफस्टाइल और आसपास का खराब माहौल मिलकर डायबिटीज और मोटापे का खतरा काफी बढ़ा देते हैं.
डॉ. अंजना कहती हैं, 'हम मरीजों को सलाह दे सकते हैं, लेकिन शहर किस तरह से डिजाइन किए जा रहे हैं वो बदलना भी जरूरी है. अगर फूड स्ट्रीट्स अनहेल्दी खाना बढ़ाते रहें और मोहल्लों में घूमने का रास्ता नहीं होगा, तो युवा डायबिटीज और मोटापा बढ़ते रहेंगे.'
शहरों को क्या करना चाहिए?