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फैटी लिवर का खतरा 169 % बढ़ा रहे किचन के ये बर्तन! अरबपति ब्रायन जॉनसन की चेतावनी

अमेरिकी अरबपति ब्रायन जॉनसन ने नॉन-स्टिक कुकवेयर में पाए जाने वाले फॉरएवर केमिकल्स के खतरों पर चेतावनी दी है. इस दावे के लिए उन्होंने एक स्टडी को आधार बनाया है जो कि यूएससी के केके स्कूल ऑफ मेडिसिन और हवाई यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुई.

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नॉन-स्टिक कुकवेयर्स में कुछ केमिकल होते हैं. (Photo: ITG)
नॉन-स्टिक कुकवेयर्स में कुछ केमिकल होते हैं. (Photo: ITG)

क्या आपके किचन में भी नॉन-स्टिक पैन या कढ़ाई का इस्तेमाल होता है? अगर आपका जवाब हां है तो ये खबर आपके लिए है. अपनी उम्र घटाने के ट्रायल्स और अपने एंटी-एजिंग रूटीन के लिए हर साल 17 करोड़ खर्च करने वाले अमेरिकी अरबपति ब्रायन जॉनसन (Bryan Johnson) ने सोशल मीडिया पर नॉन-स्टिक यूज करने वालों को चेतावनी दी है. उन्होंने एक रिसर्च का हवाला देते हुए कहा है कि अगर आपके पास नॉन-स्टिक कुकवेयर हैं तो उसे तुरंत फेंक दें. स्टडी के मुताबिक, इन बर्तनों में इस्तेमाल होने वाले 'फॉरएवर केमिकल्स' बच्चों और किशोरों में फैटी लिवर की बीमारी का खतरा 169 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और क्यों ये बर्तन आपकी सेहत के लिए 'जहर' बन रहे हैं, इस बारे में जानते हैं.

क्या है इस दावे का आधार

ब्रायन जॉनसन ने यह जानकारी यूएससी के केके स्कूल ऑफ मेडिसिन और हवाई यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुई SOLAR Adolescent Cohort बेस्ड स्टडी के आधार पर दी है. हालांकि, इस स्टडी की कुछ सीमाएं (Limitations) भी हैं क्योंकि यह रिसर्च मुख्य रूप से हिस्पैनिक मूल के वयस्कों पर की गई है और सैंपल साइज छोटा होने के कारण इसे पूरी दुनिया पर लागू करने के लिए अभी और बड़े लेवल पर रिसर्च की जरूरत है.

क्या कहती है ये स्टडी?

ब्रायन जॉनसन ने इसी स्टडी को आधार बनाकर लोगों को इन बर्तनों से दूर रहने की सलाह दी है. उन्होंने जिस रिसर्च के बारे में बात की है उसके मुताबिक, नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल PFOA (Perfluorooctanoic acid) और लिवर हेल्थ के बीच सीधा संबंध बताया है. 

वयस्कों के शरीर में जैसे-जैसे PFOA का लेवल दोगुना होता है तो उनमें फैटी लिवर बीमारी होने की संभावना 169 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. इसी तरह एक अन्य केमिकल PFHpA के लेवल में बढ़ोतरी से फैटी लिवर का खतरा 73 प्रतिशत तक बढ़ जाता है.

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'फॉरएवर केमिकल्स' क्यों कहा जाता है?

नॉन-स्टिक बर्तनों, वाटर-रिपेलेंट कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाले PFAS (Per- and polyfluoroalkyl substances) को 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है क्योंकि ये केमिकल पर्यावरण और मानव शरीर में खत्म नहीं होते. 

रिपोर्ट के मुताबिक, PFOA का इंसानी शरीर में हाफ-लाइफ 1.5 से 5 साल तक होता है जबकि पर्यावरण (जैसे पानी) में यह 92 सालों तक मौजूद रह सकते हैं. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, इंसुलिन फंक्शन और लिवर फैट मेटाबॉलिज्म को बुरी तरह प्रभावित करते हैं.

वयस्कों को अधिक खतरा क्यों?

स्टडी में यह पाया गया कि प्यूबर्टी (किशोरावस्था) के आसपास बच्चे इन केमिकल्स के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील होते हैं. इस उम्र में होने वाले हार्मोनल बदलाव और तेजी से विकास के कारण PFAS का बुरा असर लिवर और मेटाबॉलिज्म पर ज्यादा पड़ता है. 

रिसर्चर्स का कहना है कि जिन घरों में बच्चे या वयस्क हैं, वहां नॉन-स्टिक बर्तनों और ऐसे फूड कंटेनर्स के इस्तेमाल से बचना चाहिए जिनमें PFOA होने की संभावना हो.

स्मोकिंग करने वालों पर डबल अटैक

हैरानी की बात यह है कि यंग एडल्ट्स (युवाओं) में सामान्य तौर पर इसका सीधा असर कम देखा गया, लेकिन जो युवा स्मोकिंग करते हैं, उनमें यह केमिकल 'ट्रिगर' की तरह काम करता है. 

स्मोकिंग करने वाले युवाओं में PFAS के संपर्क में आने से मेटाबॉलिक लिवर डिजीज का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है. इसके अलावा, जो लोग आनुवंशिक रूप से (जैसे PNPLA3 GG जीन कैरियर) कमजोर हैं, उनके लिए यह और भी घातक हो सकता है.

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