
How much food should you eat: आज की बिगड़ी हुई और बिजी लाइफस्टाइल में खाना सिर्फ भूख मिटाने का साधन नहीं रहा बल्कि स्ट्रेस, टाइम की कमी और आदतों से जुड़ गया है. लोग बिजी रहने के कारण या तो जल्दी-जल्दी खा लेते हैं या फिर मार्केट से कुछ भी लेकर खा लेते हैं. ऐसे में उन्हें ये तक पता नहीं चल पाता कि वो कैसा खा रहे हैं और कितना खा रहे हैं. दरअसल, जल्दी-जल्दी खाना या फिर जरूरत से अधिक खाना जैसी चीजें फैटी लिवर, मोटापा और पाचन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ाता है. ऐसे में लिवर स्पेशलिस्ट डॉ. शिवकुमार सरीन ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इंसान को कितना और कैसे खाना चाहिए ताकि शरीर और लिवर दोनों स्वस्थ रह सकें.
खाना कितना है पर्याप्त?
डॉ. सरीन के अनुसार, इंसान को अपने पेट को पूरी क्षमता तक भरना चाहिए यानी कि भूख के बराबर नहीं खाना चाहिए. सही तरीका यह है कि पेट का आधा हिस्सा सॉलिड मील से भरा जाए. पेट को पूरा भर लेना अच्छी सेहत की निशानी नहीं है, बल्कि ऐसा करने से आपके डाइजेस्टिव सिस्टम और लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. आधा पेट खाना शरीर को बैलेंस में रखता है.

खाने में कम से कम 20 मिनट लगाएं
डॉ, सरीन ने बताया, खाते समय पेट और दिमाग के बीच तालमेल बनने में समय लगता है. दिमाग को यह समझने में करीब 20 मिनट लगते हैं कि पेट भर चुका है. अगर कोई 5–10 मिनट में खाना खत्म कर देता है तो उसे नहीं महसूस होगा कि उसने खाना खा लिया है और उसे फिर दोबारा भूख लगेगी. इसलिए हमेशा खाना धीरे-धीरे और आराम से खाना बेहद जरूरी है.
32 बार चबाएं
डॉ. सरीन चबाने की आदत को काफी अहम बताते हैं. उनका कहना है हर निवाले को कम से कम 32 बार चबाना चाहिए. इससे खाना ठीक से पचता है, पोषक तत्व बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं और कम खाने में ही पेट भरा हुआ लगने लगता है. जल्दी-जल्दी चबाकर निगला हुआ खाना लिवर और पाचन तंत्र के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
खाने के साथ पानी न पिएं
डॉ. सरीन की सलाह है कि खाने के साथ पानी बिल्कुल न लें. इससे डाइजेस्टिव जूस पतले हो जाते हैं और वो खाना सही से नहीं पचा पाते. पानी पीना हो तो खाने से पहले या खाने के 30–40 मिनट बाद पीना बेहतर रहता है. फुल प्लेट की जगह डेजर्ट प्लेट या हाफ प्लेट में खाना लें. छोटी प्लेट अपने आप खाने की मात्रा को नियंत्रित कर देती है.