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Raju Srivastava Death: कार्डियक अरेस्ट आया तो बचना मुश्किल, आप तुरंत छोड़ दें ये बुरी आदतें

Raju Srivastava Death & Cardiac Arrest: मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्त सिर्फ 58 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए. राजू श्रीवास्तव को कार्डियक अरेस्ट आने के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका पिछले 52 दिनों से इलाज चल रहा था. हाल ही में सिंगर केके को भी कार्डियक अरेस्ट ने अपनी चपेट में ले लिया था.

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फोटो- राजू श्रीवास्तव फोटो- राजू श्रीवास्तव

मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का बुधवार को इलाज के दौरान निधन हो गया. 42 दिनों से उनका दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा था. 10 अगस्त को 58 वर्षीय राजू श्रीवास्तव ट्रेडमिल को दौड़ते-दौड़ते कार्डियक अरेस्ट पड़ गया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. राजू श्रीवास्तव से पहले मशहूर सिंगर केके की भी लाइव शो के दौरान कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी. सबसे खतरनाक बात है कि कार्डियक अरेस्ट अचानक से आता है, जिसके बाद दिल काम करना बंद कर देता है. 

क्या है कार्डियक अरेस्ट  ( What is Cardiac arrest )
कार्डियक अरेस्ट आने के बाद इंसान का दिल काम करना एकदम से बंद कर देता है. इंसान को अचानक सांस लेने में मुश्किल होने लग जाती है और बेहोशी छाने लगती है. यह स्थिति हार्ट के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से बन जाती है. इससे हार्ट पंपिंग क्रिया पर असर पड़ता है और शरीर में ब्लड फ्लो थम जाता है.

कार्डियक अरेस्ट में अगर तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं दिया जाए तो यह जानलेवा बन जाता है. अधिकतर यह 30 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में ही देखा जाता है, लेकिन कई बार कार्डियक अरेस्ट की चपेट में बच्चे और जवान लोग भी आ जाते हैं. 

किस वजह से होता है कार्डियक अरेस्ट (Cardiac arrest Cause)
कार्डियक अरेस्ट आने का कारण एरिथमिया होता है. जब दिल की धड़कनें अनियमित हो जाती हैं तो उस स्थिति को एरिथमिया कहा जाता है. बच्चों में सांस रुकने की वजह से भी कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. हालांकि, कई बार कार्डियक अरेस्ट का कारण नहीं पता चल पाता है. 

क्यों आता है कार्डियक अरेस्ट
कार्डियक अरेस्ट आने की वजह कई बार इंसान का रहन-सहन या किसी तरह की कोई फिजिकल एक्टिविटी भी हो सकती है. जिन लोगों को हार्ट से जुड़ी बीमारियां होती हैं, उन्हें कार्डियक अरेस्ट का खतरा ज्यादा रहता है. 

दरअसल, इंसान की गलत आदतें उसके दिल को काफी नुकसान पहुंचाती हैं, जिन्हें हल्के में लेना ही कई बार मौत का कारण बन जाता हैं. ऐसे में कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर स्थितियों से बचने के लिए दिल के मामले में सतर्क रहना काफी जरूरी होता है.   

क्या होते हैं कार्डियक अरेस्ट के लक्षण (Cardiac Arrest symptoms)
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण ऐसे समय पर ही नजर आते हैं, जब इंसान को इलाज की तुरंत जरूरत होती है. इन लक्षणों में अचानक गिर जाना, पल्स का रुक जाना, सांस लेने में परेशानी होना, सीने में बेचैनी और दर्द महसूस करना, धड़कनों का बढ़ जाना या जबड़े में खिंचाव होना शामिल हैं. हालांकि, कई बार कार्डियक अरेस्ट अचानक भी आता है, ऐसी स्थिति में पहले से किसी तरह का लक्षण नहीं नजर आता है.

इन बदलावों से आपका 'दिल' रहेगा ठीक ( How to stop Cardiac arrest )

1. जिम फ्रीक नहीं, एक्टिव रहना जरूरी
अगर आप रोजाना या सप्ताह में कुछ दिन जमकर कसरत करते हैं तो यह काफी अच्छी बात है. लेकिन एक्सरसाइज करने के अलावा दिन भर कहीं पर बैठे या घर पर लेटे हुए रहते हैं तो यह परेशानी की बात है. दिल को मजबूत रखने के लिए इंसान को एक्टिव रहना चाहिए. अगर आप किसी दफ्तर में डेस्क जॉब करते हैं तो हर घंटे थोड़ी दूर चल लें, इससे आप एक्टिव महसूस करते रहेंगे. 

2. अपने दिल की सेहत को लेकर लापरवाही
बीमारी से दूर भागना इंसान की फितरत है लेकिन कई बार यह नुकसान दे जाती है. अपने हार्ट को ठीक रखने के लिए किसी दिन या समय का इंतजार नहीं करना चाहिए. हार्ट की परेशानियों से बचने के लिए कसरत कीजिए, अच्छा खाइए और अपने ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रोल और ब्लड शुगर का अपडेट लेते रहिए. 

3. ज्यादा शराब हार्ट के लिए बेहद खराब
शराब पीना और बहुत ज्यादा पीना, दोनों में काफी अंतर है. अगर कोई इंसान हर रोज एक सीमित मात्रा में शराब पीता है तो शायद उसके दिल को कम ही नुकसान पहुंचे लेकिन अगर कोई इंसान ज्यादा शराब का सेवन कर रहा है तो वह उसके हार्ट के लिए काफी नुकसान दायक हो जाती है. अधिक शराब में खून में कई तरह के फैट स्तर को बढ़ा देती है, साथ ही ज्यादा शराब पीने से ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है. 

4. खानपान से जुड़ीं गलतियां
दिल की बीमारियों से बचने के लिए इंसान को खानपान का ध्यान रखना काफी जरूरी है. अगर आप तला-भुना खाना खाते हैं तो आज ही बंद कर दीजिए, ये आपको मौत की स्थिति तक ले जा सकता है. 

अगर भविष्य में कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियों से बचना चाहते हैं तो इस तरह से खानपान का ध्यान रखें, जिससे आपका हार्ट ठीक रहे. इसके लिए अपनी डेली डाइट को प्रोटीन और विटामिन युक्त रखें. खराब और बाहर के खानपान से थोड़ा बचाव ही करें.

5. सिगरेट नहीं पीते हैं तो पीने वालों से दूर रहें
सिगरेट भी आपके दिल के लिए बहुत ज्यादा हानिकारक है. अगर आप सिगरेट नहीं पीते हैं तो पीने वाले लोगों से भी कम से कम उस समय दूर रहिए, जब वो सिगरेट पी रहे हों. सिगरेट आपके हार्ट और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. चाहे वह उसका धुआं आप खुद पीकर ले रहे हों या साथ वाला जो पी रहा है, उसका धुआं आप शरीर में ले रहे हों. 

7. पेट की चर्बी भी देती है दिल को नुकसान 
जब कोई इंसान मोटा होता है तो सबसे पहले उसके पेट पर ही चर्बी आनी शुरू होती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पेट की चर्बी आपके हार्ट के लिए काफी नुकसानदायक होती है.

इसलिए अगर आपके पेट पर भी चर्बी बढ़ रही है तो उसे जल्द से जल्द कम करिए और समय-समय पर अपनी वेस्ट मापते रहिए. वजन का थोड़ा कम होना भी आपके दिल के लिए अच्छा है.  

फैमिली हिस्ट्री का भी काफी असर
परिवार से जुड़ा दिल की बीमारी का इतिहास भी आपके हार्ट के लिए खतरनाक हो सकता है. इसलिए डॉक्टर को हमेशा यह जरूर बता देना चाहिए कि आपके परिवार में किसी को दिल की बीमारी है या किसी की कार्डियक अरेस्ट से ही अचानक मौत हुई हो.

खासतौर पर बच्चों और जवान लोगों में कार्डियक अरेस्ट आने का मुख्य कारण जेनेटिक डिसऑर्डर होता है.

किन मेडिकल कंडीशनों में बढ़ जाता है कार्डियक अरेस्ट का खतरा (Cardiac Arrest Risk Factors)

1. सांस का रुक जाना
अगर किसी इंसान की सांस रुक गई है तो उसे कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. अगर जल्द ही इलाज नहीं मिला तो जान भी जा सकती है. दम घुटने, डूबने, सदमे, ड्रग ओवर डोज और जहर की वजह से सांस रुक सकती है, जो कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है. 

2. डायबिटीज भी कारण
किसी इंसान को डायबिटीज है या उसके खून में पोटेशियम, मैगनेशियम और कैल्शियम के स्तर में बदलाव आ गया है तो उसके लिए कार्डियक अरेस्ट का खतरा काफी ज्यादा है. वहीं कई बार कुछ तरह की एंटीबायोटिक, हार्ट मेडिसिन एरिथमिया को नुकसान पहुंचा सकती हैं. 

3. सीने में चोट 
कई बार सीने के लेफ्ट साइड में अगर कुछ तेजी से लग जाता है तो इससे इंसान को कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. अधिकतर इस तरह की चोटें बेसबॉल या ऐसे कुछ खेलों को खेलते समय हो जाती है. कई बार फुटबॉल और क्रिकेट में भी सीने में चोट लग जाती है. इन तरह की चोटों का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों में होता है.

कार्डियक अरेस्ट से कितना अलग हार्ट अटैक (Difference between heart attack and cardiac arrest)
कार्डियक अरेस्ट में दिल काम करना बंद कर देता है और इंसान को तुंरत मेडिकल सहायता की जरूरत होती है. वहीं, हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन डिसऑर्डर है. इंसान को उस समय हार्ट अटैक आता है, जब दिल को खून पहुंचाने वाले सिस्टम में रुकावट आने लगती है. 

कभी-कभी दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से में ऑक्सीजन युक्त ब्लड का प्रवाह धीमा या कई मामलों में ब्लॉक भी हो जाता है. ऐसे में अगर ब्लड फ्लो को जल्द से जल्द ठीक नहीं किया जाता है तो मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और वह मरने लग जाती हैं. हालांकि, हार्ट अटैक के दौरान दिल धड़कता रहता है जबकि कार्डियक अरेस्ट में ऐसा नहीं होता है. 

सीपीआर ट्रीटमेंट बढ़ा देता है जीने की उम्मीद

अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट आता है तो उसे तुरंत सीपीआर ( Cardiopulmonary resuscitation) देकर भी बचाया जा सकता है.  सबसे खास बात है कि इसके लिए किसी प्रोफेशनल की जरूरत नहीं बल्कि सिर्फ कुछ स्टेप्स को जानकर ही किसी की जिंदगी को आसानी से बचाया जा सकता है. 

अगर कोई ऐसी खतरनाक स्थिति से जूझ रहा है तो उसके सीने को तेजी के साथ दबाना चाहिए, जिससे दिल धड़कना शुरू करे और ब्लड फ्लो को कम से कम इतनी देर तक बनाकर रखें जितने आपातकाल मदद नहीं मिल जाती है. अगर आपको नहीं समझ आ रहा है कि सीने को कैसे दबाना है तो उसके लिए आप इमरजेंसी हेल्पलाइन पर फोन पर ही जानकारी ले लें, जिससे आप समय से मरीज को सीपीआर ट्रीटमेंट दे पाए. 

सीपीआर देते समय आमतोर पर लोग तेजी के साथ सीने पर दबाव नहीं बनाते हैं, क्योंकि उनके मन में डर बैठा हुआ होता है. लेकिन ऐसा नहीं है, तेज दबाने से दिल पर असर पड़ता और काम होना शुरू हो जाता है.

कार्डियक अरेस्ट को लेकर डराने वाली बात यह है कि इसमें मरीज का सर्वाइवल रेट 12 फीसदी से भी कम है. यानी अगर 100 लोगों को कार्डियक अरेस्ट आता है तो उसमें सिर्फ 12 लोगों के बचने की उम्मीद होंगी. ऐसे में अगर मरीज का सही समय पर सीपीआर दे दी जाए तो इंसान के बचने का चांस दोगुना से तीन गुना तक बढ़ जाता है.

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