अक्सर हमारी दादी-नानी घर पर मलाई से देसी घी निकालते समय उसमें एक साफ पान का पत्ता डाल दिया करती थीं, जिसके पीछे केवल परंपरा ही नहीं बल्कि गहरा स्वास्थ्य विज्ञान और आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांत छिपे हुए हैं जो घी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देते हैं.
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पान का पत्ता घी के साथ उबलते समय अपने अंदर मौजूद फिनोल और फ्लेवोनोइड्स जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स को घी में छोड़ देता है, जिससे घी की शुद्धता और उसकी औषधीय शक्ति बहुत अधिक बढ़ जाती है और यह शरीर के लिए अधिक गुणकारी बन जाता है.
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इस प्रोसेस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पान का पत्ता घी के ऑक्सीकरण की प्रक्रिया को बहुत धीमा कर देता है, जिससे घी लंबे समय तक ताजा बना रहता है, उसमें से दुर्गंध नहीं आती और उसकी शेल्फ लाइफ बिना किसी प्रिजर्वेटिव के बढ़ जाती है.
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पाचन तंत्र के लिए यह घी किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि पान के गुण घी में मिलने से यह मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है और खाने के पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है.
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आयुर्वेद के अनुसार पान और घी का यह अनूठा मिश्रण हार्ट हेल्थ के लिए भी बेहतर माना जाता है क्योंकि यह रक्त में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के लेवल को बनाए रखने में मददगार होता है और शरीर की धमनियों को प्राकृतिक रूप से लुब्रिकेट करने का काम करता है.
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जब आप घी में पान का पत्ता डालते हैं, तो घी का रंग अधिक सुनहरा और उसकी खुशबू दिल छू लेने वाली होती है, जो न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि तनाव को कम करने में भी मदद करती है.
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इस घी का नियमित सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत होती है और यह शरीर के भीतर जमी गंदगी या विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे आपकी त्वचा में प्राकृतिक चमक और निखार आने लगता है.
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