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छोटेलाल की कचौड़ी… 100 साल से वही पारंपरिक स्वाद, आखिर खाने में कैसी लगती है?

वैसे तो देश के हर कोने में अलग-अलग स्वाद और मसाले वाली कचौड़ियां मिलती हैं. लेकिन ग्वालियर में एक दुकान ऐसी है जो पिछले करीब 100 साल से भी अधिक समय से कचौड़ियां बेच रही है. इस दुकान की क्या खासियत है, इस बारे में जानेंगे.

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ग्वालियर का वो जायका जिसके दीवाने हैं लोग. (Photo: ITG)
ग्वालियर का वो जायका जिसके दीवाने हैं लोग. (Photo: ITG)

मध्यप्रदेश के ग्वालियर की गलियों में ताजी तली कचौड़ियों की खुशबू आपको रेलवे स्टेशन से ही समझ आ जाती है. वैसे तो ग्वालियर की कई चीजें फेमस हैं लेकिन जो सोशल मीडिया पर सबसे अधिक फेमस है वो है  शहर के नया बाजार इलाके में 'छोटेलाल कचौड़ी'. पिछले करीब 100 सालों से लोग इस दुकान पर सुबह से ही लाइन लगाकर खड़े होते हैं और कचौड़ी लेने का इंतजार करते हैं. जिन लोगों ने वहां की कचौड़ी खाई है, उनका कहना है उनकी कचौड़ी में कुछ अलग सा टेस्ट है जो उसे खास बनाता है. तो आइए फूड ब्लॉगर्स और छोटेलाल की कचौड़ी खाने वाले लोगों ने उनकी कचौड़ी की क्या खासियत बताई ये भी जान लीजिए.

100 साल पुरानी पहचान

जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर के स्ट्रीट फूड में जिस छोटेलाल कचौड़ी का जिक्र होता है उनकी दुकान करीब 100 साल पुरानी है. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि भले ही दुकान में थोड़े बदलाव हो गए हैं लेकिन उनके टेस्ट में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है. दुकान के मालिक कई वीडियोज में बता चुके हैं कि उनके मसाले की प्योरिटी और बनाने का पारंपरिक तरीका ही लोगों की पसंद है.

क्या है इस स्वाद का असली राज?

छोटेलाल की कचौड़ी की सबसे बड़ी खासियत उनके अंदर भरी जाने वाली फिलिंग यानी दाल की पिट्ठी और उसमें मिलाए गए मसालों का सही कॉम्बिनेशन है. इस कचौड़ी को गर्मा-गर्म आलू की सब्जी और चटनी के साथ परोसा जाता है. यह सब्जी बहुत ज्यादा तीखी नहीं होती लेकिन हां इसमें खड़े मसाले और अदरक का बेहतरीन कॉम्बिनेशन होता है. इसके साथ ही ऊपर से हरी मिर्च और प्याज भी दी जाती है जो इसे खास बनाती है.

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घर पर कचौड़ी बनाने का आसान तरीका

कचौड़ी बनाने के लिए सबसे पहले मैदा में नमक, अजवाइन और घी अच्छी तरह रगड़ें, फिर थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर सख्त लेकिन लचीला आटा गूंथ लें और 20-30 मिनट के लिए ढककर रख दें. 

दूसरी ओर मूंग या उरद दाल को 3 घंटे भिगोकर दरदरा पीस लें, फिर गर्म तेल में जीरा, हींग, सौंफ, धनिया पाउडर, बेसन, लाल मिर्च, अमचूर और नमक डालकर भूनें जब तक मिश्रण सूखा और अलग न हो जाए, इसे ठंडा कर छोटी-छोटी बॉल्स बना लें. 

अब आटे की छोटी लोई लें, उसके बीच भरावन रखकर पोटली की तरह बंद करें, फिर हल्के हाथों से मोटी पूरी जैसी बेल लें बिना ज्यादा पतला किए. 

कढ़ाई में तेल मध्यम गरम करें और धीमी आंच पर कचौरियों को तलें जब तक वे सुनहरी, फूली हुई और खस्ता न हो जाएं, अधिक गरम तेल से बचें वरना अंदर पक नहीं पाएंगी. इन्हें आलू की सब्जी, चटनी या दही के साथ गर्मागर्म सर्व करें.

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