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फ्लोराइड से हड्डियां कमजोर पड़ने का खतरा

फ्लोराइड का इस्तेमाल कुछ साल पहले तक हड्डी से जुड़ी बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस के लिए किया जाता रहा है, क्योंकि इसे हड्डियों का वजन बढ़ाने वाला माना जाता था. लेकिन फ्लोराइड पर हुए कई रिसर्च में इसके बेहद हानिकारक साइड एफेक्ट का खुलासा हुआ है.

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फ्लोराइड का इस्तेमाल कुछ साल पहले तक हड्डी से जुड़ी बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस के लिए किया जाता रहा है, क्योंकि इसे हड्डियों का वजन बढ़ाने वाला माना जाता था. लेकिन फ्लोराइड पर हुए कई रिसर्च में इसके बेहद हानिकारक साइड एफेक्ट का खुलासा हुआ है. नजरअंदाज नहीं करें पीठ दर्द को

इन शोधों के अनुसार, फ्लोराइड के सेवन से हड्डियों के कमजोर पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है, खासकर कूल्हे की हड्डियों के टूटने की आशंका रहती है.

राष्ट्रीय राजधानी के वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स, स्पाइन सर्जरी, और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के सीनियर डॉक्‍टर गुरिदर बेदी ने कहा, 'कुछ साल पहले तक ओस्टियोपोरोसिस रोग के इलाज के लिए अधिकांशत: फ्लोरॉइड का इस्तेमाल किया जाता था. दरअसल यह हड्डियों के रेडियोग्राफिक संरचना में बेहद तेजी से बदलाव करता है और उन्हें अधिक सघन बना देता है. हड्डियों का बजन बढ़ने से उनमें कैल्शियम की मात्रा कम होती जाती है और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं. इससे इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है.'

अंतरराष्ट्रीय ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के मुताबिक, 2003 में भारत में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की संख्या 2.6 करोड़ थी, जो 2013 में बढ़कर 3.6 करोड़ हो गई.

एक अन्य विशेषज्ञ विवेक लोगानी ने बताया, 'यह साबित हो चुका है कि ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रसित लोगों का फ्लोरॉइड उपचार देने पर उनकी हड्डी का वजन तो बढ़ता है, लेकिन यह हड्डी कमजोर हड्डियों का निर्माण करता है. सीधी बात यह है कि फ्लोराइड का सेवन हड्डियों को कमजोर बनाती है.'

गुड़गांव के पारस अस्पताल में जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के डॉक्‍टर लोगान ने कहा, 'कई शोधों में यह बात सामने आई है कि फ्लोरॉइड न केवल हड्डियों को कमजोर करता है, बल्कि हड्डियों में खनिजों की कमी का कारण भी बनता है. यह ऐसे शिशुओं और प्रौढ़ लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है, जिनमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन सी की कमी होती है. साथ ही यह दिल और किडनी की बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए भी घातक होता है.'

विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर के निचले हिस्से में दर्द रहना, दर्द का लंबे समय तक बने रहना, सामान्य दवाओं का कोई असर न होना, शरीर में जकड़न रहना और चलने-फिरने में परेशानी होना जैसी समस्याएं अधिक मात्रा में फ्लोराइड के सेवन से होने वाले साइड एफेक्ट हैं.

लोगानी के मुताबिक, ज्यादा गहराई से बोरवेल के जरिए निकाले जाने वाले पानी में फ्लोरॉइड की मात्रा अधिक पाई जाती है. प्रतिदिन दो से आठ मिलीग्राम फ्लोराइड का सेवन करने वाले व्यक्ति में हड्डी से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं, हालांकि जरूरी नहीं है कि वह समस्या ऑस्टियोपोरोसिस ही हो.

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