रमजान का महीना इबादत का महीना है. इस महीने मुस्लिम लोग रोजा रखने के बाद सच्चे मन से अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं. सुबह अगर सूर्योदय से पहले ही सहरी खाकर रोजा रखा जाता है तो शाम को इफ्तार के समय रोजा खोलने के बाद लंबी तरावीह की नमाज भी पढ़नी होती है. रोजों में सुबह की नमाज से रात की तरावीह तक मुस्लिम लोग खुदा को याद करते हैं.
शाम को इफ्तार के समय जब रोजा खोला जाता है तो उसके लिए भी लोगों का अलग-अलग अंदाज है. कहीं लोग सादे पानी से रोजा खोलना पसंद करते हैं तो कहीं लोग शाही पकवान रोजा खोलने के लिए बनवाते हैं. यह तो खैर आज के जमाने की बात है लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मुहम्मद कैसे रोजा खोला करते थे?
दरअसल हर मुसलमान पैगंबर मुहम्मद की जीवनशैली की तरह अपना जीवन जीना चाहता है. इसी वजह से उस समय पैगंबर मुहम्मद जिस तरह रहते थे, उसी तरह आज भी रहने की कोशिश की जाती है.
हालांकि, अब पैगंबर मुहम्मद की उन चीजों को पूरी करने को सुन्नत अदा करना कहा गया है. पैगंबर मुहम्मद ने अपना जीवन काफी सादगी से जिया इसलिए रोजा खोलने के समय पैगंबर कुछ खास पकवान अपने लिए नहीं रखते थे. पैगंबर हमेशा खजूर खाकर ही रोजा खोल लिया करते थे. रोजा खोलने के बाद पैगंबर नमाज अदा करने के लिए बैठ जाते थे.
कैसे रोजा खोलते थे पैगंबर
इफ्तार के समय पैगंबर मुहम्मद को रोजा खोलने के लिए तीन ताजे खजूर की जरूरत होती थी. हालांकि, अगर उनके पास ताजा खजूर नहीं होते थे तो वह सूखे हुए खजूर खाकर रोजा खोलना पसंद करते थे.
किसी कारण अगर कैसा भी खजूर उनके पास नहीं है तो पैगंबर फिर पानी पीकर अपना रोजा खोला करते थे. खास बात है कि जिस खजूर से पैगंबर मुहम्मद अपना रोजा खोला करते थे, वह आज विज्ञान के अनुसार आपकी सेहत के लिए काफी अच्छा माना जाता है.
सेहत के लिए कितना फायदेमंद है खजूर?
छोटा सा खजूर आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. सर्दियों में तो खासतौर पर खजूर का सेवन आपके लिए और ज्यादा बढ़िया साबित हो सकता है. खजूर आपके लिए दिल के लिए काफी बढ़िया बताया गया है क्योंकि खजूर का सेवन कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने नहीं देता है. इसके साथ ही खजूर पाचन को ठीक करने में काफी मददगार है. साथ ही खजूर खाने से दिमाग को भी फायदा मिलता है. खजूर में फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए यह वजन घटाने के लिए भी काफी अच्छा माना जाता है.