बदलता मौसम जितना परेशान बड़े लोगों को करता है उससे ज्यादा परेशान बच्चों को करता है. बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी-खांसी या जुकाम अक्सर हो जाता है, जिसकी वजह से ना केवल वो बल्कि उनके माता-पिता भी परेशान हो जाते हैं. जैसे ही बच्चे को सर्दी-खांसी या जुकाम होता है तो माता-पिता उनके खाने-पीने पर भी बैन लगा देते हैं. कई बार बच्चे की पसंद की चीजें भी माता-पिता उन्हें खाने नहीं देते हैं. इन्हीं चीजों में एक फल भी शामिल है, जो केला है. केले को सर्दियों में या सर्दी-खांसी के दौरान अक्सर खाने से मना किया जाता है. माता-पिता से लेकर घर के बड़े-बुजुर्ग तक कहते हैं कि केला खाने से बलगम बढ़ता है और खांसी और ज्यादा हो जाती है.
लेकिन सवाल ये है कि क्या केला वाकई नुकसान करता है या ये सिर्फ एक मिथक है? डॉक्टर्स के मुताबिक, सच्चाई बड़े-बुजुर्गों द्वारा कही गई बातों से बिल्कुल अलग है. केला एक पौष्टिक फल है, जिसमें एनर्जी, फाइबर और जरूरी पोषक तत्व होते हैं. सही मात्रा में और सही तरीके से दिया जाए तो केला बच्चे की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाता.
सर्दी-जुकाम वायरस से होता है फल से नहीं
डॉक्टर्स और मेडिकल साइंस कहती है सर्दी-जुकाम होने के पीछे कोई फल या खाना नहीं होता, बल्कि ये एक वायरल इंफेक्शन है जो वायरस के कारण फैलता है. जब बच्चे की नाक बहती है, उसे खांसी आती है या कफ बनता है तो ये वायरस के खिलाफ इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया होती है ना कि केले या किसी और फल का असर. डॉक्टर कहते हैं कि किसी भी तरह का खाना सर्दी होने की वजह नहीं होता और न ही उसे बढ़ाता है.
क्लाउडनाइन हॉस्पिटल, नोएडा के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ कटारिया के अनुसार, केले से बलगम बढ़ने या सर्दी खराब होने का कोई साइंटिफिक कारण नहीं है. सर्दी एक वायरल बीमारी है और डाइट का इससे कोई डायरेक्ट संबंध नहीं होता.
क्या कहते हैं बच्चों के डॉक्टर?
सर्दी-जुकाम के समय बच्चों को पौष्टिक खाना देना बहुत जरूरी होता है. ऐसे हमारा नहीं बल्कि बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है. केला न तो बलगम बढ़ाता है और न ही खांसी को खराब करता है.
डॉक्टर्स कहते हैं बच्चों को सर्दी-खांसी या जुकाम किसी फल या खाने से नहीं होती, बल्कि वायरस से होती है. इसलिए बिना किसी गंभीर वजह के बच्चे की डाइट से केले जैसी हेल्दी चीजें हटाना सही नहीं है. डॉक्टर्स का कहना है कि जब तक बच्चे को केले से एलर्जी या कोई खास परेशानी ना हो, तब तक सर्दी में केला उनकी डाइट से हटाने की जरूरत नहीं है.
रिसर्च क्या कहती है?
केला खाने से बच्चों का सर्दी-जुकाम बढ़ता है या नहीं इस बात को साबित करने के लिए सीधे तौर पर कोई स्टडी तो नहीं की गई है. लेकिन न्यूट्रीशन और सांस से जुड़ी रिसर्च ये बताती हैं कि किसी भी तरह का खाना बलगम नहीं बढ़ाता. यहां तक कि दूध, जिसे कई दशकों से बलगम बढ़ाने वाला माना जाता है, वो भी बलगम नहीं बनाता है. इन फूड्स को खाने के बाद गले में जो भारीपन महसूस होता है, वो सिर्फ इनके टेक्श्चर और लार के मिलने की वजह से होता है, ना कि बलगम बनने से.
फिर केला खाने से सर्दी-जुकाम बढ़ता है, कैसे फैला ये भ्रम?
बड़े-बुजुर्गों की मानें तो केला को 'ठंडी तासीर' वाला फल माना जाता है. यही वजह है कि सर्दी-खांसी में इसे देने से मना करते आए हैं. धीरे-धीरे ये सोच एक आदत बन गई और किसी भी साइंटिफिक सबूत के बिना ही पीढ़ियों से चली आ रही है. डॉक्टर कहते हैं कि ट्रेडिशनल मान्यताएं और मेडिकल साइंस दो अलग-अलग चीजें हैं. बच्चे को क्या सूट करता है, ये देखना ज्यादा जरूरी है, न कि इस तरह के पुरान नियम.
सर्दी-खांसी में बच्चों के लिए फायदेमंद है केला?
डॉक्टर्स का कहना है कि सर्दी-खांसी और जुकाम के दौरान जब बच्चे की भूख कम हो जाती है, तब केला बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. ये बच्चे को इंस्टेंट एनर्जी देता है और शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी नहीं होने देता. केले में पोटैशियम होता है, जो शरीर का बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है जबकि विटामिन बी6 और विटामिन सी इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं. ये सॉफ्ट होता है, जिसकी वजह से ये गले में जलन नहीं करता, जिससे बच्चा इसे आसानी से खा पाता है. केले को मैश करके या गर्म दलिया में मिलाकर देना भी एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
ऐसे हों हालात तो सावधानी जरूरी
केला ज्यादातर बच्चों के लिए खाना सुरक्षित होता है, लेकिन अगर किसी बच्चे को केले से एलर्जी है या केला खाने के बाद उसे दिक्कत महसूस होती है, तो ऐसे में कुछ समय के लिए उसे केला नहीं देना चाहिए. जब ऐसी कंडीशन हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें.