कॉमेडियन भारती सिंह दूसरी बार मां बनी हैं और अब उनके 2 बेटे हैं. वह अपने पति हर्ष के साथ अक्सर अपने बेटे गोला के वीडियोज यूट्यूब पर शेयर करते थे जिसमें पैरेंटिंग से लेकर हर चीज पर वो बात करती थीं. हाल ही में भारती सिंह ने एक इंटरव्यू के दौरान नए माता-पिता को बच्चों के खाने पर खास नजर रखने की सलाह दी है. उन्होंने ये भी बताया है कि बच्चों को किस तरह का खाना देना चाहिए जो वो खुद अपने बच्चे को दे रही हैं. तो आइए इस बारे में जानते हैं.
भारती का मानना है कि वो जब से मां बनी हैं, उनका नजरिया काफी बदल गया है. उनका कहना है कि अक्सर सोशल मीडिया और स्कूल कल्चर के कारण पैरेन्ट्स पर दवाब होता है कि वो उन्हें पिज्जा, कपकेक, पास्ता, या नूडल्स जैसी चीजें लंच में दें क्योंकि उनके दोस्त भी स्कूल में वही खाते हैं. लेकिन बच्चों को यह समझाना जरूरी हो जाता है कि उन्हें ऐसी चीजें खानी चाहिए जो शरीर को ताकत दे. और बच्चों को ये समझाने में उनके माता-पिता को मदद करनी चाहिए.
भारती ने साफ कहा, 'दाल, सब्जी, रोटी, पराठा और चावल जैसे देसी खाने में वो ताकत है जो किसी पैकेट वाले फूड में नहीं. मैं केवल पराठा, सब्जी भेजता हूं. मेरे बेटे के लंचबॉक्स में सूखे मेवे और फल होते हैं जिसकी टीचर काफी तारीफ करते हैं.'
'मैं कहना चाहती हूं कि नई माताओं, आधुनिक माताओं को शुरुआत में बच्चों को घर का खाना खिलाने की कोशिश करनी चाहिए. ये सब तो जेन जेड, जेन अल्फा है...बाद में तो पिज्जा खाना ही है.'
भारती का मानना है कि हमारे भारतीय किचन खुद में एक पूरा न्यूट्रिशन पैकेज है. अगर बच्चे घर का बना सादा खाना खाते हैं तो उनकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है और पेट से जुड़ी समस्याएं भी कम होती हैं.
भारती ने बताया कि बच्चे को घर में बना ताजा खाना खिलाना ही उनकी पहली पसंद है. कभी-कभी बच्चों की पसंद को ध्यान में रखते हुए थोड़ा बदलाव कर देती हूं लेकिन बेस देसी खाना होना चाहिए.
बच्चे वही सीखते हैं जो वो अपने आसपास देखते हैं. अगर माता-पिता खुद जंक फूड कम खाएंगे तो बच्चे भी धीरे-धीरे उसी आदत को अपनाएंगे.
लंच बॉक्स पर बोलते हुए भारती ने कहा, 'लंच को जरूरत से ज्यादा “फैंसी” बनाने की होड़ नहीं होनी चाहिए. जरूरी यह है कि खाना पौष्टिक हो और बच्चा उसे खुशी से खाए. रोज कुछ नया और हेल्दी ट्राय किया जा सकता है जैसे सब्जी वाला पराठा, दही-चावल या हल्का सा पुलाव. इससे बच्चे का मन भी बना रहता है और सेहत भी.'
'खाने की आदतें बचपन में ही बन जाती हैं. अगर इस उम्र में बच्चों को सही दिशा दी जाए तो आगे चलकर उन्हें हेल्थ से जुड़ी दिक्कतें कम होंगी.'
भारती का मानना है कि हर बच्चा अलग होता है और उसके खाने की पसंद भी अलग हो सकती हैं. एक ही तरीका सभी पर लागू नहीं किया जा सकता. लेकिन हां देसी, घर का बना और संतुलित खाना हर बच्चे के लिए फायदेमंद है. नए माता-पिता को चाहिए कि वो बच्चों की पसंद और सेहत के बीच सही बैलेंस बनाएं और उसके मुताबिक खाना खिलाएं.