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पेट की जलन से रहते हैं परेशान? डाइट में शामिल करें ये 4 फूड्स

खराब डाइट के चलते कब्ज, ब्लोटिंग, पेट में एसिडिटी जैसी समस्याओं से परेशान हो सकते हैं. पेट में जलन की भी स्थिति बन सकती है. ऐसे में हम आपको कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल कर ऐसी दिक्कतों से काफी हद तक बच सकते हैं.

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Stomach iritation
Stomach iritation

गलत लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी पेट की दिक्कतों की सबसे बड़ी वजह बनती है. खासतौर पर चटपटा, मसालेदार और सड़ा-गला खाने से पेट का स्वास्थ्य बिगड़ता है और पेट में अपच की स्थिति बनने लगती है. एकबार पेट का स्वास्थ्य खराब होना शुरू होता है तो इससे संबंधित कई तरह की बीमारियां सामने आने लगती हैं.

खराब डाइट के चलते कब्ज, ब्लोटिंग, पेट में एसिडिटी जैसी समस्याओं से परेशान हो सकते हैं. पेट में जलन की भी स्थिति बन सकती है. कई बार ये समस्याएं काफी पीड़ादायक बन जाती हैं. ऐसे में हम आपको कुछ फूड्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें अपनी डाइट में शामिल कर ऐसी दिक्कतों से काफी हद तक बच सकते हैं.

पेट के लिए हरी मटर का सेवन फायदेमंद

आपको डाइट में हरी मटर को जरूर शामिल करना चाहिए. दरअसल, हरी मटर में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है. इसके सेवन से आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है. बेहतर मेटाबॉलिज्म आपके पाचन तंत्र को सही रखता है और पेट की जलन जैसी समस्या से राहत दिलाता है.

इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ पाचन तंत्र के लिए संतरा बेस्ट

विटामिन सी युक्त संतरा आपकी इम्युनिटी को बेहतर करने के साथ-साथ पेट की हेल्थ के लिए भी फायदेमंद है. इसका सेवन आपकी आंतों से टॉक्सिन्स को निकालने में मदद करता है. साथ ही इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन तंत्र को सही रखता है. 

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पालक का सेवन मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करेगा

पालक एक पौष्टिक सब्जी है. इसमें विटामिन ए, सी, के 1, फोलिक एसिड, कैल्शियम और आयरन होते हैं. साथ ही यह सब्जी फाइबर का भी अच्छा स्रोत है. फाइबर युक्त इस सब्जी का सेवन आपके मेटाबॉलिज्म बेहतर रखने में मदद करता है और एसिडिटी, पेट में जलन समेत कई दिक्कतों से छुटकारा दिलाता है.

ब्रोकली भी पेट की सेहत के लिए फायदेमंद

ब्रोकली फाइबर के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है. इसका सेवन पाचन तंत्र को सही रखता है. इसमें ग्लूकोसाइनोलेट्स नामक एक विशेष प्रकार का फाइबर होता है, जो आंत के लिए गुड बैक्टीरिया के रूप में काम करता है. इससे आंत के स्वास्थ्य में सुधार होता है.

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