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‘पहले 1.16 लाख पेड़ों का हिसाब दो...’  SC ने DDA से मांगा जवाब, कहा- जल्दबाजी में नहीं देंगे कोई आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक दिन में एक लाख से अधिक पेड़ नहीं लगाए जा सकते और पहले जमीन की तैयारी ज़रूरी है. अदालत ने घटनास्थल पर अब तक हुए कार्य की विस्तृत रिपोर्ट मांगी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सड़क चौड़ी करना सेना के अस्पताल की जरूरतों के चलते अनिवार्य था.

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अरावली रिज क्षेत्र में पेड़ काटने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. (Photo-ITG)
अरावली रिज क्षेत्र में पेड़ काटने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. (Photo-ITG)

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के अरावली स्थित मॉर्फोलॉजिकल रिज क्षेत्र में 473 और पेड़ काटने की अनुमति मांगने वाली डीडीए की याचिका पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना निर्देशों के पूर्ण अनुपालन की पुष्टि किए किसी भी तरह का आदेश जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाएगा.

कोर्ट ने डीडीए से पूछा कि वो हिसाब दे कि 1,16,000 पेड़ों का क्या हुआ? नए पौधे कितने लगाए गए और उनमें से कितने बचे? डीडीए के वकील सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने कहा कि रिज जंगल की बाउंड्री वॉल का निर्माण लगभग पूरा हो गया है. GRAP की पाबंदियों के चलते उम्मीद है कि 28 फरवरी तक ये काम पूरा हो जाएगा.

सीजेआई ने कहा, 'हमें दिखाइए कि हमारे आदेश का अनुपालन कितना हुआ है. आप एक दिन में एक लाख से अधिक पेड़ नहीं लगा सकते. आपको सबसे पहले तो जमीन खुदाई की कवायद पूरी करनी होगी. हमें इस बात पर पूरी रिपोर्ट चाहिए कि अब तक घटनास्थल पर क्या हुआ है.'

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संकरी सड़क के कारण ही ये सब करना पड़ा. चौड़ी सड़क इसलिए बनानी पड़ी क्योंकि यहां सेना के लिए अस्पताल है. इसलिए ही सड़क को चौड़ा करने की जरूरत है. अभी तक केवल ओपीडी काम कर रही है. इसलिए हलफनामे में ओपीडी लिखा है. उस सड़क पर ट्रकों आदि के परिचालन को समायोजित करने की आवश्यकता है.

कोर्ट की सख्ती

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अस्पताल की जरूरत को हमारे पहले के फैसले से मान्यता दी गई है. लेकिन यहां लगभग 1,60,000 पेड़ हैं. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि पौधों की मृत्यु दर शून्य प्रतिशत हो. हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि इसका पूरी निष्ठा और सख्ती से परिपालन किया जाए.

SG मेहता ने कहा कि इस बाबत मुझे सरकार से निर्देश लेना होगा. याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि वे अब पौधे रोपना चाहते हैं. यह प्रारंभिक चरण में है. सीजेआई ने कहा कि आजकल उगाए गए पेड़ों को भी सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया जा सकता है. लेकिन वृक्षारोपण ही होने की जरूरत है. पूरी कोशिश की जाए कि पीपल, नीम, जामुन, अमलतास आदि के ऐसे पौधे लगाए जाएं जो जल्दी ही बड़े वृक्ष बन जाएं.

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एसजी ने कहा कि जो सड़क बनाई गई है वहां लगे पौधों को स्थानांतरित करने की जरूरत है. उन्हें किया जा सकता है. सीजेआई ने कहा कि लेकिन कटाई का मतलब है काटना...इसलिए आपकी पूरी रिपोर्ट और कार्ययोजना के बिना हम जल्दबाजी में कुछ भी नहीं होने देंगे. सौभाग्य से इस कार्यवाही का परिणाम यह है कि अब इसका लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव होगा. याद रखें कि जंगलों के ये 18 क्षेत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए नहीं बने हैं. इस मामले पर दो हफ्ते बाद यानी 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई.

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