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मनदीप कौर सुसाइड: NRI से शादी करने वाली महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने वाले बिल का इंतजार, क्या-क्या हैं प्रावधान?

यूपी के बिजनौर की बेटी मनदीप कौर के अमेरिका के न्यूयॉर्क में सुसाइड करने के बाद NRI से शादी की स्थिति में महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने वाले बिल को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. इसके लिए सरकार ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा में एक बिल पेश किया था जिसे बाद में स्थायी समिति को भेज दिया गया था. स्थायी समिति ने कुछ सिफारिशों के साथ इससे संबंधित बिल को मंजूरी भी दे दी थी...

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बिल में हैं सख्त प्रावधान (प्रतीकात्मक तस्वीर) बिल में हैं सख्त प्रावधान (प्रतीकात्मक तस्वीर)

उत्तर प्रदेश के बिजनौर की बेटी मनदीप कौर ने पति की प्रताड़ना से तंग आकर अमेरिका के न्यूयॉर्क में सुसाइड कर लिया था. बिजनौर जिले की मनदीप ने सुसाइड से पहले वीडियो भी रिकॉर्ड किया. मनदीप कौर के परिजनों ने पति और ससुराल वालों पर ये आरोप लगाया कि वे बेटा चाहते थे और जब दो बेटियां हो गईं तो वे उस पर जुल्म ढाने लगे. मनदीप कौर के सुसाइड के मामले में यूपी के बिजनौर जिले के नजीबाबाद थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर तहकीकात शुरू कर दी है लेकिन इस घटना के बाद एक और बहस शुरू हो गई है.

मनदीप कौर के अमेरिका में सुसाइड करने के बाद अनिवासी भारतीय से शादी होने पर महिलाओं को किस तरह से उत्पीड़न से बचाया जाए, इस कानून को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है. एनआरआई से शादी पर महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने वाले बिल का अब भी इंतजार है. इसे लेकर लंबी चली मुहिम के बाद साल 2019 में ये आस जगी थी कि शायद अब एनआरआई से शादी होने पर महिलाओं को उत्पीड़न से सुरक्षा मिल सके. ऐसा इसलिए, कि तब केंद्र सरकार ने संसद में इससे संबंधित बिल पेश किया था.

बिल में थे ये प्रावधान

  • NRI को शादी के बाद 30 दिन के अंदर उसका पंजीकरण कराना होगा.
  • बगैर रजिस्ट्रेशन कराए विदेश चले जाने पर NRI को विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर नोटिस जारी कर पेश होने के लिए कहा जाएगा. ये मान लिया जाएगा कि संबंधित NRI को नोटिस मिल गई है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जा सकेगी.
  • NRI के निर्धारित समयसीमा के अंदर पेश नहीं होने पर गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया जा सकेगा.
  • कोर्ट में पेश नहीं होने की स्थिति में NRI को भगोड़ा घोषित किया जा सकेगा.
  • NRI की संपत्ति जब्त किया जा सकेगा.
  • संबंधित NRI का पासपोर्ट रद्द करने का भी अधिकार होगा.

सुषमा स्वराज ने पेश किया था बिल

केंद्र सरकार की ओर से तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अनिवासी भारतीय (प्रवासी) विवाह पंजीकरण विधेयक, 2019 संसद में पेश किया था. सुषमा स्वराज ने 11 फरवरी 2019 को राज्यसभा में ये बिल पेश किया था. तब सरकार की ओर से ये भी कहा गया था कि यदि ये विधेयक संसद से पारित नहीं हो पाता है तो हम इसे लेकर ऑर्डिनेंस लाएंगे. इससे एनआरआई से शादी के बाद प्रताड़ना झेलने को मजबूर महिलाओं के मन में ये उम्मीद जगी कि अब उन्हें न्याय मिल सकेगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. राज्यसभा के सभापति और लोकसभा के स्पीकर ने सलाह-मशविरे के बाद इस विधेयक को संसद की विदेश मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति को भेज दिया.

स्थायी समिति को भेज दिया गया था विधेयक

लोकसभा सचिवालय की ओर से एक बुलेटिन जारी कर इस संबंध में जानकारी भी दी गई थी. लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन में ये बताया गया था कि विदेश मंत्रालय की स्थायी समिति से दो माह के अंदर विचार कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. स्थायी समिति ने भी मार्च 2020 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी लेकिन तब से अब तक, इस बिल का इंतजार चल रहा है.

स्थायी समिति ने की थे ये सिफारिश

विदेश मामलों से संबद्ध स्थायी समिति ने अनिवासी भारतीय (प्रवासी) विवाह पंजीकरण विधेयक 2019 के मसौदा प्रस्ताव में बदलाव के लिए कुछ सिफारिशें की थीं और इन बदलावों के साथ इसे मंजूरी दे दी थी. स्थायी समिति ने विवाह पंजीकरण आवेदन के प्रारूप में बदलाव की सिफारिश की थी और कहा था कि इसमें पासपोर्ट, वीजा, स्थायी निवास कार्ड, विदेश में निवास का पता जैसी प्रमाणिक जानकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए.

स्थायी समिति ने साल 2016 के जनवरी महीने से 2019 के अक्टूबर तक एनआरआई दंपति से संबंधित 5298 शिकायतों का भी उल्लेख भी किया था. स्थायी समिति ने कहा था कि य कानून बन जाने के बाद ऐसे विवाद तेजी से निस्तारित करने में मदद मिल सकेगी. स्थायी समिति भी अपनी सिफारिशों के साथ इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे चुकी है.

कब खत्म होगा विधेयक का इंतजार

स्थायी समिति से भी मंजूरी मिले हुए दो साल से अधिक समय गुजर गया, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हो रहा है. लंबी मुहिम के बाद राज्यसभा में पेश हुआ ये विधेयक स्थायी समिति की हरी झंडी मिलने के बाद भी संसद में पेश होने के इंतजार में है. ये विधेयक 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राज्यसभा में पेश हुआ था. 2020 में स्थायी समिति ने भी मंजूरी दे दी. इसके बाद से ही संसद के हर सत्र से पहले ये उम्मीद जताई जाती है कि इस बार सरकार इसे पेश कर ही देगी लेकिन ये इंतजार, इंतजार बनकर ही रह जाता है. अब मनदीप कौर के अमेरिका में प्रताड़ना से तंग आकर सुसाइड करने के बाद इसे लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है. देखना होगा कि इस विधेयक का इंतजार कब खत्म होता है.

 

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