बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने घरेलू हिंसा कानून से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक चले अंतरंग संबंध, बार बार साथ रहना और उससे बच्चे का जन्म होना केवल कैजुअल रिलेशनशिप नहीं माना जा सकता. ऐसे संबंध घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शादी जैसे रिश्ते की श्रेणी में आ सकते हैं.
यह फैसला न्यायमूर्ति एम एम नेरलिकर की पीठ ने गडचिरोली के एक किसान की याचिका पर सुनाया. आरोपी व्यक्ति घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत चल रहे केस को रद्द कराने की मांग कर रहा था. उस पर उसकी 22 वर्षीय साथी ने घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था. हालांकि कोर्ट ने आरोपी के माता पिता और पत्नी को राहत देते हुए उनके खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी.
लंबे समय के संबंध को बताया शादी जैसा रिश्ता
महिला और उसकी नाबालिग बेटी ने मजिस्ट्रेट अदालत का रुख कर यह आरोप लगाया था कि आरोपी के साथ उसका लंबे समय तक रिश्ता रहा. महिला का कहना था कि वह उसके साथ रहती थी और इसी दौरान वह गर्भवती हुई थी. आरोप है कि आरोपी के दबाव में पहले गर्भपात कराया गया. इसके बाद भी दोनों के बीच संबंध बना रहा और बाद में एक बच्ची का जन्म हुआ जो अब करीब आठ महीने की है.
महिला का आरोप है कि आरोपी ने उससे शादी करने से इनकार कर 2022 में किसी और महिला से विवाह कर लिया. इसके बाद उसने आरोपी के खिलाफ रेप सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कराया.
घरेलू हिंसा केस खारिज करने से कोर्ट का इनकार
अदालत में आरोपी ने दलील दी कि यह सिर्फ एक सामान्य संबंध था और घरेलू रिश्ता नहीं माना जा सकता. लेकिन कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रिश्ते की अवधि, शारीरिक संबंध और संतान का होना शादी जैसे रिश्ते के मजबूत संकेत हैं. इसलिए शुरुआती स्तर पर केस को खारिज नहीं किया जा सकता.