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ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वेक्षण पर रोक से मुस्लिम पक्ष खुश, हिंदू पक्ष ने बताई आगे की रणनीति

काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में हाई कोर्ट प्रयागराज के एक बड़े फैसले की गूंज वाराणसी में भी सुनाई दी. जिसके असर से मस्जिद पक्ष में खुशी तो मंदिर पक्ष में गम का माहौल था.

सर्वेक्षण पर रोक से मुस्लिम पक्ष खुश सर्वेक्षण पर रोक से मुस्लिम पक्ष खुश
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सर्वेक्षण पर रोक से मुस्लिम पक्ष खुश
  • हिंदू पक्ष ने बताई आगे की रणनीति

काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद में हाई कोर्ट प्रयागराज के एक बड़े फैसले से मुस्लिम पक्ष में ख़ुशी की लहर देखने को मिली. दरअसल, हाई कोर्ट ने निचली अदालत के ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे के आदेश पर रोक लगा दी. जिससे मस्जिद पक्ष में न्याय की आस जगी है तो मंदिर पक्ष हाई कोर्ट के फुल बेंच में अपील करने की तैयारी कर रहा है.

सर्वेक्षण पर रोक से मुस्लिम पक्ष खुश

इस बारे में मस्जिद की ओर से पक्षकार और अंजुमन इंतजामिया के ज्वाइंट सेक्रेटरी सैयद मो. यासिन ने बताया कि 8 अप्रैल 2021 को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी ने आदेश दिया था कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तहत ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराया जाए. इसको लेकर वाराणसी के जिला जज में रिवीजन भी फाइल किया था. लेकिन रिवीजन में अड़ंगा लगने पर हम हाई कोर्ट चले गए और आज हाई कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के ASI द्वारा सर्वे पर स्टे लगा दी है. 

उन्होंने बताया कि वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन का यह फैसला न्याय विरूद्ध था. उस समय न्याय से हटकर ASI सर्वे का फैसला दे दिया गया था. इसके अलावा कोर्ट ने टिप्पणी भी की कि वाराणसी के जज साहब अपनी लिमिट से बाहर जाकर फैसला दे रहे थे. अब वाराणसी के कोर्ट में कोई केस तब तक नहीं चलेगा, जबतक हाई कोर्ट में फाइनल जजमेंट नहीं हो जाता. अगर विपक्ष आगे जाएगा तो हम भी जाएंगे. 

हिंदू पक्ष की आगे की क्या रणनीति?

काशी विश्वनाथ मंदिर की तरफ से प्रमुख वादी हरिहर पांडेय ने बताया कि 1991 से लेकर अब तक कई बार स्टे और खारिज होता रहा है. ऐसा देखते-देखते मेरी जिंदगी बीत रही है. मजे की बात है कि हमारे मंदिर पर अवैध रूप से एक छज्जा बन गया है, छत बन गया है. जिसको यह लोग मस्जिद का रूप देते हैं. हम उसको मस्जिद मानते ही नहीं हैं. वह हमारा मंदिर है. हमारे स्वयंभू मंदिर के नीचे हैं और हमारे स्वयंभू लिंग को मुसलमानों द्वारा पत्थर से ढक दिया गया है. बगल में हमारी वापी है, जिसको हम ज्ञानवापी कूप कहते हैं. मान लीजिए हाई कोर्ट ने आज स्टे दे भी दिया, हम अब आगे डबल बेंच में जा सकते हैं या फुल बेंच में भी जा सकते हैं. हमारे लिए तो सुप्रीम कोर्ट और पार्लियामेंट तक का रास्ता खुला है. 

उन्होंने बताया कि ज्ञानवापी मस्जिद का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के लिए वह पूर्ण रुप से दृढ़ संकल्पित हैं. उनके मुताबिक मुस्लिम पक्ष जानता है कि मंदिर के अंदर हमारे देवी देवता और शिवलिंग हैं जिसकी वजह से वह पुरातात्विक सर्वेक्षण से भाग रहे हैं. मुस्लिम पक्षकारों को पुरातत्व विभाग से सर्वे कराने की अगुवाई करनी चाहिए, लेकिन इनके जिगर में दम नहीं है. 

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