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दो गज जमीन भी न मिली कूचा-ए यार में...अनिल देशमुख की याचिका की सुनवाई के दौरान शायराना हुए जज साहब

अनिल देशमुख की बेल याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट का माहौल शायराना दिखाई पड़ा. जज ने भी शायरी कही और वकीलों ने भी अपनी दलील शायरी के जरिए रखी. इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होने वाली है.

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अनिल देशमुख अनिल देशमुख
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 10 अगस्त को मामले की फिर सुनवाई
  • 100 करोड़ के वसूली कांड में फंसे देशमुख

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को जमानत नहीं मिल पा रही है. वसूली कांड में बुरी तरह फंस चुके देशमुख पिछले साल गिरफ्तार किए गए थे और तब से जेल में ही कैद हैं. कई मौकों पर कोर्ट के सामने उनकी जमानत याचिका आई है, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है. अब एक बार फिर बॉम्बे हाई कोर्ट के सामने अनिल देशमुख की जमानत याचिका आई. इस बार भी लंबी सुनवाई चली. लेकिन एक फर्क था, जज भी शायराना हो गए और दलील रख रहे वकील ने भी शायरी के अंदाज में अपना जवाब दिया.

असल में सुनवाई के दौरान ASG अनिल सिंह ने बताया था कि उन्हें अपनी बात पूरी करने के लिए कम से कम अभी ढाई घंटे और चाहिए. उन्होंने ये भी जानकारी दी थि कि अगले हफ्ते वे सुनवाई के लिए नहीं आ पाएंगे. अब क्योंकि अनिल देशमुख को जल्द से जल्द जमानत चाहिए थी, ऐसे में उनके वकील विक्रम चौधरी ने कोर्ट से इस मामले की जल्द सुनवाई की अपील की. उन्होंने देशमुख के खराब स्वास्थ्य का भी हवाला दिया. इसी बहस पर जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण को एक कविता याद आ गई. ये कविता असल में मुगलों के आखिरी शासक बहादुर शाह जफर के लिए लिखी गई थी.

जस्टिस चव्हाण ने कहा कि उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन...दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में. कितना है बदनसीब जफर दफ के लिए.... दो गज जमीन भी न मिली कूचा-ऐ-यार में. अब जस्टिस चवन ने ये कविता याद करते हुए बताया कि इस महामारी की वजह से इंसान की जिंदगी कितनी अनिश्चित सी हो गई है. अब जस्टिस चवन ने तो सिर्फ एक शायरी के जरिए अपनी बात रखी, कोर्ट में इसके बाद शायरना अंदाज में दलील रखने का सिलसिला चल पड़ा.

जब विक्रम चौधरी को देशमुख के लिए जल्द सुनवाई की तारीख नहीं मिल रही थी, उन्होंने भी जज के सामने एक शायरी बोलते हुए कहा कि एक महीने के वादे पर साल गुजारा फिर भी ना आये...वादे का ये एक महीना कब तक आखिर कब तक. इस शायरी के बाद अनिल देशमुख की वर्तमान सेहत पर बात करते हुए विक्रम चौधरी ने कहा कि उनके क्लाइंट को ब्लैकआउट हो रहे हैं. कुछ दिन पहले वे बेहोश भी हो चुके हैं. जब जज ने चौधरी से पूछा कि क्या मामले की जांच पूरी हो गई है, इस पर जवाब मिला कि पूछताछ तो चलती रहेगी लेकिन देशमुख को कई पाबंदियों के साथ छोड़ देना चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी गतिविधियों पर कोर्ट द्वारा पैनी नजर रखी जा सकती है, जैसे विदेशों में प्रावधान रहते हैं, वैसा ही कुछ यहां भी किया जा सकता है.

लेकिन जब विक्रम सुनवाई के दौरान लगातार देशमुख की सेहत का हवाला दे रहे थे, ASG अनिल सिंह ने सवाल उठा दिए कि आपके द्वारा मेडिकल ग्राउंड पर बेल नहीं मांगी जा रही थी. अगर मेडिकल ग्राउंड पर जमानत चाहिए थी, तो वो स्पष्ट बताना चाहिए था. वो जमानत भी तब मिलती अगर ये साबित किया जाता कि उनका इलाज जेल वाले अस्पताल में संभव नहीं है. अभी के लिए 10 अगस्त को अनिल देशमुख के मामले में फिर सुनवाई होने वाली है.
 

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