कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच जारी सत्ता के संघर्ष ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है. हाल ही में राहुल गांधी के साथ दोनों नेताओं की संक्षिप्त बातचीत ने राज्य के सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है. हालांकि, डीके शिवकुमार ने इन तमाम कयासों को खारिज करते हुए कहा है कि राहुल गांधी से मिलना कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि वह पार्टी के शीर्ष नेता हैं.
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित अपने सदाशिवनगर आवास पर मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया है कि राहुल गांधी से उनकी मुलाकात को अलग चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी हमारे पार्टी के शीर्ष नेता हैं. उनसे मिलना या उन्हें फोन करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. कल जब मैं दिल्ली जाऊंगा, तो वहां भी सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करूंगा."
'मैं आपकी इच्छाएं भी उनके सामने रख दूंगा'
जब उनसे उनके समर्थकों की खुशी और नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीदों के बारे में पूछा गया, तो शिवकुमार ने सधे हुए अंदाज में कहा, "हम अपने नेताओं के साथ क्या चर्चा करते हैं, इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. जहां तक कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं का सवाल है, तो मैं आपकी (मीडिया की) इच्छाएं भी उनके सामने रख दूंगा."
अपने समर्थकों की प्रतिक्रिया पर पूछे गए सवाल पर शिवकुमार ने कहा, “वह (राहुल गांधी) हमारे पार्टी नेता हैं. उनसे मुलाकात होना स्वाभाविक है. लेकिन हम अपने नेताओं से क्या बात करते हैं, यह सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया जाता.” उन्होंने इस दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में मीडिया पर भी तंज कसते हुए कहा कि अगर पूछा गया तो वह मीडिया की इच्छाएं भी राहुल गांधी के सामने रख देंगे.
ट्वीट को लेकर दिया ये जवाब
शिवकुमार के एक हालिया ट्वीट ने भी काफी हलचल मचाई थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि 'प्रार्थनाएं कभी व्यर्थ नहीं जातीं, भले ही प्रयासों में देरी हो.' मीडिया में इसे मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी प्रार्थना के रूप में देखा जा रहा था. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, "मेरे ट्वीट की व्याख्या गलत तरीके से की जा रही है. मैंने यह बात कावेरी आरती और मेकेदातु परियोजना के संबंध में अदालत के हमारे पक्ष में आए फैसलों के संदर्भ में कही थी. इसे राजनीति से जोड़कर देखने का कोई तुक नहीं है."
सियासी खींचतान की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान की अटकलें लगती रही हैं. कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के खेमों के बीच 'ढाई-ढाई साल' के मुख्यमंत्री वाले फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं होती रही हैं. सिद्धारमैया जहां अपनी कुर्सी पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं शिवकुमार को पार्टी का संकटमोचक और मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार माना जाता है.