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मनरेगा हटाने के खिलाफ कोर्ट जाएगी कर्नाटक सरकार, ‘G-Ram-G’ को देगी कानूनी चुनौती

कर्नाटक कैबिनेट ने मनरेगा को हटाकर लाई गई केंद्र सरकार की ‘VB G, Ram G’ योजना के खिलाफ कानूनी, राजनीतिक और जन स्तर पर लड़ाई लड़ने का फैसला किया है. सरकार का आरोप है कि यह योजना विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है और इससे ग्रामीणों का रोजगार का अधिकार छीना गया है, क्योंकि अब मजदूरों को पंचायतों की जगह ठेकेदारों के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है.

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कर्नाटक सरकार का आरोप है कि मनरेगा योजना हटाकर ग्रामीणों का रोजगार अधिकार छीना गया है. (File Photo: PTI)
कर्नाटक सरकार का आरोप है कि मनरेगा योजना हटाकर ग्रामीणों का रोजगार अधिकार छीना गया है. (File Photo: PTI)

कर्नाटक कैबिनेट ने केंद्र सरकार की नई योजना ‘VB G, Ram G’ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है. कैबिनेट की बैठक में केंद्र की ओर से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा को वापस लेने और उसकी जगह नई योजना लागू करने के फैसले पर चर्चा हुई. इसके बाद सरकार ने इस योजना को अदालत और जनता की अदालत में चुनौती देने का निर्णय लिया.

'मजदूरों को मजबूर कर रहे ठेकेदार'

कर्नाटक सरकार का कहना है कि 73वें संविधान संशोधन के बाद देश में विकेंद्रीकरण (decentralisation) को मजबूत किया गया था, लेकिन ‘VB G, Ram G’ योजना उसी भावना के खिलाफ है. सरकार का आरोप है कि मनरेगा हटाकर केंद्र ने ग्रामीण लोगों से उनका रोजगार का अधिकार छीन लिया है. मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों के जरिए गांवों में विकास कार्य और परिसंपत्तियां बनाई जाती थीं, लेकिन अब मजदूरों को ठेकेदारों के जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग जैसी परियोजनाओं पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

सरकार ने कहा कि पहले पंचायतों को यह अधिकार था कि गांव में कौन से काम जरूरी हैं, लेकिन अब यह अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है. कर्नाटक सरकार इस कानून का राजनीतिक, कानूनी और जन स्तर पर कड़ा विरोध करेगी.

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'राज्यों से चर्चा के बाद लेने चाहिए थे फैसले'
 
मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि योजना में 125 दिन का रोजगार देने का दावा किया गया है, लेकिन यह व्यवहारिक नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि इसके लिए फंड कहां से आएगा, क्योंकि कुल खर्च का 40 प्रतिशत राज्य सरकार को उठाना होगा, जो उस पर भारी आर्थिक बोझ डालेगा. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले राज्यों से चर्चा के बाद लिए जाने चाहिए थे, लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा नहीं किया. पाटिल ने यह भी बताया कि यह योजना 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद लाई गई है.

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