कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. राज्य सरकार ने अगले 30 दिनों के अंदर जाति जनगणना के आंकड़े जारी करने की घोषणा की है. सरकार का ये फैसला न सिर्फ राज्य की राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी चुनावों और आरक्षण की नीतियों पर भी गहरा असर डाल सकता है.
बता दें कि कर्नाटक में जाति जनगणना की प्रक्रिया को लेकर काफी समय से खींचतान चल रही थी. 2025 में कांग्रेस हाईकमान के विशेष निर्देश के बाद यहां दोबारा जनगणना कराई गई.
पिछला डेटा पुराना होने और तकनीकी परेशानियों के चलते सरकार ने एक नए और पारदर्शी सर्वे का रास्ता चुना.
आरक्षण के समीकरणों में बदलाव
इन आंकड़ों के जारी होने का सबसे अहम पक्ष आरक्षण की सीमा में बदलाव करना है. इन आंकड़ों के आधार पर विभिन्न समुदायों की वर्तमान सामाजिक और आर्थिक स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा. इसके साथ ही संख्या के अनुपात में संसाधनों के वितरण पर ध्यान दिया जाएगा और मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की कमियों को दूर किया जाएगा.
केंद्र सरकार को भेजी जाएगी सिफारिश
राज्य सरकार इन आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद केंद्र सरकार को आरक्षण के ढांचे में बदलाव के लिए औपचारिक सिफारिशें भेजेगी.
राहुल गांधी भी कर चुके हैं जाति जनगणना की मांग
गौरतलब है कि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी देशभर में जाति जनगणना कराने की जोरदार मांग करते रहे हैं. उनका कहना है कि यह जनगणना एक तरह का "एक्स-रे" होगी, जिससे पता चलेगा कि अलग-अलग जातियों की आबादी और उनकी आर्थिक स्थिति क्या है. राहुल गांधी का दावा है कि देश की करीब 90% आबादी सिस्टम से बाहर है और उनके साथ बराबरी नहीं हो पा रही. वह सरकार से मांग कर रहे हैं कि जाति जनगणना कराई जाए, 50% आरक्षण की सीमा हटाई जाए.