सोने के भाव आसमान पर हैं. एक ज्वेलरी बनाने के लिए भी लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. ऐसे में सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगर भी हर एक ग्राम सोने का अच्छे से इस्तेमाल करते हैं और बारीकी से गोल्ड ज्वेलरी बनाते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं ये ज्वेलर्स आभूषण बनाने में जिस कपड़े का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें काम पूरा होने के बाद जला देते हैं. यहां तक कि जिस कपड़े से अपनी मशीन, टेबल साफ करते हैं, उस कपड़े को भी पहले संभालकर रखते हैं और बाद में उसे जला देते हैं. इतना ही नहीं, जहां सोने के आभूषण बनाए जाते हैं, वहां बिछाए कारपेट आदि को भी एक वक्त बाद जला दिया जाता है.
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कारीगर ऐसा क्यों करते हैं और क्यों इन कपड़ों को फेंकने के बजाय जला देते हैं. तो समझते हैं कि आखिर ज्वेलर्स ऐसा क्यों करते हैं और ऐसा करने की वजह क्या है...
दरअसल, इस बात का खुलासा सोने के कारीगरों ने खुद किया है. हाल ही में लल्लनटॉप की टीम ने जब सोने के आभूषण बनाने वाले कारीगरों से बात की तो उन्होंने बताया कि वो कारखाने में इस्तेमाल होने वाले कपड़े, कारपेट, चद्दर आदि को फेंकने की बजाय जला देते हैं.
क्या है इसकी वजह?
इस बारे में सोने के कारीगरों ने बताया कि जब वो सोने से कोई ज्वेलरी बनाते हैं तो बार-बार सोने को अलग-अलग शेप में लाना होता है. जैसे पहले सोने की एक रॉड या छड़ बनानी होती है, फिर उसका तार बनाना जाता है. इसके बाद अलग अलग डिजाइन बनाई जाती है. इन सभी प्रोसेस में कुछ-कुछ सोना मशीन से बुरादे के रुप में अलग हो जाता है. इन प्रोसेस में थोड़ा-थोड़ा सोना कम होता जाता है और सोना या तो कपड़े पर लग जाता है या फिर कारपेट, चद्दर आदि पर गिर जाता है.
ऐसे में कारीगर कुछ-कुछ देर में मशीन और उसके आस-पास की जगह को साफ करते हैं और जिन कपड़ों से इसे साफ करते हैं, उसे सुरक्षित रख लेते हैं. इसके बाद उन्हें जलाकर उसमें फंसा हुआ सोना निकाल लेते हैं. इसलिए ही उन कारपेट, चद्दर को भी जला दिया जाता है, जिस पर वो बैठते हैं.
इन कपड़ों से कितना सोना निकल जाता है?
जब कारीगरों से ये पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एक साल में करीब 10 ग्राम इन कपड़ों से निकल जाता है. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कारीगरों के खराब कपड़ों में भी कितना सोना होता है. ये ही कारण है कि सोने के कारीगर बार-बार मशीनों को साफ करते हैं.