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क्या आपके शहर में भी है सिविल लाइंस? ये इलाके हर जगह क्यों बने हैं

कई शहरों में सिविल लाइंस नाम का एक इलाका होता है, क्या आप जानते हैं आखिर ऐसा क्यों है. साथ ही जानते हैं कि कई शहरों में ऐसे ही एक जैसे इलाके हैं.

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सिविल लाइंस दिल्ली, जयपुर, प्रयागराज समेत कई शहरों में है. (Photo: Sonipat Police)
सिविल लाइंस दिल्ली, जयपुर, प्रयागराज समेत कई शहरों में है. (Photo: Sonipat Police)

कुछ दिनों से सिविल लाइंस चर्चा में है. खबरें आ रही हैं कि सरकार अब सिविल लाइंस जैसे नाम हटाने जा रही है. सिविल लाइंस समेत कई इलाके ऐसे हैं, जो भारत के हर प्रमुख शहरों में है. चाहे दिल्ली हो, इलाहाबाद, लखनऊ या जयपुर सिविल लाइंस हर बड़े शहर में मिल ही जाता है. ऐसे ही कई और इलाके भी हैं, जिनमें सदर, जिमखाना, कैंट आदि शामिल है. तो आज हम आपको शहर के इन इलाकों के बारे में बता रहे हैं, जो बहुत से शहरों में है और हर शहर में इनके बनाए जाने के पीछे क्या वजह है?

क्यों कई शहरों में है सिविल लाइंस?

दरअसल,  सिविल लाइंस की कहानी जुड़ी है ब्रिटिश राज से. जब अंग्रेज भारत में शासन कर रहे थे, तब उन्होंने अपने रहने के लिए शहरों के भीतर अलग और व्यवस्थित इलाके बनाए. इसे ही सिविल लाइंस कहा गया, जिसमें अंग्रेज अफसर, प्रशासनिक अधिकारी और न्यायिक अधिकारी रहा करते थे. 

हर बड़े शहर में कलेक्टर, जज और अफसरों के लिए अलग कॉलोनी बनाई गई. ये इलाके शहर का अहम हिस्सा होते थे. यहां बेहतर सफाई, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था होती थी. यानी सिविल लाइंस सिर्फ रहने की जगह नहीं थी, बल्कि सत्ता और प्रशासन का केंद्र भी थी. आज भले ही अंग्रेज चले गए हों, लेकिन सिविल लाइंस अभी शहरों में बरकरार हैं और आज ज्यादातर शहरों में ये पॉश एरिया माने जाते हैं. पुराने सरकारी बंगले आज भी मौजूद हैं. कई जगहों पर ये इलाके वीआईपी और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र हैं. ये हर शहर के प्रीमियम इलाके हैं. 

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क्या है इनके नाम की कहानी?

यहां प्रशासनिक अधिकारी लोग रहते थे, इस वजह से इसे सिविल लाइंस कहा गया. इसके अलावा एक तर्क ये दिया जाता है कि शहर में जहां सेना से जुड़े लोग रहते थे, उसे छावनी या कैंटोनमेंट कहा जाता था. इसके अलावा सिविलियंस यानी नॉल मिलिट्री वालों के लिए जो इलाका बना उसे सिविल लाइंस कहा गया. यहां आर्मी के लोग नहीं रहते थे. 

और कौन से इलाके हैं?

कैंट- ये इलाके सेना के लिए बनाए गए थे. ये शहर से अलग सेना के लिए बनाए गए इलाके थे और ये शहर के किनारे होते थे. ये सुरक्षित जगह होती थी और शहर से ज्यादा दूर नहीं होती थी. अब लगातार बढ़ रही बसावट की वजह कई कैंट इलाके शहर के बीच में शामिल हो गए हैं. हर कैंट इलाके में आपको हरियाली, कम भीड़, सख्त नियम देखने को मिलेगा. 

जिमखाना- कई शहरों में जिमखाना या क्लब एरिया होता है या इसके आस-पास की सड़क को जिमखाना रोड़ कहा जाता है. ये अंग्रेज अफसरों का सोशल लाइफ सेंटर होता था. यहां के आसपास के इलाकों को जिमखाना के नाम से जाना जाता है. 

स्टेशन रोड- अधिकतर शहरों में स्टेशन रोड भी है. जो सड़क स्टेशन के लिए जाती है, उसे स्टेशन रोड कहा जाता है. ये आपको अधिकतर शहरों में मिल जाएगी. 

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सदर- सदर वो इलाके हैं, जो व्यापार की वजह से फेमस हुए. यहां काफी दुकानें होती है और शहर में जिन इलाकों में ज्यादा बाजार होते थे, उन्हें सदर के नाम से जाना जाता था. आज भी कई शहरों में बाजार वाले इन इलाकों को सदर ही कहा जाता है. कई जगह ये कैंट के पास भी मिलता है, जहां सैनिकों के लिए बाजार विकसित हुआ. 

मॉल रोड- ये पहाड़ों में मिलती है. हर फेमस हिल स्टेशन में एक मॉल रोड होती है, जहां कई दुकानें होती है. ये वैसे अंग्रेजों के वक्त में अंग्रेजों के लिए टहलने और घूमने की जगह थी. ये सोशल लाइफ का केंद्र था और इसे मॉल रोड़ के नाम से जाना जाता है. 

गांधी नगर, शास्त्री नगर- ये नाम अंग्रेजों के बाद दिए गए हैं. महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के नाम से कई इलाकों के नाम रखे गए और हर शहर में उनके नाम से अलग-अलग चीजों के नाम हैं. इस वजह से अधिकतर शहरों में एमजी रोड, शास्त्री नगर, गांधी नगर आदि है. 

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