6 मई 1942 को अमेरिकी लेफ्टिनेंट जनरल जोनाथन वेनराइट ने फिलीपींस में तैनात सभी अमेरिकी सैनिकों के साथ जापानियों के सामने सरेंडर कर दिया था. बातान में जापानी विजय के बाद (जहां से जनरल वेनराइट भागने में सफल रहे थे) कोरेगिडोर द्वीप फिलीपींस की लड़ाई में मित्र देशों का अंतिम गढ़ बना रहा. 11500 सैनिकों ने जापान के सामने हथियार डाले थे.
कोरेगिडोर द्वीप पर लगातार जापान के तोपखाने की गोलाबारी और हवाई बमबारी ने अमेरिकी और फिलिपिनो सैनिकों को कमजोर कर दिया था. हालांकि मित्र देशों की सेनाएं द्वीप के उत्तरी तटों की ओर बढ़ते हुए कई जापानी नौकाओं को डुबोने में सफल रहीं थी, लेकिन वे हमलों को और अधिक देर तक रोक नहीं सकीं.
लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर हाल ही में प्रोमोट हुए और फिलीपींस में अमेरिकी बलों के कमांडर जनरल वेनराइट ने कोरेगिडोर द्वीप को जापानी जनरल होम्मा के सामने सरेंडर कर देने की पेशकश की, लेकिन होम्मा फिलीपींस में सभी अमेरिकी सैनिको से बिना शर्त हथियार डलवाना चाहते थे. वेनराइट के पास कोई विकल्प नहीं था. क्योंकि, सैनिकों की शारीरिक स्थिति हद से ज्यादा दयनीय हो चुकी थी. वे पहले ही 800 सैनिक खो चुके थे. इन हालातों को देखते हुए उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था. उन्होंने आधी रात को आत्मसमर्पण कर दिया.
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बचे हुए सभी 11,500 मित्र देशों के सैनिकों को मनीला के एक जेलखाने में भेज दिया गया. जनरल वेनराइट 1945 तक युद्धबंदी रहे. अपनी बुरी के प्रति सांत्वना के रूप में, वे 2 सितंबर, 1945 को यूएसएस मिसौरी पर आयोजित औपचारिक जापानी आत्मसमर्पण समारोह में उपस्थित थे. उन्हें राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन द्वारा मेडल ऑफ ऑनर से भी सम्मानित किया गया.