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घर में AC, गीजर, माइक्रोवेव हैं? ये काम करवा लें, नहीं तो कट जाएगा कनेक्शन

क्या आप जानते हैं घर में कब थ्री फेज कनेक्शन लगवाना अनिवार्य हो जाता है और अगर जरूरत के बाद भी कोई ऐसा ना करे तो क्या कार्रवाई हो सकती है.

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घर में ज्यादा AC हैं तो थ्री फेज कनेक्शन की जरुरत है. (Photo: Pexels)
घर में ज्यादा AC हैं तो थ्री फेज कनेक्शन की जरुरत है. (Photo: Pexels)

क्या आपके घर में भी 2-3 एसी है, 2-3 गीजर हैं... तो आपको अपने बिजली कनेक्शन में कुछ बदलाव करने होंगे. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो बिजली विभाग की ओर से आप पर कार्रवाई  भी की जा सकती है. दरअसल, जब घर में बिजली का लोड बढ़ जाता है तो बिजली कनेक्शन के फेज में बदलाव करवाना भी जरूरी होता है. जैसे ज्यादा खपत होने पर सिंगल फेज कनेक्शन को थ्री फेज कनेक्शन में बदलना होता है. ऐसे में जानते हैं कि कैसे थ्री फेज कनेक्शन में कंवर्ट करना होता है और कब ये करवाना जरुरी है. जानते हैं थ्री फेज कनेक्शन से जुड़ी खास बातें...  
 
कब जरूरी है थर्ड फेज कनेक्शन?

घर में 3-फेज बिजली कनेक्शन लगाना हर किसी के लिए जरूरी नहीं होता है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में यह जरूरी या अनिवार्य हो जाता है. अगर घर में कुल बिजली लोड ज्यादा है यानी 5–7 kW से ऊपर है तो आपको थ्री फेज कनेक्शन लगवाना होता है. आमतौर पर घरों में सिंगल फेज कनेक्शन ही होता है. जैसे आपके घर में 2-3 एसी, 2-3 गीजर, पानी की मोटर, माइक्रोवेव, इंडक्शन आदि चलते हैं तो आपके यहां खपत ज्यादा है. इस स्थिति में थ्री फेज लगवाना जरूरी हो जाता है. कई जगहों पर घर की साइज के आधार पर कनेक्शन निर्धारित किया जाता है.

इसके अलावा ज्यादा लोड होने पर अगर आपके घर में ट्रिपिंग होती है, एसी आदि चलाने पर लाइट चली जाती है या लोड कम हो जाता है, तो समझ जाइए कि आपको थ्री फेज कनेक्शन की जरुरत है. भारत में अलग-अलग राज्यों के डिस्कोम के नियमों के अनुसार, आम तौर पर 5 kW  से ज्यादा लोड होने पर थ्री फेज कनेक्शन लेना जरूरी हो जाता है. आप अपने राज्य के हिसाब से क्या पैरामीटर है, वो बिजली विभाग से जान सकते हैं.

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अगर कोई नहीं करवाए तो...

अगर किसी के घर में ज्यादा लोड है और फिर भी थ्री फेज कनेक्शन नहीं है तो डिस्कोम की ओर से कार्रवाई की जा सकती है. डिस्कोम की ओर से पेनाल्टी भी लगाई जा सकती है और कई गुना एक्स्ट्रा चार्ज लगाया जा सकता है.  इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के अनुसार, अगर कोई उपभोक्ता सेंक्शन्ड लोड से ज्यादा से ज्यादा बिजली इस्तेमाल करता है तो इसे बिजली का गलत इस्तेमाल माना जाता है. 
 

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