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बेशकीमती है होर्मुज की मिट्टी... इतनी खास है ये 'रेड सॉइल' कि देखते ही खाने लगते हैं लोग!

ईरान-इजरायल तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट का नाम चर्चा में रहता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके पास होर्मुज आईलैंड भी है, जहां की खास लाल मिट्टी खाने में इस्तेमाल होती है.

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होर्मुज आइलैंड के लोग 'गेलक' नाम की मिट्टी से चटनी बनाकर खाते हैं. ( Photo: Getty Images)
होर्मुज आइलैंड के लोग 'गेलक' नाम की मिट्टी से चटनी बनाकर खाते हैं. ( Photo: Getty Images)

ईरान-इजरायल तनाव के बीच आपने अक्सर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) का नाम सुना होगा. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से तेल की बड़ी सप्लाई गुजरती है. लेकिन, बहुत से लोग इसे 'होर्मुज आइलैंड' समझ लेते हैं, जबकि दोनों बिल्कुल अलग है. आपको बता दें कि होर्मुज आइलैंड पर एक खास लाल मिट्टी पाई जाती है, जिसे 'गेलक' कहा जाता है. वहां के लोगों का मानना है कि यह कोई साधारण मिट्टी नहीं है, बल्कि इसमें आयरन होता है, इसका रंग गहरा लाल होता है. 

स्थानीय लोगों के अनुसार, इसे खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है. होर्मुज आइलैंड की सबसे बड़ी खासियत है, इसकी रंग-बिरंगी मिट्टी. यहां लाल, पीली, हरी, नारंगी रंग की मिट्टी पाई जाती है. यह एक खास भूवैज्ञानिक प्रक्रिया से बनी है, लेकिन खाने लायक सिर्फ एक ही मिट्टी (गेलक) है. तो चलिए जानते हैं वहां के लोग क्यों इस मिट्टी को खाते हैं. 

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होर्मुज स्ट्रेट और होर्मुज आइलैंड में क्या अंतर है?
होर्मुज स्ट्रेट एक समुद्री रास्ता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है. यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल मार्ग है. यहां से रोज लाखों बैरल तेल गुजरता है. यह ईरान, ओमान और UAE के बीच स्थित है. इसलिए जब भी मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ता है, होर्मुज स्ट्रेट की चर्चा ज्यादा होती है.

अब जानते हैं होर्मुज आइलैंड क्या है?
होर्मुज आइलैंड ईरान के पास स्थित एक छोटा सा द्वीप है. यह ईरान के तट से करीब 8–10 किलोमीटर दूर है. यह अपने रंग-बिरंगे पहाड़ों और मिट्टी के लिए मशहूर है. इसे 'Rainbow Island' यानी 'इंद्रधनुषी द्वीप' भी कहा जाता है. यही वह जगह है जहां लोग खास तरह की मिट्टी खाते हैं.

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दुनिया में खाने-पीने की कई अनोखी चीजें हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी चटनी के बारे में सुना है जो मिट्टी से बनती हो? यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ईरान के एक खास इलाके में यह बिल्कुल सामान्य बात है. यहां लोग लाल मिट्टी से बनी एक खास तरह की चटनी खाते हैं, जिसे 'सोराग' कहा जाता है. यह अनोखी डिश ईरान के दक्षिण में स्थित होर्मुज द्वीप की है. यह एक छोटा सा द्वीप है, जो फारस की खाड़ी में स्थित है. यह द्वीप अपने रंग-बिरंगे पहाड़ों और मिट्टी के लिए जाना जाता है, इसलिए इसे इंद्रधनुषी द्वीप (Rainbow Island) भी कहा जाता है.

जानते हैं सोराग क्या है?
होर्मुज आइलैंड की मिट्टी पीली, हरी और लाल जैसे कई रंगों में मिलती है, लेकिन इनमें से सिर्फ एक खास तरह की लाल मिट्टी ही खाने के काम आती है, जिसे 'गेलक' कहा जाता है. सोराग एक तरह की चटनी है, जिसका स्वाद नमकीन और हल्का मछली जैसा होता है. इसका रंग गहरा लाल होता है, जो इसे और भी खास बनाता है. इस चटनी की सबसे खास बात यह है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली मुख्य चीज गेलक (लाल मिट्टी) है. यही मिट्टी इसे अलग स्वाद और रंग देती है.

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कैसे बनती है सोराग डिश?
सोराग बनाने का प्रोसेस थोड़ा लंबा और पारंपरिक होता है. इसे बनाने का तरीका कुछ इस तरह है.-

  • सबसे पहले ताजी मछली (जैसे सार्डिन) ली जाती है.
  • मछली को साफ करके उसमें नमक लगाया जाता है.
  • इसे मिट्टी के बर्तन में डालकर तेज धूप में करीब 2 हफ्ते रखा जाता है.
  • फिर मछली को निकालकर उस पर लाल मिट्टी (गेलक) लगाई जाती है.
  • इसमें खट्टे संतरे के छिलके और नींबू के पत्ते भी डाले जाते हैं.
  • इसके बाद इसे फिर से 2–3 हफ्ते धूप में रखा जाता है.
  • इस पूरे प्रोसेस के बाद तैयार होती है गाढ़ी, लाल रंग की सोराग चटनी.

सोराग कैसे खाई जाती है?
सोराग को आमतौर पर रोटी, चावल या समुद्री खाने के साथ खाया जाता है. लेकिन इसका सबसे लोकप्रिय कॉम्बिनेशन है “तोमशी”.

तोमशी क्या है?
तोमशी ( Tosmshi) एक पतली रोटी या क्रेप की तरह होती है. इसे मैदा, पानी और नमक से बनाया जाता है. इसे हाथ से तवे पर फैलाया जाता है. इसे आसान भाषा में “मुट्ठी जितनी पतली पैनकेक” भी कह सकते हैं. तवे पर फैलाने क बाद इसे दोनों तरफ से जल्दी-जल्दी पकाया जाता है, ताकि जल न जाए. फिर इसके साथ सोराग या दूसरी चटनियां लगाकर खाया जाता है. यह होर्मुज और आसपास के इलाकों में बहुत लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है. तोमशी सिर्फ होर्मुज द्वीप तक सीमित नहीं है, बल्कि फारस की खाड़ी के किनारे बसे कई शहरों के बाजारों में मिलने वाला एक लोकप्रिय स्ट्रीट फूड है, जहां हर तरफ मसालों और खाने की खुशबू फैली रहती है.

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क्या मिट्टी खाना सुरक्षित है?
यह सवाल सबसे जरूरी है. क्या मिट्टी खाना सही है? होर्मुज के लोग मानते हैं कि गेलक मिट्टी सेहत के लिए फायदेमंद होती है. उनका विश्वास है कि इसे थोड़ा-थोड़ा खाने से शरीर को ताकत मिलती है. कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार, इसमें आयरन (Iron) होता है. इससे शरीर में आयरन की कमी पूरी हो सकती है. लेकिन, अभी तक इसके सभी स्वास्थ्य लाभ पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुए हैं.

यह मिट्टी खास क्यों है?
होर्मुज द्वीप की मिट्टी अलग इसलिए है क्योंकि यह एक खास भूवैज्ञानिक प्रक्रिया से बनी है. जमीन के अंदर मौजूद नमक और खनिज ऊपर आ जाते हैं. इससे अलग-अलग रंग की मिट्टी बनती है. लाल मिट्टी (गेलक) में आयरन ज्यादा होता है, इसलिए इसका रंग गहरा लाल होता है. यही वजह है कि यह मिट्टी खाने के लिए इस्तेमाल की जाती है.

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क्या हर मिट्टी खाई जा सकती है?
नहीं, हर मिट्टी खाई जा सकती है. होर्मुज की ज्यादातर मिट्टी खाने लायक नहीं होती है. कुछ मिट्टी कड़वी और हानिकारक भी हो सकती है. सिर्फ 'गेलक' नाम की खास मिट्टी ही खाने योग्य मानी जाती है.बदलती परंपराएं और पर्यटन पहले यह चटनी और मिट्टी का उपयोग स्थानीय लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा था. लेकिन अब समय बदल रहा है. आजकल सोराग ज्यादा पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हो गई है. लोग खास तौर पर यहां आकर इस अनोखी डिश का स्वाद लेते हैं. आज के समय में उस द्वीप पर होटल, कैफे और गाड़ियों की संख्या बढ़ गई है. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है, लेकिन परंपराएं धीरे-धीरे कम हो रही हैं.

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संस्कृति और परंपरा में मिट्टी का महत्व
होर्मुज में यह मिट्टी सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि संस्कृति का भी हिस्सा है. नववर्ष (नवरोज) पर लोग इसे माथे पर लगाते हैं. कई धार्मिक मौकों पर इस मिट्टी को कपड़ों पर लगाया जाता है. पेड़ों पर भी इसे लगाया जाता है, ताकि कीड़ों से बचाव हो सके. यानी यह मिट्टी यहां के लोगों के जीवन का अहम हिस्सा है.

खनन पर रोक क्यों लगी?
एक समय था जब इस मिट्टी का बड़े पैमाने पर निर्यात होता था. इस मिट्टी को पेंट और रंग बनाने में इस्तेमाल होता था. इससे कुछ लोगों को ही फायदा होता था. ज्यादा खनन से पर्यावरण को नुकसान होने लगा. इसलिए सरकार ने इस पर रोक लगा दी है. अब लोग जरूरत के अनुसार खुद मिट्टी इकट्ठा करते हैं और पर्यावरण की रक्षा की जा रही है. सोराग सिर्फ एक चटनी नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और प्रकृति का अनोखा मेल है. यह मिट्टी से बनने वाली दुनिया की दुर्लभ डिश है. इसमें स्थानीय जीवन, इतिहास और भूगोल की झलक मिलती है. हालांकि यह हर किसी के लिए सामान्य भोजन नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि इंसान अपने आसपास की चीजों का कैसे अनोखा उपयोग कर सकता है. कुल मिलाकर, होर्मुज द्वीप की यह कहानी हमें सिखाती है कि दुनिया में खाने की परंपराएं कितनी अलग और दिलचस्प हो सकती हैं- कभी-कभी तो मिट्टी भी स्वाद का हिस्सा बन जाती है.

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