बुंदेलखंड का पन्ना जिला हीरों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यहां एक और अनमोल खजाना छुपा हुआ है. यह खजाना है ‘शजर पत्थर’ जो केन नदी से निकलता है. यह पत्थर इतना खास है कि इसकी कीमत लाखों रुपये तक हो सकती है. शजर पत्थर को खास बनाने वाली बात इसकी बनावट है. यह पत्थर लाखों साल पुराने जीवाश्मों से बना होता है. जब इसे काटा जाता है, तो इसके अंदर पत्तियों, पेड़ों या शैवाल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं. ये आकृतियां बिल्कुल किसी पेंटिंग की तरह लगती हैं. इसी वजह से इसे नेचर की पेंटिंग भी कहा जाता है. इस पत्थर से अलग-अलग तरह के गहने बनाए जाते हैं, जैसे अंगूठी, हार और कान की बालियां. इन गहनों की देश ही नहीं, विदेशों में भी काफी मांग है. यही वजह है कि शजर पत्थर को एक कीमती रत्न माना जाता है.
गहनों में बदलकर बनता है लाखों का रत्न
केन नदी में यह पत्थर हर जगह नहीं मिलता. यह खास तौर पर बांदा और पन्ना जिले के बॉर्डर के पास एक सीमित इलाके में पाया जाता है. यहां गोताखोर नदी की गहराई में जाकर इन पत्थरों को ढूंढते हैं. हजारों सामान्य पत्थरों के बीच से शजर पत्थर को पहचानना आसान नहीं होता. इसके लिए अनुभव और नजर की जरूरत होती है. इस क्षेत्र की खास बात यह है कि एक तरफ पन्ना में हीरे मिलते हैं, तो वहीं पास में बहने वाली केन नदी में शजर पत्थर मिलता है. यह दिखाता है कि यह इलाका भूगर्भीय रूप से बहुत खास है. वैज्ञानिकों का मानना है कि लाखों साल पहले यहां जमीन के अंदर बड़े बदलाव हुए होंगे, जिसके कारण ऐसे अनोखे पत्थर बने.
देश-विदेश में बढ़ी पहचान
शजर पत्थर को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है. इसे ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना में शामिल किया गया है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पत्थर से बना एक गिफ्ट सऊदी अरब के प्रिंस को दिया था, तब इसकी चर्चा और बढ़ गई. इसके अलावा G-20 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी इसे प्रदर्शित किया गया, जिससे इसकी पहचान दुनिया भर में फैली. बांदा जिले में शजर पत्थर को तराशने और उससे गहने बनाने का काम होता है. यहां के कारीगर पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं.
हालांकि, आज शजर पत्थर पर खतरा भी मंडरा रहा है. केन नदी में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. मशीनों से रेत निकालने के कारण नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है. इससे शजर पत्थर बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है.स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह अनमोल पत्थर खत्म भी हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि सरकार और लोग मिलकर इसे बचाने की कोशिश करें. कुल मिलाकर, शजर पत्थर बुंदेलखंड की एक अनोखी पहचान है. यह सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि प्रकृति का बनाया हुआ एक दुर्लभ खजाना है. अगर इसे सही तरीके से संभाला जाए, तो यह भारत का नाम दुनिया में और ऊंचा कर सकता है.