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लड़की के बदले लड़की... क्या है राजस्थान में शादी की ये आटा-साटा प्रथा?

राजस्थान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा को लेकर कहा कि बेटियों को पारिवारिकसौदे का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता. ऐसे में जानते हैं कि ये प्रथा है क्या?

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राजस्थान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा को सौदेबाजी बताया है. (Photo: Pexels)
राजस्थान हाईकोर्ट ने आटा-साटा प्रथा को सौदेबाजी बताया है. (Photo: Pexels)

राजस्थान हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में आटा-साटा प्रथा का जिक्र किया है. कोर्ट ने इसके खिलाफ कहा है कि ये पारिवारिक दबाव और सौदेबाजी है. कोर्ट ने 2016 के एक तलाक मामले  में महिला के पक्ष में फैसला सुनाया है, जो शादी आटा-साटा प्रथा के तहत हुई थी. अब सवाल है कि आखिर ये आटा-साटा प्रथा क्या है और किन कारणों की वजह से इसका विरोध किया जाता रहा है. तो समझते हैं इस प्रथा में कैसे शादियां करवाई जा रही हैं और क्यों इसे सौदेबाजी कहा जाता है... 

हाईकोर्ट ने कहा है कि बेटियों को किसी पारिवारिक समझौते, लेन-देन या सौदे का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता. कोर्ट ने ऐसी प्रथाओं को संविधान, महिला सम्मान और बाल अधिकारों के खिलाफ बताया. जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने एक तलाक मामले की सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी की. मामला उस महिला से जुड़ा था, जिसने फैमिली कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. फैमिली कोर्ट ने पहले महिला की तलाक याचिका खारिज कर दी थी और माना था कि वह पारिवारिक विवाद के चलते अपनी मर्जी से ससुराल छोड़कर गई थी.

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि समाज में कई महिलाएं सामाजिक दबाव, आर्थिक मजबूरी और बच्चों के भविष्य की चिंता के कारण सालों तक अत्याचार सहने को मजबूर रहती हैं. इसके बाद कोर्ट ने महिला को राहत देते हुए तलाक मंजूर कर लिया.

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है क्या आटा-साटा प्रथा?

इस प्रथा की कहानी इसके नाम में ही है. दरअसल, आटा-साटा मतलब होता है अदला-बदली. दरअसल, राजस्थान में लड़कियों की संख्या कम होने की वजह से लड़कों की शादी में काफी मुश्किलें आती हैं. ऐसे में जिन घरों में लड़का और लड़की दोनों कुवारें होते हैं तो वो दूसरे परिवार से ये सौदा करते हैं कि हम अपने घर की लड़की की शादी उस स्थिति में करेंगे जब वो अपने परिवार की लड़की की शादी लड़की के भाई से करेंगे. इसका मतलब ये हुआ है कि वो अपने घर की लड़की किसी परिवार में देते हैं तो वहां से एक लड़की अपने घर बहू बनाकर लाते हैं. 

यह एक ऐसी प्रथा है जहां शादियों के नाम पर बेटियां बदली जाती हैं. दोनों परिवार एक साथ अपने बेटे और बेटी की शादी करते हैं. इस तरह की शादियों में अक्सर एक ही टाइम पर शादी की जाती है या फिर आगे शादी कर देने का वादा कर दिया जाता है. लेकिन, कई बार इस प्रथा में नाबालिग लड़कियों की भी शादी कर दी जाती है या फिर पहले ही शादी फिक्स कर दी जाती है कि आगे उस लड़की की शादी उस परिवार में ही होगी. ये एक बाल विवाह की तरह ही है. 

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कई परिस्थितियों में शादी तो कर दी जाती है, लेकिन ससुराल नहीं भेजा जाता है और बाद में मुकलावा नाम की एक रस्म करने के बाद लड़की को ससुराल भेजा जाता है. कई बार बाद में परिवार वादे से मुकर जाते हैं या लड़का-लड़की आपस में शादी को राजी नहीं होते हैं तो ये विवाद बन जाता है. इस वजह से जिस लड़की की पहले शादी कर दी गई थी, उसे भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. 

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