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ना फिक्स क्षेत्र, फिर कहां विकास करवाते हैं राज्यसभा MP? इतनी होती है सैलरी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद बनना चाहते हैं. ऐसे में जानते हैं आखिर राज्यसभा सांसद के काम का क्या पैटर्न होता है?

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नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने वाले हैं. (Photo: PTI)
नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने वाले हैं. (Photo: PTI)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाने वाले हैं. नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट में जानकारी दी है कि वो राज्यसभा चुनाव में संसद के उच्च सदन के सदस्य बनना चाहते हैं. लेकिन, नीतीश कुमार का कहना है कि राज्यसभा सांसद बनने के बाद भी वे बिहार के विकास के संकल्प पर कायम रहेंगे. ऐसे में जानते हैं कि आखिर एक राज्यसभा सांसद का क्या काम होता है, राज्यसभा सांसद की लोकसभा एमपी की तरह कोई सीट भी नहीं होती है, फिर वो फंड कहां खर्च करते हैं. साथ ही जानते हैं कि उनकी कितनी सैलरी और भत्ते होते हैं. 

राज्यसभा सांसद कैसे बनते हैं?

जिस तरह लोकसभा सांसद के लिए एक बार चुनाव होते हैं और एक बार में सभी सांसद चुन लिए जाते हैं, वैसी व्यवस्था राज्यसभा  सांसदों के लिए चयन के लिए नहीं होती है. राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव होते रहते हैं और कुछ कुछ सीटों पर चुनाव के करवाकर उम्मीदवारों का चयन होता है. राज्यसभा चुनाव में वोट आम जनता नहीं, बल्कि विधायक करते हैं और विधान परिषद के सदस्य हिस्सा नहीं लेते हैं. जितनी सीटों पर चुनाव हो रहा है, उसमें एक जोड़कर राज्य की कुल विधानसभा सीटों में भाग दिया जाता है और फिर एक जोड़ गिया जाता है. जो संख्या आती है, उतने वोटों की जरुरत सांसद चुनाव जीतने के लिए होती है. 

जैसे अगर उत्तर प्रदेश में 11 राज्यसभा सीटों के लिए वोटिंग होनी है तो इसमें 1 जोड़ा तो हो गया 12. यूपी में विधानसभा सीटों की संख्या 403 है. अब 12 को 403 से भाग दिया तो संख्या आई 33.583333. जिसको 33 माना जाएगा. अब 33 में 1 को जोड़ा तो आया 34. यानी, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 34 वोटों की जरूरत होगी. फिर पसंद के आधार पर नंबरिंग के जरिए वोटिंग होती है. 

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लोकसभा सांसद की तरह सीट नहीं होती?

लोकसभा सांसदों की अपनी एक सीट होती है यानी संसदीय क्षेत्र. राज्यसभा चुनावों के लिए कोई संसदीय क्षेत्र नहीं होता है. अगर राजस्थान से 10 राज्यसभा सांसद बनने हैं तो वो किसी एक तय सीट के सांसद नहीं होंगे, जबकि वो राज्य को रिप्रजेंट करेंगे. 

कहां करवाते हैं विकास कार्य?

अब सवाल है जब कोई फिक्स सीट नहीं होती है, तो ये सांसद अपने फंड का इस्तेमाल कहां और कैसे करते हैं. राज्यसभा किसी सीट के नहीं, बल्कि राज्य के होते हैं. ऐसे में वो अपने विकास फंड का इस्तेमाल राज्य में कहीं भी कर सकते हैं. उन्हें भी लोकसभा सांसदों की तरह एक फंड मिलता है, जिसका इस्तेमाल वो राज्य में कहीं भी कर सकते हैं. राज्यसभा सांसद अन्य सांसदों की तरह कानून बनाने में अहम योगदान देते हैं और सिर्फ वित्त विधेयक में उनकी भूमिका नहीं होती है और इन विधेयक की राज्यसभा में कोई चर्चा नहीं होती है. 

कितनी मिलती है सैलरी?

पिछले साल संसदीय कार्य मंत्रालय की ओर से जारी एक राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों का वेतन 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.24 लाख रुपये प्रति महीने कर दिया गया है, जबकि दैनिक भत्ता 2,000 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये हो गया है. इसके अलावा पूर्व सांसदों को दी जाने वाली पेंशन भी 25,000 रुपये से बढ़ाकर 31,000 रुपये प्रति महीने कर दी गई है. पांच साल से अधिक की सेवा के प्रत्येक साल के लिए अतिरिक्त पेंशन को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है. 

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