मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाग से देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. सप्लाई चेन प्रभावित होने से गैस की किल्लत देखने को मिल रही है. अब सोशल मीडिया से लेकर गली मोहल्लों में एलपीजी की काफी बात हो रही है. ऐसे में आप ये तो जान गए हैं कि घर में आने वाले सिलेंडर में एलपीजी गैस होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं पाइपलाइन से घरों में जो गैस आती है, वो पीएनजी होती है. तो जानते हैं घरों में आने वाली पीएनजी और एलपीजी गैस में फर्क क्या है....
दरअसल, साइंस के हिसाब से PNG और LPG पूरी तरह अलग गैसें हैं. दोनों की रासायनिक संरचना, घनत्व, स्टोरेज और सप्लाई का तरीका अलग होता है. यही वजह है कि एक गैस पाइपलाइन से घर तक पहुंचती है, जबकि दूसरी सिलेंडर में भरकर घरों तक भेजी जाती है.
क्या है एलपीजी गैस?
लाखों घरों में खाना पकाने की शुरुआत लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) से होती है. एलपीजी का उत्पादन कच्चे तेल के शोधन और प्राकृतिक गैस की प्रोसेसिंग से होता है. इसमें मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसें होती हैं, जिन्हें तरल रूप में कंप्रेस्ड करके सिलेंडर में स्टोर किया जाता है. ये इसलिए ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि ये सिलेंडर में होती है और इसे आसानी से ले जाया जा सकता है. एलपीजी पेट्रोलियम रिफाइनरी से निकलने वाली गैस है.
पीएनजी कितनी अलग है?
ये वो गैस है, जो सिलेंडर से नहीं बल्कि पाइपलाइन के जरिए घरों में आती है. एलपीजी सिलेंडर में आती है और भारी होने के कारण रिसाव पर फर्श पर जमा हो सकती है. वहीं, पीएनजी पाइपलाइन के जरिए आती है, हवा से हल्की होने के कारण रिसाव पर तुरंत हवा में मिल जाती है, जिससे यह अधिक सुरक्षित है. PNG का मतलब है प्राकृतिक गैस को पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे घरों, रेस्तरां और उद्योगों तक पहुंचाना.
यह सिस्टम पानी के कनेक्शन की तरह काम करता है. गैस भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से प्रवाहित होती है, और कस्टमर अपने यूज के हिसाब से अपना भुगतान करते हैं. अब इसका लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे पानी की तरह घर तक गैस पहुंच रही है.