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लारक आईलैंड...यहां टोल प्लाजा बना रहा ईरान! जहां से कंट्रोल होगा पूरा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

Larak Island Story: ईरान अब लारक द्वीप के जरिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल कर रहा है. तो जानते हैं ये द्वीप कहां है और कैसे इसे टोल प्लाजा के रुप में ईरान इस्तेमाल कर रहा है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान अब लारक द्वीप से कंट्रोल कर रहा है. (Photo: Representational/Pexels
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान अब लारक द्वीप से कंट्रोल कर रहा है. (Photo: Representational/Pexels

ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह अपने कंट्रोल में लेने की ओर बढ़ रहा है. अब ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेने की व्यवस्था भी शुरू करने में है और इसके लिए काम भी शुरू कर दिया है. ईरान ने अब होर्मुज के लारक द्वीप को सहारा बनाया है, जिसके जरिए वो होर्मुज के शिप ट्रैफिक को कंट्रोल कर रहा है. ये वो ही द्वीप है, जिसे होर्मुज का 'टोल प्लाजा' भी कहा जा सकता है. ऐसे में जानते हैं कि ईरान के लिए ये द्वीप किस तरह अहम है और टोल व्यवस्था में ईरान इसका किस तरह इस्तेमाल कर सकता है... 

कहां है ये द्वीप?

सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर ये द्वीप है कहां. ये द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में ही है और ईरान के ज्यादा करीब है. जब आप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते को देखते हैं तो आप समझ जाएंगे कि ये इस रास्ते में है और ईरान से करीब है. लेकिन, इस द्वीप और ईरान की सीमा के बीच भी एक जहाज का संकरा रास्ता है, जो ईरान के लिए अहम साबित होने वाला है. 

ईरान के लिए लारक द्वीप अब सिर्फ एक भू-भाग नहीं है बल्कि ईरान का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल पॉइंट बनने जा रहा है. इसके जरिए ही जहाजों का एंट्री सिस्टम लागू किया जाएगा. अब ईरान इस छोटे से द्वीप के जरिए दुनिया की सबसे अहम ऑयल शिपिंग लेन को ओपन रूट से कंट्रोल्ड गेटवे में बदलने जा रहा है. इसके जरिए ही अब ईरान कंट्रोल्ड कॉरिडोर बना रहा है, जो लारक द्वीप के नॉर्थ में है और ईरान के करीब से गुजरता है. 

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लारक द्वीप

अभी ईरान इस संकरे रास्ते को जहाजों के आने-जाने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. अभी की स्थिति में देखें तो ईरान ने होर्मुज से होकर गुजरने वाले अधिकांश जहाजों को रोककर, लारक द्वीप के उत्तर में एक तरह से सुरक्षित समुद्री परिवहन गलियारा स्थापित कर लिया है. 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज से ट्रैफिक में 90% की गिरावट आई है. अभी चुनिंदा जहाजों को लारक द्वीप के पास एक संकरे रास्ते से होकर भेजा जा रहा है, जो उसके बंदर अब्बास बंदरगाह शहर के तट से दूर है, आईआरजीसी और बंदरगाह अधिकारी हर जहाज की  जांच करने के बाद गुजरने दे रहे हैं. 

कहा जा रहा है कि एक तरह से ईरान के आईआरजीसी ने इस द्वीप के जहारे होर्मुज में 'टोल बूथ' प्लाजा स्थापित कर दिया है. सीएनबीसी की एक रिपोर्ट में शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के आधार पर कहा गया है कि पिछले तीन हफ्तों में लारक द्वीप के उत्तर में स्थित संकरे जलमार्ग से होकर जहाज गुजरे हैं और बताया जा रहा है कि अभी तक करीब 57 जहाज गुजरे हैं. भारत आया जहाज भी इसी रास्ते से भारत आया है. 

विंडवर्ड के अनुसार, लारक द्वीप के उत्तर में इस रास्ते पर कई जहाज भी देखे गए हैं, जहां से ईरान कुछ देशों के जहाजों को जाने दे रहा है. अब जब ईरान ने टोल व्यवस्था के लिए विधेयक पारित कर दिया है तो जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों, ऊर्जा परिवहन और खाद्य आपूर्ति पर शुल्क लगाया जाएगा. 

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कैसे हो रही है चैकिंग?

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की आईआरजीसी इस पूरे सिस्टम को ऑपरेट कर रही है. लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार पहले जहाज ऑपरेटर पहले आईआरजीसी से जुड़े इंटरमीडियरी को डिटेल्स देते हैं. फिर एक क्लीयरेंस कोड जारीकिया जाता है और जब जहाज ईरानी जलक्षेत्र में पहुंचता है तो ये कोड देना होता है. इसके बाद आईआरजीसी उसे एक्सकॉर्ट करती है और जिन जहाजों को मंजूरी नहीं मिलती, उन्हें वापस लौटा दिया जाता है. 

क्या ईरान को टोल वसूलने का अधिकार है?

सीएनबीसी ने कुछ एक्सपर्ट के हवाले से बताया है  कि इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त समुद्री परिवहन मार्ग पर ईरान का नियंत्रण संयुक्त राष्ट्र की समुद्री कानून संधि का उल्लंघन करता है और पड़ोसी देशों से समर्थन मिलने की संभावना नहीं है. हांगकांग विश्वविद्यालय में कानून की प्रोफेसर शाहला अली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकमुश्त पारगमन टोल लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.
 

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