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ब्रह्मांड की रचना कब हुई... महान वैज्ञानिक केप्लर ने बताई थी ये तारीख!

आज के दिन ही ब्रह्मांड की रचना हुई थी? ऐसा महान वैज्ञानिक जोहान्स केप्लर का मानना था. उन्होंने अपनी गणना के हिसाब से यह ब्रह्मांड की उत्पत्ति की ये तारीख तय की थी.

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केप्लर के मुताबिक 27 अप्रैल को हुई थी ब्रह्मांड की उत्पत्ति (Photo - Pexels)
केप्लर के मुताबिक 27 अप्रैल को हुई थी ब्रह्मांड की उत्पत्ति (Photo - Pexels)

आधुनिक विज्ञान के संस्थापक माने जाने वाले जर्मन गणितज्ञ और खगोलशास्त्री जोहान्स केप्लर के अनुसार, 27 अप्रैल, 4977 ईसा पूर्व को ब्रह्मांड की रचना हुई थी. केप्लर ग्रहों की गति की व्याख्या करने वाले अपने सिद्धांतों के लिए जाने जाते  हैं. कैप्लर ग्रहों की गति की व्याख्या कर इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि 27 अप्रैल को ही ब्रह्मांड की रचना हुई थी. उन्होंने 17वीं शताब्दी में यह सिद्धांत दिया था. सैकड़ों वर्षों बाद 19वीं शताब्दी में केप्लर की यह गणना गलत सबित हुई.

केप्लर का जन्म 27 दिसंबर, 1571 को जर्मनी के वेल डेर स्टैड में हुआ था.   विश्वविद्यालय के छात्र के रूप में, उन्होंने पोलिश खगोलशास्त्री निकोलस कोपरनिकस के ग्रहों की व्यवस्था संबंधी सिद्धांतों का अध्ययन किया. कोपरनिकस (1473-1543) का मानना ​​था कि सौर मंडल का केंद्र पृथ्वी नहीं बल्कि सूर्य है, यह सिद्धांत उस समय के प्रचलित मत के विपरीत था जिसमें सूर्य को पृथ्वी के चारों ओर घूमने वाला माना जाता था.

केप्लर अपने समय के महान खगोलीय वैज्ञानिक थे. उन्होंने अपनी गणना के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय का पता लगाया था. उन्होंने बाकायदा ब्रह्मांड की रचना की एक तारीख भी तय कर दी थी. उनकी गणना के मुताबिक, 27 अप्रैल, 4977 ईसा पूर्व को ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी. हालांकि,  ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में केप्लर की गणना के संदर्भ में, 20वीं शताब्दी के वैज्ञानिकों ने बिग बैंग सिद्धांत विकसित किया , जिससे पता चला कि उनकी गणना लगभग 13.7 अरब वर्ष गलत थी.

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सन् 1600 में, केप्लर प्राग गए और वहां उन्होंने डेनिश खगोलशास्त्री टाइको ब्राहे के साथ काम करना शुरू किया, जो पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट रुडोल्फ द्वितीय के शाही गणितज्ञ थे. केप्लर की मुख्य परियोजना मंगल ग्रह की कक्षा का अध्ययन करना था. अगले वर्ष जब ब्राहे का निधन हो गया, तो केप्लर ने उनका कार्यभार संभाला और उन्हें ब्राहे का खगोल विज्ञान संबंधी विशाल संग्रह विरासत में मिला, जिसे उन्होंने बड़ी मेहनत से नंगी आंखों से देखा था.

अगले दशक में, केप्लर ने इतालवी भौतिक विज्ञानी और खगोलशास्त्री गैलीलियो गैलीली (1564-1642) के कार्यों के बारे में जाना, जिन्होंने एक दूरबीन का आविष्कार किया था, जिसकी सहायता से उन्होंने चंद्रमा के पर्वतों और गड्ढों, बृहस्पति के चार सबसे बड़े उपग्रहों और शुक्र के चरणों आदि की खोज की थी. केप्लर ने गैलीलियो के साथ पत्राचार किया और उनसे एक दूरबीन प्राप्त किया और उसके डिज़ाइन में सुधार किया.

1609 में, केप्लर ने ग्रहों की गति के अपने तीन नियमों में से पहले दो नियम प्रकाशित किए, जिनमें कहा गया था कि ग्रह सूर्य के चारों ओर वृत्ताकार नहीं बल्कि दीर्घवृत्ताकार पथ में घूमते हैं (जैसा कि उस समय तक व्यापक रूप से माना जाता था) और सूर्य के निकट आने पर ग्रहों की गति बढ़ जाती है और सूर्य से दूर जाने पर धीमी हो जाती है.

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 1619 में, उन्होंने अपना तीसरा नियम प्रतिपादित किया, जिसमें गणितीय सिद्धांतों का उपयोग करके सूर्य की परिक्रमा करने में ग्रह द्वारा लिए गए समय और सूर्य से ग्रह की औसत दूरी के बीच संबंध स्थापित किया गया था.

केप्लर के शोध को उनके जीवनकाल में व्यापक मान्यता मिलने में समय लगा, लेकिन बाद में इसने अंग्रेज गणितज्ञ सर आइज़ैक न्यूटन (1643-1727) और उनके गुरुत्वाकर्षण के नियम को बहुत प्रभावित किया. इसके अलावा, केप्लर ने प्रकाशिकी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किया, जिसमें मानव आंख की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन करना और गणित शामिल है.  उनका निधन 15 नवंबर, 1630 को जर्मनी के रेगेन्सबर्ग में हुआ.

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