पंजाब की लस्सी, फुलकारी, मक्के की रोटी के साथ वहां के घरों में लगी पानी की टंकियां भी काफी फेमस हैं. खासकर जब आप जालंधर से गुजरते हैं तो घरों की छतों पर अजीब लेकिन दिलचस्प नजारे दिख जाएंगे. कहीं छत पर हवाई जहाज खड़ा दिखाई देगा, कहीं विशाल शेर, कहीं ट्रैक्टर, तो कहीं फुटबॉल या पानी का जहाज. पहली नजर में ये किसी थीम पार्क का हिस्सा लगते हैं, लेकिन असल में ये हैं पानी की टंकियां.
जालंधर में डिजाइनदार वॉटर टैंक सिर्फ पानी स्टोर करने का साधन नहीं, बल्कि लोगों की पहचान, स्टेटस और जिंदगी की कहानी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में जानते हैं कि आखिर जालंधर में पानी की ऐसी डिजाइनदार टंकियां क्यों बनाई जाती है और अब दूसरे राज्यों में भी ऐसा होने लगा है.
कैसे शुरू हुआ ये अनोखा ट्रेंड?
जालंधर में इस अनोखे ट्रेंड की शुरुआत 1990 के दशक में मानी जाती है. बताया जाता है कि एक रिटायर्ड फौजी ने अपने घर की छत पर हवाई जहाज जैसी पानी की टंकी बनवाने का ऑर्डर दिया था. उस समय यह आइडिया इतना अलग था कि लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं. इसके बाद धीरे-धीरे दूसरे लोग भी अपनी पसंद और शौक के हिसाब से अलग-अलग डिजाइन की टंकियां बनवाने लगे.
आज जालंधर की पहचान ही इन डिजाइनदार टंकियों से होने लगी है.
हर टंकी के पीछे होती है एक कहानी
पंजाब में लोग सिर्फ दिखावे के लिए ऐसी टंकियां नहीं बनवाते. कई बार ये उनकी जिंदगी, पेशे या सपनों का प्रतीक होती हैं. किसी का बेटा एयरफोर्स में है, तो घर की छत पर एयरप्लेन बनवा दिया.
कोई विदेश में रहता है, तो जहाज या विदेशी कार जैसी टंकी बनवा ली. किसान परिवार ट्रैक्टर या ट्रॉली के आकार की टंकी बनवाते हैं. खेल प्रेमी फुटबॉल या क्रिकेट बॉल डिजाइन चुनते हैं. यानी छत पर लगी टंकी घर के मालिक की आइडेंटिटी बन जाती है. ऐसे में अब लोग अलग-अलग तरह की क्रिएटिव टंकियां बनवाते हैं.
हिस्ट्री की एक डॉक्यूमेंट्री के अनुसार, माना जाता है कि वहां के आर्टिटेक्ट बलविंदर कौर और उनके पिता रामलुभाया कौल ने इसकी शुरूआत की और अब वो अलग अलग डिजाइन की टंकियों के लिए जाने जाते हैं. उन्हें ही सबसे पहले 1995 में फुटबॉल की टंकी बनाने का ऑर्डर मिला था. फिर उन्होंने दो टुकड़ों में फुटबॉल बनाकर वो खास टंकी बनाई थी.
दिलचस्प बात ये है कि इन टंकियों को बनाने वाले कारीगर अक्सर हाई-टेक मशीनों या सॉफ्टवेयर पर निर्भर नहीं होते. वे अपने अनुभव, हाथ की कला और मानसिक गणना के जरिए पहले लोहे का ढांचा तैयार करते हैं, फिर उसे सीमेंट और कंक्रीट से आकार देते हैं. एक साधारण पानी की टंकी जहां कुछ दिनों में बन जाती है, वहीं एयरप्लेन या जानवर जैसी डिजाइन तैयार करने में कई हफ्ते लग सकते हैं.