ईरान जंग की वजह से तेल संकट गहराने की आशंका बढ़ती जा रही है. अब अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट दी है और रूस भी तेल भेजने को तैयार है. ऐसे में भारत में तेल संकट होने के आसार कम हैं. बता दें कि भारत के कच्चे तेल के आयात का करीब आधा हिस्सा और एलएनजी, एलपीजी शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जो अब जंग की वजह से बंद है. ऐसे में ईरान से आने वाले तेल की चर्चा हो रही है, तो जानते हैं कि ईरान से तेल आता कैसे है और यहां आने में कितना वक्त लगता है...
बता दें कि मिडिल ईस्ट के साथ भारत के आर्थिक संबंध बहुत गहरे हैं. बीबीसी की एक रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के आधार पर बताया गया है कि यह क्षेत्र भारत के निर्यात का 17% हिस्सा है, इसके कच्चे तेल का 55% आपूर्ति करता है. कच्चे तेल के आयात का करीब आधा हिस्सा 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से होकर जलडमरूमध्य से गुजरता है.
वहीं, भारत अपनी खपत का 80-85% एलपीजी आयात करता है. भारत ने पिछले साल लगभग 25 मिलियन टन एलएनजी का आयात किया, जिसमें से लगभग 14 मिलियन टन होर्मुज के माध्यम से आयात किया गया. कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास एलपीजी का कोई महत्वपूर्ण रणनीतिक भंडार नहीं है और भंडारण क्षमता भी सीमित है.
ईरान से कैसे आता है तेल?
अगर तेल की बात करें तो ईरान से तेल क्रूड कैरियर के जरिए समुद्र के रास्ते से कच्चा तेल भारत आता है. क्रूड ऑयल बड़े क्रूड कैरियर में भरकर ईरान से भेजा जाता है, इसके बाद वो होर्मुज़ स्ट्रेट के जरिए अरब सागर से भारत आता है. भारत में ये गुजरात, विशाखापट्टनम या चेन्नई आदि जगहों पर आता है. ईरान की ओर से VLCC यानी Very Large Crude Carrier के जरिए तेल भेजता है, जिसमें एक बार में करीब 19–22 लाख बैरल कच्चा तेल आ सकता है.
लेकिन, भारत के कई पोर्ट पर VLCC नहीं आ पाते हैं यानी गहराई कम होने की वजह से वो बड़े जहाज नहीं आ पाते हैं, जिनमें एक साथ काफी तेल आता है. इस स्थिति में उन जहाजों को कुछ दूर पहले रोका जाता है और वहां से दूसरे छोटे जहाजों में ऑयल शिफ्ट किया जाता है और फिर वो पोर्ट तक पहुंचता है.
अब बात करते हैं कि ये तेल कितने दिन में भारत पहुंचता है. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जब तेल ईरान या खाड़ी देशों से भारत में आता है तो ये 5 से 7 दिन में भारत पहुंच जाता है. लेकिन, अगर ये तेल रूस से आता है तो इसे आने में 25-45 दिन तक लग सकते हैं.
इंश्योरेंस भी होता है
जब भी तेल ट्रांसफर होता है तो उसका इंश्योरेंस भी होता है. लेकिन, कुछ सालों से अमेरिका उन इंश्योरेंस कंपनियों पर प्रतिबंध लगा रहा है, जो कंपवियां ईरान के तेल की शिपमेंट कवर करती है. वैसे लंदन की P&I क्लब्स (Protection & Indemnity) ज्यादातर शिपिंग को कवर करती हैं, लेकिन प्रतिबंध के कारण वे ईरानी कार्गो को कवर नहीं करतीं. ऐसे में तेल का इंश्योरेंस ईरान की ओर से अरेंज किया जा रहा है.