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जैसे अमेरिका के कई देशों में हैं... वैसे क्या भारत के दूसरे देशों में हैं मिलिट्री एयर बेस?

अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के साथ जंग कर रहे हैं. इसके जवाब में ईरान मिडिल ईस्ट के अलग-अलग देशों में बने अमेरिकी मिलिट्री, एयर और नेवल बेस पर मिसाइलें दाग रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत ने भी अमेरिका की तरह देश से बाहर अपने मिलिट्री, एयर बेस बना रखे हैं?

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भारत की सीमा की सुरक्षा के लिए बनाई गई सैन्य चौकियां बोफोर्स तोप और अन्य डिफेंस सिस्टम से लैस रहती है. (Representational Photo - AFP)
भारत की सीमा की सुरक्षा के लिए बनाई गई सैन्य चौकियां बोफोर्स तोप और अन्य डिफेंस सिस्टम से लैस रहती है. (Representational Photo - AFP)

इन दिनों मिडिल ईस्ट महाजंग की आग में झुलस रहा है. अमेरिका और इजरायल के हमले के जवाब में ईरान मिडिल ईस्ट में स्थित यूएस मिलिट्री बेस और इजरायल पर हमला कर रहा है. कुवैत, बहरीन, दुबई, ओमान, कतर जहां कहीं भी अमेरिका ने अपने सैन्य बेस बना रखे हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. वहीं अमेरिका भी ईरान पर हमले के लिए अपने इन ओवरसीज एयर और नेवल बेस का इस्तेमाल कर रहा है. 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत ने भी देश से बाहर अमेरिका की तरह दूसरे देशों में अपने मिलिट्री बेस बनाए हैं. क्योंकि, ऐसे संकट के समय में ओवरसीज सैन्य बेस काफी काम के साबित होते हैं. हालांकि, जब भारत की बात आती है तो आधिकारिक तौर पर देश के बाहर भारत का ऐसा कोई सैन्य ठिकाना नहीं है, जहां से वॉर रिलेटेड ऑपरेशन को अंजाम दिया जा सकता है.

क्या भारत ने बना रखे हैं ओवरसीज सैन्य ठिकानें 
सैन्य मामलों के जानकार रिटायर्ड रियर एडमिरल गिरीश कुमार गर्ग का कहना है कि भारत का दूसरे किसी देश से लिखित तौर पर ऐसा कोई करार नहीं है कि वो संकट के समय दूसरे देश की मदद करे या किसी दूसरे देश से मदद ले. हालांकि, कई ऐसे मौके आए हैं, जब भारत अपने पड़ोसी देशों के लिए खड़ा रहा है. चाहे श्रीलंका हो या मालदीव. जब-जब इन देशों ने संकट के समय मदद मांगी, भारत की नौसेना और एयरफोर्स ने मदद भेजी. 

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उन्होंने कहा कि इसका मतलब ये नहीं है कि भारत का किसी पड़ोसी देश के साथ ऐसा कोई लिखित सैन्य करार है. यह सिर्फ मानवीय दृष्टि से अच्छे पड़ोसी के नाते मदद करने की नीति का हिस्सा रहा है. भारत न तो किसी देश की सैन्य मदद के लिए प्रतिबद्ध है और न ही किसी देश से ऐसी कोई मदद लेने के लिए करार किया है. भारत का देश से बाहर कोई ओवरसीज सैन्य ठिकाना नहीं है. 

यह भी पढ़ें: तब अमेरिकी दूतावास पर चढ़ गए थे खुमैनी के लड़ाके, 47 साल बाद लिया अमेरिका ने अपमान का बदला

वहीं डिफेंस एक्सपर्ट ब्रिगेडियर अरुण सहगल ने भी यही बात कही. उन्होंने भी कहा कि भारत का देश से बाहर कोई सैन्य बेस नहीं है. ऐसा कोई मिलिट्री या एयर बेस भारत ने दूसरे देश के साथ मिलकर तैयार नहीं किया है, जिसका इस्तेमाल किया जा सके.  

पब्लिक डोमेन में भी ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि भारत ने कोई ओवरसीज मिलिट्री बेस विकसित किया हो. इसके साथ ही जैसा विशेषज्ञों ने बताया कि भारत किसी अन्य देश के साथ सैन्य सहायता जैसी चीज साझा करने का भी करार नहीं किया है. इन मामलों में भारत खुद पर निर्भर है.

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