प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें यूरेनियम सप्लाई का एक महत्वपूर्ण समझौता भी शामिल है. कनाडा और भारत के बीच हुई इस डील के बाद से यूरेनियम चर्चा में है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर यूरेनियम को किसी भी देश के लिए खास संपत्ति क्यों माना जाता है...
प्राकृतिक रूप में मिलने वाला यूरेनियम सीधे उपयोग के लिए बहुत काम का नहीं होता, क्योंकि इसमें ज़्यादातर हिस्सा U-238 आइसोटोप का होता है, जबकि असली उपयोगी हिस्सा U-235 होता है. इसकी प्राकृतिक यूरेनियम में बहुत कम यानी लगभग 0.7% ही होती है. इसी वजह से बिना प्रोसेस किए इसे “बेकार” जैसा कहा जाता है, क्योंकि न तो यह सीधे परमाणु ईंधन के रूप में इस्तेमाल हो सकता है और न ही अन्य उन्नत परमाणु तकनीकों में. ऐसे में इसे काम में लेने के लिए प्रोसेस किया जाता है.
यूरेनियम को उपयोगी बनाने की प्रक्रिया को संवर्धन (enrichment) कहा जाता है, जिसमें विशेष मशीनों, खासकर सेंट्रीफ्यूज, की मदद से U-235 की मात्रा बढ़ाई जाती है. जब इसका प्रतिशत बढ़ जाता है, तब वही यूरेनियम बिजली बनाने वाले परमाणु रिएक्टरों में ईंधन बन सकता है. अगर इसे बहुत अधिक स्तर तक संवर्धित कर दिया जाए तो यही पदार्थ हथियार-ग्रेड सामग्री भी बन सकता है. यही कारण है कि दुनिया भर में परमाणु कार्यक्रमों को लेकर विवाद इस बात पर ज्यादा होते हैं कि किसी देश के पास यूरेनियम है या नहीं, से ज्यादा इस बात पर कि उसका संवर्धन स्तर कितना है.
बिजली बनाने में काफी काम का है
यूरेनियम से बिजली बनाने की प्रक्रिया को परमाणु ऊर्जा उत्पादन या न्यूक्लियर पावर जनरेशन कहा जाता है. World Nuclear Association के अनुसार, प्राकृतिक यूरेनियम के जरिए काफी बिजली बनाई जा सकती है और इसका एक टुकड़ा भी कई क्विटंल कोयला के बराबर बिजली बना सकता है. कहा जाता है कि एक किलो यूरेनियम में 44000 KWH बिजली बनाई जा सकती है. इसका मतलब है कि बहुत कम मात्रा में ज्यादा बिजली बनाई जा सकती है. अगर इतनी बिजली कोयले से बनाएं तो कई हजार टन तेल और गैस चाहिए.
88 टन कोयले के बराबर एक टुकड़ा
कई रिपोर्ट में ये सामने आया है कि यूरेनियम का अंडे के आकार का एक टुकड़ा 88 टन कोयले के बराबर होता है. यानी अंडे के आकार के एक टुकड़े से जितनी बिजली बनाई जा सकती है, उतनी बिजली बनाने के लिए 88 टन कोयला चाहिए.