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लोन की EMI नहीं दे पा रहे हैं? घबराएं नहीं, बैंक नहीं ले सकता ये एक्शन

अगर आप लोन की EMI नहीं भर पा रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. बैंक तुरंत आपकी संपत्ति जब्त नहीं कर सकता और न ही आपको परेशान कर सकता है. इसके लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया होती है.

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बैंक बिना नोटिस दिए आपकी संपत्ति जब्त नहीं कर सकता है. ( Photo: Pexels)
बैंक बिना नोटिस दिए आपकी संपत्ति जब्त नहीं कर सकता है. ( Photo: Pexels)

आज के समय में ज्यादातर लोग किसी न किसी तरह का लोन लेते हैं- जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या एजुकेशन लोन. इन सभी लोन के बदले हर महीने एक तय रकम यानी EMI (किस्त) चुकानी होती है. आमतौर पर लोग अपनी कमाई के हिसाब से EMI प्लान करते हैं, लेकिन जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं चलती. कई बार अचानक ऐसी स्थिति आ जाती है जब EMI भरना मुश्किल हो जाता है. जैसे नौकरी छूट जाना, सैलरी कम हो जाना, बिजनेस में नुकसान होना, घर में मेडिकल इमरजेंसी आ जाना या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाना. ऐसी परिस्थितियों में लोग समय पर EMI नहीं चुका पाते और धीरे-धीरे टेंशन बढ़ने लगती है.

पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम बताते हैं कि ऐसे समय में सबसे जरूरी बात यह है कि घबराने की जरूरत नहीं है. अक्सर लोगों को लगता है कि अगर EMI नहीं भरी तो बैंक तुरंत घर या गाड़ी जब्त कर लेगा या पुलिस उनके घर पहुंच जाएगी. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता. इसके लिए कानून में साफ नियम बनाए गए हैं और बैंक को भी उसी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है. अगर आप लगातार 2-3 महीने तक EMI नहीं देते हैं, तो बैंक आपके लोन अकाउंट को NPA (Non-Performing Asset) घोषित कर सकता है. इसका मतलब होता है कि बैंक के रिकॉर्ड में आपका लोन 'डिफॉल्ट' की श्रेणी में चला गया है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसी समय कोई सख्त कार्रवाई शुरू हो जाएगी.

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NPA घोषित होने के बाद बैंक रिकवरी की प्रक्रिया जरूर शुरू करता है, लेकिन यह एक तय और कानूनी तरीका होता है. सबसे पहले बैंक आपको नोटिस भेजता है और आपको समय दिया जाता है ताकि आप अपनी बकाया EMI चुका सकें. इस दौरान बैंक आपसे संपर्क करने की कोशिश करता है और कई बार समाधान निकालने की भी कोशिश करता है. इसलिए अगर कभी ऐसी स्थिति आ जाए कि आप EMI नहीं भर पा रहे हैं, तो घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए.  उस वक्त सबसे पहले अपने बैंक से बात करें और अपनी समस्या बताएं और कोई समाधान निकालना सबसे सही कदम होता है.

बैंक क्या-क्या कर सकता है?
पटियाला कोर्ट के वकील महमूद आलम बताते हैं कि बैंक के पास कुछ कानूनी अधिकार होते हैं. जिसमें सबसे पहले बैंक आपको नोटिस भेजता है. जिसमें आपको आमतौर पर 60 दिन का समय दिया जाता है. इसके अलावा बैंक की तरफ से बार-बार कॉल या ईमेल करके पेंमेट को कहा जाता है. सिक्योर लोन (जैसे होम लोन/कार लोन) में संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. यह सब कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाता है.

बैंक क्या नहीं कर सकता?
बैंक बिना नोटिस दिए आपकी संपत्ति जब्त नहीं कर सकता है. इसके साथ ही बैंक की तरफ से लोग आपके घर आकर बदसलूकी या धमकी नहीं दे सकते. सिर्फ EMI न देने पर बैंक आपको जेल नहीं भेज सकते. कभी भी रात में या गलत समय पर परेशान नहीं कर सकते.  वकीलों के अनुसार, अगर बैंक या रिकवरी एजेंट ऐसा करता है तो आप शिकायत कर सकते हैं.

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रिकवरी एजेंट की क्या लिमिट है?
बैंक रिकवरी एजेंट भेज सकता है, लेकिन उनके लिए भी नियम हैं:

  • वे सिर्फ सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकते हैं.
  • उन्हें शालीन व्यवहार करना जरूरी है.
  • किसी भी तरह की धमकी या दबाव गैरकानूनी है.

आपके पास क्या विकल्प हैं?
अगर आप EMI नहीं भर पा रहे हैं, तो ये रास्ते आपके लिए मददगार हो सकते हैं:

1. बैंक से बात करें
वकील सलाह देते हैं कि सबसे पहले बैंक से खुलकर बात करें. आप चाहे तो EMI कम करवाने की मांग कर सकते हैं. इसके अलावा आप  लोन की अवधि भी बढ़वा सकते हैं.

2. लोन रिस्ट्रक्चरिंग
बैंक आपकी आर्थिक स्थिति देखकर EMI को छोटा कर सकता है या कुछ समय की राहत दे सकता है.

3. मोरेटोरियम (अस्थायी राहत)
कुछ मामलों में बैंक कुछ महीनों के लिए EMI रोक सकता है.

4. सेटलमेंट का विकल्प
अगर स्थिति बहुत खराब है, तो आप बैंक से वन टाइम सेटलमेंट (OTS) की बात कर सकते हैं.

कब वकील की जरूरत पड़ती है?
अगर बैंक या एजेंट नियम तोड़ते हैं, तो आप पुलिस में शिकायत कर सकते हैं. बैंकिंग ओम्बड्समैन (RBI) के पास जा सकते हैं और कोर्ट में केस भी कर सकते हैं.

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सबसे जरूरी सलाह
वकील का कहना है कि EMI न भर पाने की स्थिति में भागने या छुपने से समस्या और बढ़ती है. सबसे सही तरीका है कि  बैंक से बातचीत करें, अपनी स्थिति साफ बताएं और लिखित में समाधान मांगें.  EMI न भर पाने पर बैंक के पास कार्रवाई का अधिकार जरूर होता है, लेकिन वह कानून के दायरे में रहकर ही कदम उठा सकता है. कोई भी बैंक आपको परेशान या धमका नहीं सकता. ऐसे में घबराने के बजाय समझदारी से काम लें और सही कानूनी विकल्प अपनाएं.

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